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    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का 55वां स्थापना दिवस एवं साहित्योत्सव का शुभारम्भ, भारतीय संस्कृति सभ्यता की संवाहक है संस्कृत भाषा- झाबर सिंह खर्रा

    3 months ago

    जयपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली का 55वां स्थापना दिवस एवं साहित्योत्सव बुधवार को विश्वविद्यालय के जयपुर परिसर, त्रिवेणी नगर में भव्य रूप से आयोजित हुआ। जयपुर परिसर निदेशक प्रो वाई एस रमेश ने बताया कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातः 8:00 बजे श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ के साथ हुआ। तत्पश्चात संस्कृत पुस्तकों की प्रदर्शनी और धर्माधिकरण (Moot Court) का उद्घाटन किया गया। मुख्य अतिथि झाबर सिंह खर्रा, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री, राजस्थान सरकार रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। इस अवसर पर सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. गुलाब कोठारी, प्रधान सम्पादक, राजस्थान पत्रिका तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व सांसद सीकर, और प्रो. मदन मोहन झा, शैक्षणिक अधिष्ठाता (सीएसयू) उपस्थित रहे। इस अवसर पर पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक डॉ. गुलाब कोठारी का विशेष सम्मान एवं अभिनंदन किया गया। 

    मुख्य अतिथि झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा और सभ्यता की संवाहक है। वसुधैव कुटुम्बकम् का यह संदेश देती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ वेद-विज्ञान, दर्शन-डिजिटल और नीति-नवाचार का सुंदर संगम देखने को मिलता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जयपुर परिसर के लिए आवश्यक भूमि आवंटन हेतु राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय शास्त्र और छात्र रक्षा दोनों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में भारतीय विधिशास्त्र, ITEP यौगिक विज्ञान, आयुर्वेद गुरुकुलम् जैसे नये कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए हैं। साथ ही छात्रवृत्ति राशि को 50% तक बढ़ाया गया है। कुलपति ने जयपुर परिसर में वेद-वेदांग विज्ञान परंपरा पर शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई तथा एआई आधारित संस्कृत चैलेंज की घोषणा की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओ का लोकार्पण किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार जताते हुये विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों के योगक्षेम हेतु स्वास्थ्य योजना का शुभारंभ किया गया। अब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को योगेक्षेम योजना के अंतर्गत चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। कुलपति वरखेड़ी ने कहा कि विश्वविद्यालय, आदर्श महाविद्यालय के सभी रिक्त पदों को आगामी 6 माह में भरा जायेगा। साथ ही तीन परिसरों में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ होने की घोषणा भी की गई। इस अवसर विशिष्ट अतिथि स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती ने संबोधन में कहा कि वेदों की छत्रछाया में ही चरित्र निर्माण संभव है। संस्कृत विश्व की जनवाणी है, जो शांति और ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने छात्रों से वेदविज्ञान और सनातन संस्कृति के अनुसरण की प्रेरणा लेने की बात कही । 

    सह निदेशक प्रो बोधकुमार झा ने बताया की साहित्योत्सव के तहत अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में मंथन सत्र आयोजित हुआ। जिसमे मुख्य वक्ता पत्रिका समूह सम्पादक डॉ गुलाब कोठारी ने वेदों के वैज्ञानिक महत्व को सामाजिक परिप्रेक्ष्य में उपयोगी बताते हुये शोध के नये आयाम उपस्थापित किये। अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर विकसित भारतम् विषय पर संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित संस्कृत कवियों ने काव्यपाठ किया। समापन सत्र में *को भवति बृहस्पति* कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति कि तर्ज पर संस्कृत कि क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तथा इस प्रतियोगिता में परिसर के छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा ओलम्पियाड के राष्ट्रीय स्तर के विजेता छात्रों को सम्मानित किया गया। एवं कुलपति पुरस्कार योजना के अंतर्गत रामजीलाल मीणा, गिरधर गोपाल पोपली, देवेन्द्र सिंह, एवं वृंदावन को कर्मयोगी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व निदेशक प्रो.अर्कनाथ चौधरी, प्रो. सुदेश शर्मा, प्रो. भगवती सुदेश, प्रो.लोकमान्य मिश्र निदेशक IQAC प्रो. ईश्वर भट्ट. प्रो शिवकांत झा, प्रो. रामकुमार शर्मा, प्रो ताराशंकर पाण्डेय,प्रो.सत्यनारायण शर्मा, प्रो. सत्यम कुमारी, वित्त अधिकारी संजीव कुमार गोयल, डॉ. फतह सिंह, प्रो. संतोष मित्तल, प्रो. विष्णुकांत पाण्डेय, प्रो. कुलदीप शर्मा, प्रो. गणेश टी. पंडित, डॉ. कैलाश सैनी, डॉ. विजय दाधीच, डॉ. प्रमोद बुटोलिया डॉ योगेन्द्र दीक्षित सहित सैकड़ों विद्वान् छात्र-छात्राए उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. डम्बरुधरपति, डॉ. रानी दाधीच एवं डॉ. रेखा शर्मा ने किया।

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