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    शिक्षा विभाग का बड़ा फरमान

    2 months ago




    10वी 12 वी बोर्ड विधार्थीयो परीक्षा खुद के स्कूल में परीक्षा केंद्र के स्थान पर अन्य दूसरे विधालय में जाना होगा

    माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के आदेश का राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने विरोध जताया है , संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि  मरुस्थलीयो जिलों में अधिकतर बोर्ड परीक्षा केंद्र की दूरी विधार्थियो के अपने खुद के विधालय के बोर्ड सेंटर से 15 से 20 किलोमीटर दूर है जो विधार्थियो को वहा पहुचने के लिए किराया भाड़ा खर्च करना पड़ेगा, अधिकतर अभिभावक किसान होने के कारण आर्थिक भार बढ़ेगा!
    . अधिकतर अभिभावक  अपनी बच्चियों को दूसरे गांव में अकेली नहीं भेजेंगे तो वो साथ में जाने से पीछे कृषि का काम बाधित होगा और जिनके अभिभावक बाहर धंधा कर रहे है उनकी बच्चियों को बोर्ड परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा ।
    . सूदूरवर्ती केंद्र पर विधार्थी स्वयं को असहज महसूज करेंगे ।
    . यात्रा में समय और पैसा खर्च -: विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए हर दिन लंबी यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। खासकर गरीब या दिहाड़ी मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है, क्योंकि अभिभावकों को भी बच्चों को छोड़ने के लिए अपना काम छोड़ना पड़ता है।
    . तनाव और चिंता-: अपरिचित जगह और लंबी यात्रा से विद्यार्थियों में अनावश्यक तनाव और चिंता  उत्पन्न हो सकती है। नए माहौल में ढलने में समय लग सकता है, जिससे उनके प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
    . थकान -: लंबी यात्रा के कारण विद्यार्थी परीक्षा शुरू होने से पहले ही थके हुए महसूस कर सकते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता और प्रदर्शन प्रभावित होता है।
    . परिवहन की समस्या: ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अक्सर परिवहन के सीमित साधनों के कारण परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
    . दूर सेंटर होने पर कई बार वाहन नहीं मिलने पर परीक्षार्थियो को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ सकता है, जो उनके लिए काफी असुविधाजनक होता है।
    . आपातकालीन स्थिति: यात्रा के दौरान या नए स्थान पर किसी भी आपातकालीन स्थिति (जैसे बीमारी, दुर्घटना या मौसम खराब होना) से निपटना मुश्किल हो सकता है।

    संगठन के प्रदेश मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने बताया कि शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कुछ परीक्षा केंद्र नहीं बदलने का सुझाव दिया गया है...
    1. बोर्ड परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक उसी विधालय का नही हो उनको बदला जाए और बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगने वाले विक्षक भी उसी विधालय के नहीं हो पास के विधालयो से लगाए जाएं पर विधार्थियो को खुद की स्कूल में सेंटर होने के बावजूद दूसरी दूर की स्कूल में भेजना विधार्थी और अभिभावक हित में नही होगा।

    2. आराम और परिचितता: विद्यार्थी अपने परिचित माहौल में सहज महसूस करते हैं, जिससे तनाव कम होता है और वे बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।

    3. समय की बचत: यात्रा में लगने वाला समय बच जाता है, जिसका उपयोग वे अपनी पढ़ाई या आराम करने में कर सकते हैं ।

    4. आर्थिक बचत: परिवहन पर होने वाला खर्च बच जाता है।

    5.  शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से विधार्थियो के लिए दूसरी जगह जाना चुनौतीपूर्ण कार्य होगा जबकि खुद के स्कूल में सेंटर होने से उन्हें काफी सहूलियत मिलती है ।

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