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    केरल: 10 महीने की बच्ची ब्रेन डेड, माता-पिता के अंगदान से कई ज़िंदगियों को मिला जीवन

    3 months ago

    केरल से इंसानियत और संवेदना को छू लेने वाली एक बेहद भावुक खबर सामने आई है। एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई 10 महीने की बच्ची को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उसके माता-पिता ने ऐसा फैसला लिया, जिसने कई ज़िंदगियों को नई उम्मीद दे दी। गहरे दुख के बीच लिया गया यह निर्णय न केवल केरल, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है।

     

    सड़क हादसे से अस्पताल तक: इलाज की लंबी लड़ाई

     

    बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम को 5 फरवरी को हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह अपने परिवार के साथ कोट्टायम से तिरुवल्ला जा रही थी, तभी एमसी रोड पर पल्लम-बोरमा जंक्शन के पास उनकी कार सामने से आ रहे वाहन से टकरा गई। हादसे में आलिन मौके पर ही बेहोश हो गई, जबकि उसकी मां और नाना-नानी को भी गंभीर चोटें आईं।

    पहले उसे चंगनाशेरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर सेंट थॉमस अस्पताल ले जाया गया। हालत लगातार बिगड़ने पर 6 फरवरी को उसे एर्नाकुलम स्थित अमृता अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उसे गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया।

     

    डॉक्टरों की कोशिशें नाकाम, 13 फरवरी को ब्रेन डेड घोषित

     

    लगातार इलाज और मेडिकल प्रयासों के बावजूद डॉक्टर बच्ची की हालत में सुधार नहीं ला सके। आखिरकार 13 फरवरी को आलिन को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। यह वह क्षण था, जिसने परिवार को असहनीय पीड़ा में डाल दिया।

     

    दुख के बीच लिया गया बड़ा फैसला: अंगदान से कई ज़िंदगियों को नई उम्मीद

     

    इस गहरे शोक के बीच भी आलिन के माता-पिता अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन ने असाधारण साहस और मानवता का परिचय देते हुए अपनी बेटी के अंगदान की सहमति दी। इस फैसले के ज़रिये आलिन की छोटी-सी ज़िंदगी कई अन्य ज़िंदगियों में सांस बनकर आगे बढ़ने जा रही है।

     

    किन मरीजों को मिलेगा लाभ: राज्यभर में जीवन की नई शुरुआत

     

    केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला समाज के लिए एक मिसाल है। उनके अनुसार :-

     

    बच्ची की दोनों किडनियां तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के एसएटी अस्पताल में इलाज करा रहे एक 10 वर्षीय बच्चे को दी जाएंगी

    लिवर केआईएमएस अस्पताल को सौंपा गया है

    हृदय वाल्व श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट को भेजा जाएगा

    आंखें अमृता अस्पताल के आई बैंक को दान की गई हैं

     

    अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए विशेष एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई, जो शुक्रवार देर रात तिरुवनंतपुरम पहुंची।

     

    इंसानियत की जीत: मौत के बाद भी जीवन का संदेश

     

    पूरी अंगदान प्रक्रिया का समन्वय केरल स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन द्वारा किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि इस अंगदान से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

     

    आलिन शेरिन अब्राहम भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता के फैसले ने यह साबित कर दिया कि मौत के बाद भी जीवन दिया जा सकता है। यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि उस इंसानियत की है, जो सबसे गहरे दुख में भी दूसरों के लिए रोशनी बनकर सामने आती है।

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