Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 में औषधीय पौधों से बने उत्पादों की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान शिल्पग्राम में 100 से अधिक स्टॉल

    2 months ago

    — तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय और मोटे अनाज के उत्पादों को मिल रही सराहना
    जयपुर।
    जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में इन दिनों स्वाद, सेहत और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। “फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025” के तहत इस बार विशेष रूप से औषधीय पौधों से बने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसने आमजन और युवाओं का खूब ध्यान आकर्षित किया है।
    फेस्ट में करीब 100 से अधिक स्टॉल्स लगाए गए हैं, जिनमें से कई स्टॉल्स पर मोटे अनाज (मिलेट्स), आयुर्वेदिक हर्ब्स और औषधीय पौधों से निर्मित हेल्थ प्रोडक्ट्स प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यहां प्रदर्शित उत्पाद सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि जीवनशैली में सेहत और संतुलन लाने का संदेश भी दे रहे हैं।
    प्रकृति की शक्ति से तैयार हेल्दी प्रोडक्ट्स
    इस प्रदर्शनी का सबसे खास आकर्षण वे उत्पाद हैं जो सीधे औषधीय पौधों से बनाए गए हैं।
    फूड फेस्ट के आयोजकों के अनुसार, इस बार फोकस "नेचुरल हेल्थ एंड वेलनेस" पर रखा गया है।
    तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, एलोवेरा, नीम, और गुड़हल जैसे पौधों से तैयार उत्पाद लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
    स्टॉल्स पर उपलब्ध तुलसी वाला हर्बल ड्रिंक, गिलोय हनी सिरप, अश्वगंधा पाउडर, एलोवेरा जूस, और हर्बल स्किन केयर किट्स को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
    आगंतुकों का कहना है कि इन उत्पादों में “देसी औषधीय गुणों की खुशबू” है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में सेहत की नई उम्मीद जगाती है।
    मोटे अनाज बने आकर्षण का केंद्र
    सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए इस बार कई स्टॉल्स पर बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसे मिलेट्स से बने स्नैक्स और हेल्दी फूड आइटम्स भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
    बाजरे की कुकीज़, रागी लड्डू, ज्वार पास्ता और मिलेट एनर्जी बार जैसे नवाचार उत्पादों ने लोगों को आकर्षित किया।
    फेस्ट में शामिल जयपुर की युवा उद्यमी नेहा रंजन ने बताया, “हमने मिलेट्स को सिर्फ पारंपरिक खाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें मॉडर्न टेस्ट के साथ जोड़ा है ताकि नई पीढ़ी भी इन्हें अपनाए।”
    उनका स्टॉल युवाओं के लिए हेल्दी स्नैक्स का हॉटस्पॉट बना हुआ है।
    आयुर्वेद से जुड़ती आधुनिक सोच
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट का यह संस्करण सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक चेतना का भी उत्सव है।
    यहां प्रदर्शित उत्पाद आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति का संगम हैं।
    कई आयुर्वेदिक संस्थानों और हर्बल कंपनियों ने अपने शोध आधारित उत्पाद प्रदर्शित किए हैं, जो प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाने, नींद सुधारने, त्वचा को निखारने और तनाव कम करने में मददगार बताए जा रहे हैं।
    गिलोय ड्रिंक और अश्वगंधा लड्डू को लोग खूब खरीद रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक सुमित गुप्ता ने बताया, “यहां के उत्पाद दिखाते हैं कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली कितनी समृद्ध है। अब समय है कि हम फिर से इन औषधीय पौधों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।”
    हर्बल उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि
    प्रदर्शनी में मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि कोविड काल के बाद से लोगों में हर्बल और नेचुरल उत्पादों के प्रति झुकाव तेज़ी से बढ़ा है।
    लोग अब दवाओं के बजाय रोकथाम पर आधारित जीवनशैली अपनाने लगे हैं।
    इस दिशा में फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट जैसे आयोजन अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को भी बाजार से जोड़ रहे हैं।
