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    PSLV-C62 मिशन में तकनीकी बाधा, एक प्रायोगिक उपग्रह ने सफलतापूर्वक किया पृथक्करण

    4 days ago

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C62 प्रक्षेपण मिशन को उड़ान के दौरान तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा, जिसके कारण अधिकांश उपग्रह अपने निर्धारित कक्षा-पथ तक नहीं पहुंच सके। हालांकि, इस मिशन के बीच एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि एक प्रायोगिक तकनीकी उपग्रह ने प्रक्षेपण यान से सफलतापूर्वक अलग होकर प्रारंभिक डेटा का संचार किया।

    चार चरणों वाला 44.4 मीटर ऊंचा पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C62) सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निर्धारित समय पर प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन का उद्देश्य EOS-N1 नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ कई सह-यात्री उपग्रहों को लगभग 512 किलोमीटर की सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित करना था।

    मिशन के दौरान क्या हुआ

    ISRO द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, प्रक्षेपण के शुरुआती चरण पूरी तरह सामान्य रहे। प्रक्षेपण के बाद पहले और दूसरे चरण में यान की कार्यप्रणाली संतोषजनक रही और मिशन नियंत्रण केंद्र से सभी मानक मापदंड सामान्य बताए गए।

    हालांकि, उड़ान के तीसरे चरण के दौरान यान के व्यवहार में कुछ अनियमितताएं दर्ज की गईं। इन तकनीकी बदलावों के कारण रॉकेट अपनी निर्धारित दिशा बनाए नहीं रख सका, जिससे अधिकांश उपग्रहों को तय कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।

    ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण के दौरान प्रणोदन प्रणाली से जुड़ी कुछ असामान्य गतिविधियां देखी गईं। इसके चलते मिशन नियोजित मार्ग पर आगे नहीं बढ़ पाया। फिलहाल, सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विस्तृत तकनीकी विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।

    एक उपग्रह की आंशिक सफलता

    मिशन की समग्र चुनौती के बावजूद, एक छोटे तकनीकी प्रदर्शक उपग्रह ने प्रक्षेपण यान से सफलतापूर्वक अलग होकर अपने सिस्टम सक्रिय किए और प्रारंभिक संकेत भेजे। यह उपग्रह यूरोप स्थित एक निजी स्टार्टअप द्वारा विकसित किया गया था और इसे नई तकनीकों के परीक्षण के उद्देश्य से भेजा गया था।

    उपग्रह विकसित करने वाली टीम ने इस उपलब्धि को उत्साहजनक बताया है और कहा है कि उसके कक्षा-पथ का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। विस्तृत रिपोर्ट आने वाले समय में साझा की जाएगी।

    मिशन में शामिल उपग्रह

    PSLV-C62 मिशन में कुल 16 उपग्रह शामिल थे, जिनमें एक प्रमुख पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और कई सह-यात्री उपग्रह थे। ये उपग्रह भारतीय अनुसंधान संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित किए गए थे।

    इनमें तकनीकी परीक्षण, संचार प्रणाली, ईंधन तकनीक और शैक्षणिक अनुसंधान से जुड़े प्रयोगात्मक उपग्रह शामिल थे। तकनीकी विचलन के कारण ये उपग्रह निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सके।

    ISRO का आधिकारिक बयान

    ISRO ने अपने आधिकारिक संचार माध्यमों के जरिए पुष्टि की कि PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी असामान्यता सामने आई। अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इसे समझने और भविष्य की उड़ानों के लिए सुधारात्मक कदम उठाने हेतु विस्तृत जांच की जा रही है।

    मीडिया को संबोधित करते हुए ISRO प्रमुख ने कहा कि अंतरिक्ष मिशन अत्यंत जटिल होते हैं और प्रत्येक तकनीकी चुनौती भविष्य के लिए सीख प्रदान करती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन पूरी पारदर्शिता के साथ विश्लेषण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।

    आगे की राह

    यह हाल के समय में PSLV से जुड़े मिशनों में दूसरी बार सामने आई तकनीकी चुनौती है। विशेषज्ञों के अनुसार, विस्तृत जांच के बाद आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे ताकि आगामी प्रक्षेपणों में इस प्रकार की बाधाएं न आएं।

    पूर्व ISRO वैज्ञानिकों का मानना है कि डेटा विश्लेषण में समय लग सकता है, क्योंकि हर तकनीकी पहलू की गहन समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ISRO द्वारा आधिकारिक निष्कर्ष साझा किए जाने की संभावना है।

    भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति प्रतिबद्धता

    इस चुनौती के बावजूद ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया है। संगठन की प्रक्षेपण सफलता दर मजबूत रही है और आने वाले वैज्ञानिक, व्यावसायिक और अनुसंधान मिशनों पर काम जारी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष अभियानों में उच्च तकनीकी सटीकता की आवश्यकता होती है और चुनौतियां इस प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। एक उपग्रह का सफल पृथक्करण यह दर्शाता है कि मिशन के कई सिस्टम प्रभावी रूप से कार्यरत रहे।

     

    ISRO की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्ययोजना को लेकर अंतरिक्ष समुदाय की नजरें अब आने वाले आधिकारिक अपडेट्स पर टिकी हैं।

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