Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    जयपुर में पारंपरिक स्वाद का संगम — चौधरी तेल घानी उद्योग के देसी उत्पादों ने खींचा ध्यान

    2 months ago

    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 के तीसरे दिन युवाओं की रही जबरदस्त भीड़, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
    जयपुर।
    गुलाबी नगरी जयपुर इन दिनों सेहत, स्वाद और परंपरा का उत्सव मना रही है। जवाहर कला केंद्र में आयोजित फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 का तीसरा दिन न सिर्फ़ स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू से महक उठा, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों की झलक ने लोगों का दिल जीत लिया। राजस्थान की मिट्टी से जुड़े परंपरागत स्वादों और आधुनिक फूड इनोवेशन के संगम से यह आयोजन एक अद्भुत अनुभव बन गया है।
    इस मेले में इस बार जो सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है, वह है चौधरी तेल घानी उद्योग का स्टॉल, जहां देसी उत्पादों की सुगंध और स्वाद ने आगंतुकों को ठहरने पर मजबूर कर दिया। यहां प्रदर्शित किए जा रहे खोपरा काजू का तिलकुटा, जंगल कचरिया, घानी से निकला शुद्ध सरसों तेल, देसी घी, और मूंगफली चटनी जैसे उत्पाद न केवल पारंपरिक तकनीक से तैयार किए गए हैं, बल्कि इनका हर निवाला देशी जीवनशैली की सादगी और पौष्टिकता का प्रतीक है।
    देसी उत्पादों का नया रूप — परंपरा के साथ नवाचार
    चौधरी तेल घानी उद्योग के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके यहां आज भी पुरानी लकड़ी की तेल घानी का उपयोग किया जाता है। “हमने आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करने के बजाय पारंपरिक पद्धति को जिंदा रखा है,” उन्होंने कहा। “इससे तेल में प्राकृतिक स्वाद और पौष्टिक तत्व बरकरार रहते हैं। घानी में धीरे-धीरे निकलने वाला तेल गर्म नहीं होता, जिससे विटामिन और मिनरल्स नष्ट नहीं होते।”
    यह उद्योग लंबे समय से राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसिद्ध रहा है, पर अब फूड फेस्ट जैसे आयोजनों के जरिए यह देशभर के लोगों तक पहुंच बना रहा है।
    यहां आने वाले पर्यटक और युवा पारंपरिक खाद्य पदार्थों को देखकर उत्साहित हैं। कई लोगों ने बताया कि उन्हें “खोपरा काजू तिलकुटा” का स्वाद बचपन की याद दिलाता है।
    खोपरा काजू तिलकुटा — स्वाद के साथ सेहत का खज़ाना
    इस फेस्ट का सबसे चर्चित उत्पाद रहा खोपरा काजू तिलकुटा, जिसे चौधरी तेल घानी उद्योग ने विशेष रूप से तैयार किया है। इसे बनाने में भुना हुआ तिल, काजू, नारियल, देसी गुड़ और शुद्ध घानी तेल का उपयोग किया जाता है।
    तिलकुटा सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देने, हड्डियों को मजबूत बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
    कई आगंतुकों ने बताया कि यह तिलकुटा न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि इसमें “देसी मिठास” का वो अहसास है जो अब बाजारों में कम देखने को मिलता है।
    दिल्ली से आईं पर्यटक कविता शर्मा ने बताया, “यहां के उत्पादों में सबसे अलग बात है — इनकी ताजगी। तिलकुटा और जंगल कचरिया का स्वाद ऐसा है कि एक बार चखने के बाद भूलना मुश्किल है।”
    जंगल कचरिया की लोकप्रियता
    राजस्थान की रेत में पाई जाने वाली जंगल कचरिया (खाद्य पौधा) एक समय ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। आज जब लोग ऑर्गेनिक उत्पादों की ओर लौट रहे हैं, तो इस पारंपरिक सब्ज़ी की मांग भी बढ़ी है।
    चौधरी तेल घानी उद्योग इसे सुखाकर और नमक-मसालों के साथ पैक करके नए रूप में प्रस्तुत कर रहा है। इसे लोग स्नैक के रूप में भी पसंद कर रहे हैं।
    फेस्ट के दौरान कई युवाओं ने इसे खरीदकर कहा कि वे इसे “इंस्टेंट हेल्दी स्नैक” के रूप में इस्तेमाल करेंगे। उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि कचरिया में प्रोटीन और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो डाइट-फ्रेंडली माना जाता है।
    स्थानीय नवाचारों की झलक
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 में सिर्फ चौधरी तेल घानी उद्योग ही नहीं, बल्कि राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई स्टार्टअप्स ने भी अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है।
    किसानों से लेकर उद्यमियों तक, सभी ने “लोकल टू ग्लोबल” थीम के तहत अपने उत्पादों को नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया।
    जयपुर की मिट्टी से जुड़े उत्पादों में बाजरे की कुकीज़, मूंगफली बटर, एलोवेरा जूस, तुलसी टी, और देसी घी के विभिन्न फ्लेवर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
    लोगों ने इन उत्पादों को चखते हुए कहा कि यह फेस्ट न सिर्फ़ स्वाद का, बल्कि स्वास्थ्य चेतना और भारतीय नवाचार का उत्सव है।
    सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