    यहां प्रदर्शित कई उत्पाद घरेलू कारीगरों और महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए हैं, जिससे ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है।
    शिल्पग्राम में उमड़ा जनसैलाब
    शनिवार को फेस्ट में सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिल्पग्राम परिसर में तरह-तरह की खुशबुओं और रंगों से भरे स्टॉल्स ने माहौल को जीवंत बना दिया।
    लोगों ने न सिर्फ उत्पादों को खरीदा, बल्कि उनके बारे में जानकारी भी ली। कई स्टॉल्स पर “हर्बल टी टेस्टिंग” और “ऑर्गेनिक प्रोडक्ट डेमो” का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
    सांस्कृतिक मंच पर शाम को पारंपरिक लोक संगीत और योग-प्रेरित डांस परफॉर्मेंस ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
    प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति बढ़ता विश्वास
    जयपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. आर. एस. शर्मा (नाम काल्पनिक) ने बताया कि “भारत की मिट्टी में हजारों ऐसे पौधे हैं जिनमें औषधीय गुण हैं। यदि हम इन्हें अपने भोजन और दैनिक उपयोग की चीजों में शामिल कर लें, तो कई बीमारियों से बचाव संभव है।”
    उनके अनुसार, फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट जैसी पहलें लोगों को यह समझाने में मदद करती हैं कि सेहत सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि प्राकृतिक खानपान और संतुलित जीवनशैली से भी बनी रहती है।
    महिला उद्यमियों की भूमिका
    इस बार के आयोजन में कई महिला स्व-सहायता समूह भी सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं।
    “अंगनवाड़ी प्रोडक्ट्स”, “देसी मसाले”, “हर्बल साबुन”, “नीम क्रीम” और “एलोवेरा जैल” जैसे उत्पाद महिला समूहों ने तैयार किए हैं।
    इन महिलाओं ने बताया कि फेस्ट जैसे आयोजनों से उन्हें न केवल आर्थिक सशक्तिकरण मिला है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
    आयोजन की थीम — ‘नेचर से नेचर तक’
    आयोजकों ने बताया कि इस बार की थीम “नेचर से नेचर तक” रखी गई है, जिसका उद्देश्य है लोगों को प्रकृति से जोड़ना।
    प्राकृतिक, रासायनिक मुक्त और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को यह समझाना कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
    शिल्पग्राम का वातावरण भी इस थीम को बखूबी दर्शा रहा है — मिट्टी की खुशबू, बांस की झोपड़ियां, हस्तनिर्मित सजावट और देसी धुनों ने फेस्ट को एक जीवंत ग्रामीण मेले का रूप दे दिया है।
    अंतिम दिन की प्रतीक्षा
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 का यह संस्करण रविवार तक चलेगा।
    अंतिम दिन “बेस्ट हर्बल इनोवेशन अवॉर्ड” और “मोटे अनाज प्रमोशन अवॉर्ड” जैसी श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
    लोगों में इसके प्रति उत्सुकता चरम पर है।
    आयोजकों ने बताया कि इस बार फेस्ट में करीब 15 राज्यों से उत्पादक, शोधकर्ता और स्टार्टअप्स शामिल हुए हैं, जिनमें से कई अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।
    निष्कर्ष
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट 2025 सिर्फ एक फूड फेस्टिवल नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा और विज्ञान के संगम का उत्सव बन गया है।
    यहां प्रदर्शित औषधीय पौधों से बने उत्पाद हमें याद दिलाते हैं कि सेहत की असली जड़ें हमारे खेतों, बागों और जंगलों में ही छिपी हैं।
    जयपुर का यह आयोजन यह संदेश दे रहा है कि जब हम प्रकृति से जुड़ते हैं, तो न सिर्फ शरीर, बल्कि मन और समाज भी स्वस्थ बनता है।
    स्वाद के साथ सेहत का यह संगम आने वाले वर्षों में भारत की नई स्वास्थ्य क्रांति की दिशा तय कर रहा है।

    Click here to Read More
    Previous Article
    जयपुर में पारंपरिक स्वाद का संगम — चौधरी तेल घानी उद्योग के देसी उत्पादों ने खींचा ध्यान
    Next Article
    राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त मुहिम — देसी उत्पादों के माध्यम से ‘बीमारियों से बचाव’ पर जोर

    Related धर्म और अध्यात्म Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment