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    नई शिक्षा पद्धति मौलिक सोच से तैयार भारत का भविष्य -राज्यपाल

    2 months ago

    अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम 2026 आयोजित

     

    विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने विश्वविद्यालयो को संस्कार देने वाले केंद्र बनाने पर जोर दिया

     

    शिक्षण संस्थाओं पर लोगों का विश्वास बढ़ाने हेतु कार्य हो

     

    शिक्षण संस्थान नागरिकों का चरित्र अच्छा कर देश को आगे बढ़ाएं

     

    जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि देश की नई शिक्षा पद्धति मौलिक सोच से तैयार है। यह भारत को भविष्य में विश्वभर में शिक्षा क्षेत्र के जरिए अग्रणी करने वाली है। उन्होंने कहा कि मौलिक विचार ही देश में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने नागरिकों का चरित्र अच्छा करके देश को आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

     

    राज्यपाल बागडे मंगलवार को विद्याभारती, राजस्थान विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम 2026" में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं पर लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए जवाबदेही रखते हुए कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए देश को अच्छे नागरिक बनाने के लिए मिलकर कार्य करें।

    उन्होंने विश्व में भारत की शिक्षा की स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि अनुसंधान और विकास में भारत का सातवां और पेटेंट कराने में छठा स्थान है।  भारत में असीम संभावना है, सभी क्षेत्रों में देश को आगे लाने के लिए कार्य किया जाए। उन्होंने आचार्य विनोबा भावे और महर्षि अरविंद के कहे की चर्चा करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा पद्धति से चिंतन और मनन की दृष्टि को हटा दिया। इसे फिर से शिक्षा में लागू किया जाए। उन्होंने शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों की इच्छाशक्ति बढ़ाने के लिए कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों को इसके लिए आगे आकर पहल करने का आह्वान किया।

     

    राज्यपाल ने कहा कि कॉलेज में प्रवेश से पहले स्कूल में विद्यार्थियों की नींव अच्छी तैयार होनी चाहिए। उनकी बौद्धिक क्षमता वृद्धि के लिए कार्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हमने महाराष्ट्र के गांवों में स्थापित शिक्षण संस्थानों में एक प्रयोग किया कि वहां शिक्षकों के चिंतन शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में उन्हें विद्यार्थियों को पढ़ाने के अच्छे तरीकों और उनके लिए सोच रखते हुए विमर्श के लिए प्रेरित किया। इससे बच्चों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत हुआ है।

     

    विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कार और दिशा देने की दृष्टि से अखिल भारतीय संस्थागत संगम भविष्य की दिशा देने वाला है। उन्होंने कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों ने शिक्षा क्षेत्र में भारत का नेतृत्व किया।

     देवनानी ने कहा कि विश्वविद्यालय डिग्री देने वाले संस्थान नहीं बने बल्कि संस्कार देने वाले, भारतीय होने में गर्व की अनुभूति कराने वाले संस्थान बने। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि देश की चीजों को युगानुकूल और और युग के विषयों को देशानुकूल बनाने के लिए कार्य करें। उन्होंने सभी को लक्ष्य निर्मित कर भारत को विश्व का मार्गदर्शक बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

     

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जगदीश कुमार ने  भारतीय ज्ञान और भाषाओं में हो रहे महत्वपूर्ण कार्यों की चर्चा करते हुए राष्ट्र और इसकी संस्कृति पर गर्व करने पर जोर दिया। इस अवसर पर अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम का जयपुर घोषणा पत्र भी जारी किया गया। कॉलेज आयुक्त ओमप्रकाश बैरवा ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। विद्याभारती के डॉ. सुनील जांगिड़ ने आभार जताया।

     

     

     

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