    फूड फेस्ट का तीसरा दिन खासतौर पर युवाओं के नाम रहा। शनिवार को जवाहर कला केंद्र के खुले मंच पर लोक कलाकारों ने राजस्थानी नृत्य ‘घूमर’ और ‘कालबेलिया’ की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं।
    साथ ही फ्यूजन म्यूज़िक बैंड ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों को आधुनिक बीट्स के साथ जोड़कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
    जयपुर के कॉलेजों से आए छात्र-छात्राओं ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब के लिए लाइव स्ट्रीमिंग की। इस दौरान स्थानीय हस्तशिल्प और फूड स्टॉल्स पर “सेल्फी पॉइंट” बनाए गए, जहां भीड़ उमड़ पड़ी।
    उद्यमिता और रोजगार का नया आयाम
    इस आयोजन की एक और बड़ी विशेषता यह रही कि इसने स्थानीय उद्यमियों को अपनी पहचान बनाने का मंच दिया।
    चौधरी तेल घानी उद्योग जैसे कई छोटे व्यवसाय आज बड़े स्तर पर विस्तार की राह पर हैं। आयोजकों ने बताया कि फेस्ट में आए निवेशकों और रिटेल चेन प्रतिनिधियों ने कई स्थानीय उत्पादों में रुचि दिखाई है।
    फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में बढ़ते अवसरों को देखते हुए कई युवाओं ने इस मेले को एक प्रेरणा के रूप में देखा।
    जयपुर की रहने वाली स्टार्टअप उद्यमी नेहा राजन ने कहा, “ऐसे आयोजन दिखाते हैं कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।”
    सेहत, स्वाद और सस्टेनेबिलिटी की त्रिवेणी
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 का उद्देश्य केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। इस बार फेस्ट का फोकस “सस्टेनेबल फूड प्रैक्टिसेज़” पर भी रहा।
    चौधरी तेल घानी उद्योग जैसे ब्रांड न केवल परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया भी अपनाते हैं।
    उनके उत्पादों में कोई कृत्रिम रंग या प्रिज़र्वेटिव नहीं होते, और पैकेजिंग भी बायोडिग्रेडेबल सामग्री से की जाती है।
    लोगों की प्रतिक्रियाएं
    फेस्ट में आए लोगों ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ खाने-पीने का नहीं, बल्कि भारत की गांव से शहर तक की यात्रा को दर्शाता है।
    एक आगंतुक ने कहा, “यहां हर स्टॉल एक कहानी कहता है — मेहनत, परंपरा और आत्मनिर्भरता की कहानी।”
    बच्चों के लिए भी यहां विशेष वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें उन्हें देसी खाद्य सामग्री से हेल्दी स्नैक्स बनाना सिखाया गया।
    महिलाओं की भागीदारी
    इस फेस्ट में कई महिला उद्यमियों ने भी अपने स्टार्टअप्स के माध्यम से भाग लिया।
    महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए “ऑर्गेनिक अचार”, “देसी मसाले” और “मिलेट बेस्ड प्रोडक्ट्स” ने खास लोकप्रियता हासिल की।
    इन समूहों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से उन्हें बाजार की मांग समझने और नेटवर्किंग का मौका मिलता है।
    आयोजन की सफलता और आगे की राह
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट का यह तीसरा संस्करण अब तक का सबसे बड़ा और सफल संस्करण माना जा रहा है।
    आयोजक समिति के अनुसार, इस बार देशभर से लगभग 250 से अधिक प्रतिभागी और ब्रांड्स शामिल हुए हैं।
    पिछले दो दिनों में लगभग 15,000 से अधिक लोगों ने मेले का दौरा किया है, जिनमें जयपुर, अजमेर, जोधपुर और दिल्ली से आए पर्यटक भी शामिल हैं।
    फेस्ट के अंतिम दिन रविवार को फूड अवॉर्ड सेरेमनी का आयोजन होगा, जिसमें “बेस्ट देसी प्रोडक्ट”, “बेस्ट इनोवेशन”, और “पॉपुलर चॉइस” जैसी श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।
    निष्कर्ष
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक भारतीय खाद्य संस्कृति सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।
    चौधरी तेल घानी उद्योग जैसे उद्यम न केवल स्वाद के असली पहचान हैं, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” की भावना के जीवंत उदाहरण भी हैं।
    परंपरा और नवाचार के इस संगम ने जयपुर को एक बार फिर “फूड कैपिटल ऑफ़ राजस्थान” का दर्जा दिला दिया है।
    आने वाले वर्षों में यदि इस आयोजन को और विस्तार दिया जाए, तो यह निश्चित रूप से भारत के प्रमुख फूड और वेलनेस फेस्टिवल्स में अपनी मजबूत जगह बना लेगा।
    स्वाद, संस्कृति और स्वदेशी आत्मा का यह उत्सव जयपुर के दिलों में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।

    Click here to Read More
    Previous Article
    जवाहर कला केंद्र में शनिवार को गणेश स्थापना के साथ हुआ रंगारंग उद्घाटन, चार दिनों तक चलेगा फूड, हेल्थ और ऑर्गेनिक उत्पादों का महोत्सव
    Next Article
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 में औषधीय पौधों से बने उत्पादों की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान शिल्पग्राम में 100 से अधिक स्टॉल

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment