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    इंसान को जोड़ते चलिए, देश-दुनिया बनती चलेंगी” डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी

    3 months ago

    -किताबी ज्ञान से ऊपर है 'संस्कारों की ओडियोबुक': मेवाड़ की विरासत से रूबरू हुए जेईसीआरसीयंस

     

    -डिजिटल दुनिया में कश्ती बनकर तैरें, डूबें नहीं: सर्वपल्ली राधाकृष्णन मेमोरियल लैक्चर सीरीज़, जेईसीआरसी

     

    जयपुर,

     

    भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि असली शिक्षा वह है जो हमें एक "पूर्ण इंसान" बनाए। उनकी इसी इंटलेक्चुअल डेप्थ और एथिकल लीडरशिप को सेलिब्रेट करते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेस (एचएसएस) ने ‘सर्वपल्ली राधाकृष्णन मेमोरियल लैक्चर सीरीज़ 4.0’ के ज़रिए छात्रों को किताबी ज्ञान से परे समाज और राष्ट्र निर्माण की बारीकियों से रूबरू कराया।

     

    चीफ़ गेस्ट व कीनोट स्पीकर, डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ (मेवाड़ राजवंश के 77वें संरक्षक) ने अपने ओजस्वी संबोधन से छात्रों में नई ऊर्जा का संचार किया। टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने आगाह किया कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ़ फायदे के लिए होना चाहिए, न कि उसका गुलाम बन जाना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया और डिजिटल दिखावे के पीर प्रैशर से ऊपर उठकर सेल्फ़ रियलाइज़ेशन और स्किल डेवलप्मेंट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्टूडेंट्स को 'मेंटल हेल्थ' और 'पॉज़िटिविटी' का मंत्र देते हुए कहा कि समाज में नेगेटिविटी एक समुद्र की तरह है, जब तक आप एक कश्ती की तरह उसके ऊपर तैरेंगे, आप सुरक्षित रहेंगे।

     

    अपने वैल्यूज़ के साथ समझौता न करने की शिक्षा व मेवाड़ की इंडीपेंडेंस और सेल्फ़-रिस्पैक्ट की नीति का उल्लेख करते हुए, डॉ. मेवाड़ ने 'रॉयल्टी' के पारंपरिक भ्रम को तोड़ते हुए स्पष्ट किया कि असली इंडिविजुअल सोवेरेंटी केवल उच्च गुणों के विकास से ही संभव है, जिसके लिए किसी बाहरी 'ऑडियोबुक' से पहले माता-पिता के अनुभवों और उनके डिसिप्लिन को समझना अनिवार्य है।

     

    यूथ एनर्जी को नेशन बिल्डर बताते हुए उन्होंने आह्वान किया कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहकर ही दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाई जा सकती है। डॉ. मेवाड़ ने '21वीं सदी - भारत की शताब्दी' का उद्घोष करते हुए ज़ोर दिया कि जब हम इंसानों को जोड़ेंगे और शिक्षा के मंदिरों को सशक्त करते हुए 'वुमन लिट्रेसी' को आधार बनाएंगे, तभी भारत अपनी वास्तविक आभा को प्राप्त कर ग्लोबल स्टेज पर चमकेगा। 

     

    मेवाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट के सेवा कार्यों से प्रेरित होकर, अमित अग्रवाल (चेयरपर्सन, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी) ने घोषणा की, कि हर साल दो छात्रों को 'पैलेस' के लेटरहेड के आधार पर पूरी तरह मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। वे चाहते हैं कि मेवाड़ की यह सेवा परंपरा शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़े।

     

    शिक्षा को करैक्टर बिल्डिंग और मोरल कन्शियसनेस बताते हुए ध्रुवी अग्रवाल (डायरेक्टर, पीपल एंड कल्चर, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी) ने इस कार्यक्रम को संस्कृति की तरफ़ बढ़ावा देते हुए एक कड़ी बताया, जहाँ हैरिटेज और मॉर्डनिटी के बीच एक सुंदर संतुलन बनता दिखाई दिया।

     

    'सादगी' और 'संस्कारों' का सेलिब्रेशन बने इस इवेंट ने जेईसीआरसी की असली पहचान- अपनी जड़ों की रिस्पेक्ट करना और फ्यूचर के लिए एक मॉडर्न विज़न रखना, को एक नई दिशा दी। आखिर में मैसेज साफ़ था: असली 'स्वैग' सादगी में है, और जब विजन क्लियर हो, तो सादगी ही सबसे बड़ा इम्पैक्ट देती है।

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