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    नवंबर की शुरुआत में दिल्ली की हवा हुई और जहरीली, आठ इलाकों में AQI 400 के पार; जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित

    12 minutes ago

    Yugcharan News / 04-11-2026

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नवंबर की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है। मंगलवार शाम चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। सोमवार के मुकाबले हवा की गुणवत्ता में और गिरावट दर्ज की गई। शहर के कम से कम आठ इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। निगरानी एजेंसियों ने आशंका जताई है कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहने पर दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी प्रदूषण का स्तर गंभीर हो सकता है।

    दिल्ली में सबसे खराब स्थिति उत्तर दिल्ली के जहांगीरपुरी की रही, जहां AQI 462 दर्ज किया गया। इसके बाद पंजाबी बाग में 449, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) क्षेत्र में 445, अलीपुर में 430, विवेक विहार में 425, मुंडका में 422, बवाना में 421 और नॉर्थ कैंपस में 405 AQI दर्ज किया गया। इन सभी इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही। वहीं, सफदरजंग, जिसे दिल्ली का प्रमुख आधार निगरानी केंद्र माना जाता है, वहां हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

    पराली जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण का हिस्सा

    दिल्ली की हवा में प्रदूषण बढ़ने के पीछे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाले धुएं की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने से होने वाले उत्सर्जन का योगदान 8.5 प्रतिशत था। अनुमान लगाया गया कि मंगलवार को यह बढ़कर 15.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    यह स्तर दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के योगदान के लगभग बराबर हो सकता है। राजधानी में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। IITM के निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System) के मॉडल के मुताबिक, पराली जलाने का योगदान 4 नवंबर तक बढ़कर 20 प्रतिशत और 5 नवंबर तक 22 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है।

    इन अनुमानों से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, राजधानी के प्रदूषण में पराली के अलावा वाहन उत्सर्जन और अन्य स्थानीय स्रोतों की भी भूमिका बनी हुई है।

    अगले छह दिनों तक राहत की संभावना कम

    IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों तक दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रह सकती है और कुछ समय में गंभीर स्तर तक भी पहुंच सकती है। ऐसे में फिलहाल राजधानी के लोगों को प्रदूषण से जल्द राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण का स्तर केवल उत्सर्जन की मात्रा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि मौसम की परिस्थितियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि हवा की गति कम हो और वातावरण में प्रदूषकों का फैलाव प्रभावी ढंग से न हो पाए, तो वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक जमीन के नजदीक जमा होने लगते हैं।

    दिल्ली में मौजूदा समय में ऐसी ही प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। इसी कारण ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू होने के बावजूद कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता में गिरावट जारी रही।

    GRAP-II लागू, फिर भी प्रदूषण में बढ़ोतरी

    दिल्ली में सोमवार से GRAP-II के तहत प्रतिबंध लागू हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में विभिन्न गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रदूषण के स्रोतों को सीमित करना है। इसके बावजूद मंगलवार को शहर के कई निगरानी केंद्रों पर AQI में गिरावट दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा प्रदूषण संकट में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां अहम भूमिका निभा रही हैं। जब वातावरण में प्रदूषकों के फैलने और बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, तो पहले से मौजूद प्रदूषण भी लंबे समय तक बना रहता है। ऐसे में केवल प्रतिबंध लागू करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर लगातार नियंत्रण और मौसम के अनुकूल परिस्थितियों की भी जरूरत होती है।

    GRAP-II के लागू रहने के बावजूद प्रदूषण में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि राजधानी की हवा पर कई कारकों का एक साथ असर पड़ रहा है। पराली जलाने से बढ़ता धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और हवा में प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियों का अभाव मिलकर स्थिति को और खराब कर रहे हैं।

    तापमान में गिरावट, लेकिन हवा को नहीं मिली राहत

    दिल्ली में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, लेकिन इससे वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। सफदरजंग मौसम केंद्र के अनुसार, मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। वहीं न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

    तापमान में बदलाव के बावजूद प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की दिशा, गति और वातावरण की स्थिरता प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित करती है। इसलिए केवल तापमान में गिरावट या बढ़ोतरी से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि वायु गुणवत्ता में सुधार होगा या नहीं।

    दिल्ली के कई इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता

    जब AQI 300 से ऊपर पहुंचता है, तो हवा को बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है। वहीं 400 से अधिक AQI गंभीर श्रेणी में आता है। दिल्ली के आठ इलाकों में यह स्तर पार होना राजधानी के लिए चिंता का विषय है।

    गंभीर प्रदूषण के दौरान हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और गले में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

    ऐसी परिस्थितियों में लोगों को प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने और अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने से बचने की सलाह दी जाती है। बाहर निकलना जरूरी होने पर स्थानीय स्वास्थ्य सलाह और प्रदूषण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

    पराली और स्थानीय प्रदूषण पर नियंत्रण की चुनौती

    दिल्ली में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान तापमान में गिरावट, हवा की कम गति और वातावरण में प्रदूषकों के ठहराव जैसी परिस्थितियां प्रदूषण को गंभीर बना सकती हैं। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं से निकलने वाला धुआं भी राजधानी की हवा को प्रभावित करता है।

    इस बार भी IITM के अनुमानों में पराली जलाने से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। यदि यह योगदान अनुमान के अनुसार बढ़ता है और मौसम प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल नहीं रहता, तो दिल्ली में वायु गुणवत्ता पर दबाव और बढ़ सकता है।

    फिलहाल राजधानी में GRAP-II के प्रतिबंध लागू हैं, लेकिन आठ इलाकों में AQI 400 से ऊपर पहुंचने और अगले छह दिनों तक हवा के बेहद खराब या गंभीर बने रहने के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करेगी कि पराली जलाने से होने वाले उत्सर्जन, स्थानीय प्रदूषण स्रोतों और मौसम की परिस्थितियों में कितना बदलाव आता है।

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