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    राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त मुहिम — देसी उत्पादों के माध्यम से ‘बीमारियों से बचाव’ पर जोर

    2 months ago

    न्यूट्री एंड फूड फेस्ट 2025 — प्राकृतिक जीवनशैली को बढ़ावा देने की पहल
    जयपुर।
    गुलाबी नगरी जयपुर का जवाहर कला केंद्र इन दिनों सेहत, स्वाद और स्वदेशी उत्पादों का केंद्र बना हुआ है। यहां चल रहे न्यूट्री एंड फूड फेस्ट 2025 में इस बार विशेष रूप से प्राकृतिक उत्पादों और देसी जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त पहल के तहत यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को साकार कर रहा है, जिसमें कहा गया है — “रोग से पहले ही रोकथाम पर ध्यान देना ही असली स्वास्थ्य नीति है।”
    स्वस्थ भारत की दिशा में उठाया कदम
    इस फूड फेस्ट का उद्देश्य केवल स्वाद या व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि एक स्वस्थ भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाना है।
    सरकार की ओर से ऐसे आयोजन इस सोच के साथ किए जा रहे हैं कि आमजन को रासायनिक उत्पादों से दूर रखकर प्राकृतिक, पौष्टिक और स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए।
    इस बार फेस्ट की थीम “प्राकृतिक खानपान — रोगों से बचाव” रखी गई है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आयुर्वेदिक ज्ञान को केंद्र में रखा गया है।
    आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन एक ऐसा मंच है जो पारंपरिक भारतीय भोजन संस्कृति और आधुनिक पोषण विज्ञान के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।
    प्राकृतिक और देसी उत्पादों को मिला प्रमुख स्थान
    फेस्ट में 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश पर देसी अनाज, ऑर्गेनिक मसाले, हर्बल ड्रिंक्स, और प्राकृतिक तेल प्रदर्शित किए गए हैं।
    बाजरा, ज्वार, रागी, और कोदो जैसे मोटे अनाजों से बने उत्पादों को विशेष स्थान दिया गया है, जो प्रोटीन और फाइबर से भरपूर हैं।
    इसके अलावा, तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, नीम, और एलोवेरा से बने औषधीय उत्पादों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
    जयपुर, कोटा और उदयपुर के स्थानीय किसानों और स्टार्टअप्स ने अपने ऑर्गेनिक ब्रांड्स को यहां प्रदर्शित किया है।
    कई उत्पाद “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” की भावना को साकार करते दिखे।
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट — मोदी की सोच का प्रतिबिंब
    आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस नीति से मिली है जिसमें देश के नागरिकों को प्रीवेंटिव हेल्थकेयर (रोगों से पहले बचाव) की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री ने अपने कई मंचों से यह संदेश दिया है कि भारत को “फिट नेशन” बनाने के लिए हमें प्राकृतिक खानपान और देसी जीवनशैली की ओर लौटना होगा।
    इस फेस्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इसी दिशा में सत्र आयोजित किए, जिनमें लोगों को बताया गया कि आधुनिक फास्टफूड की जगह अगर देशी आहार को अपनाया जाए, तो मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
    लोगों को दी जा रही सेहत की जानकारी
    फेस्ट के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों की ओर से हेल्थ अवेयरनेस वर्कशॉप्स भी आयोजित की जा रही हैं।
    इनमें आमजन को बताया जा रहा है कि कैसे घर पर उपलब्ध साधारण देसी सामग्री — जैसे हल्दी, अदरक, नींबू, तुलसी, और गुड़ — को रोजमर्रा के आहार में शामिल कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
    साथ ही “Eat Right India” अभियान से जुड़े विशेषज्ञों ने बच्चों और युवाओं को यह सिखाया कि कैसे संतुलित आहार अपनाकर लंबी उम्र और बेहतर जीवनशैली प्राप्त की जा सकती है।
    देसी खानपान और आत्मनिर्भरता का संगम
    न्यूट्री एंड फूड फेस्ट का एक और महत्वपूर्ण पहलू है ‘आत्मनिर्भरता के साथ स्वास्थ्य’ का संदेश।
    यहां प्रदर्शित अधिकांश उत्पाद ग्रामीण कारीगरों, महिला स्व-सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए हैं।
    सरकार की “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” योजना के तहत भी कई जिलों के विशेष उत्पाद यहां प्रदर्शित किए जा रहे हैं — जैसे जोधपुर का सेंद्रीय मेथीदाना, बारां की तुलसी चाय, और बाड़मेर का देसी सरसों तेल।
    इन स्टॉल्स पर न केवल बिक्री हो रही है, बल्कि यह आमजन में विश्वास भी जगा रहे हैं कि लोकल प्रोडक्ट्स में ही स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता दोनों छिपे हैं।
    सांस्कृतिक गतिविधियों से बढ़ा आकर्षण
    स्वास्थ्य और खानपान के साथ-साथ फेस्ट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी खूब रंग भरा।
    शाम के समय राजस्थानी लोकनृत्य ‘कालबेलिया’ और ‘घूमर’ की प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया।
    संगीत, हस्तशिल्प और परंपरागत खाद्य प्रदर्शनी ने मिलकर इस आयोजन को एक सांस्कृतिक महोत्सव का रूप दे दिया।
    फूड स्टॉल्स पर बाजरे की खिचड़ी, देसी मालपुआ, और मूंगफली चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजन लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहे।
    जनता की प्रतिक्रियाएं
    फेस्ट में पहुंचे लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल स्वाद का अनुभव कराते हैं, बल्कि जीवनशैली सुधारने का प्रेरक माध्यम भी हैं।
    जयपुर के निवासी विनोद शर्मा ने बताया, “आजकल हर घर में बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन अगर हम प्राकृतिक चीजों की ओर लौटें तो दवाओं पर निर्भरता कम होगी।”
    वहीं युवाओं ने कहा कि इस तरह के फेस्ट उन्हें यह सिखाते हैं कि हेल्थ और ट्रेडिशन को एक साथ कैसे जोड़ा जा सकता है।
    सरकारी योजनाओं से जुड़ा जनजागरूकता अभियान
    फूड एंड न्यूट्रीफेस्ट के दौरान “फिट इंडिया मूवमेंट”, “नेशनल न्यूट्रिशन मिशन” और “आयुष्मान भारत अभियान” से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई।
    इनमें लोगों को यह जानकारी दी जा रही है कि सरकार किस तरह से पोषण, स्वच्छता और रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।
    हेल्थ विभाग के अधिकारी ने बताया कि फेस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश है कि स्वास्थ्य अस्पतालों से नहीं, रसोई से शुरू होता है।
    निष्कर्ष
    जयपुर में आयोजित न्यूट्री एंड फूड फेस्ट 2025 ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब “इलाज आधारित स्वास्थ्य नीति” से आगे बढ़कर “रोकथाम आधारित जीवनशैली” की ओर बढ़ रहा है।
    यह आयोजन न केवल प्रधानमंत्री की ‘फिट इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को बल देता है, बल्कि समाज को यह भी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य का असली रास्ता प्रकृति और परंपरा से होकर गुजरता है।
    जवाहर कला केंद्र में चल रहा यह आयोजन न केवल स्वाद का उत्सव है, बल्कि एक संदेश भी —
    “देसी बनो, स्वस्थ रहो, और प्रकृति से जुड़ो।”

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