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    नव गठित ज़िलों से अपने मूल गृह जिले में आने पर वरिष्ठता विलोपित नहीं किया जाएं- विपिन प्रकाश शर्मा

    2 months ago

      राज्य में 33 से बढ़ाकर जिलों की संख्या 41 की गई है। अनेक पुराने जिलों की तहसीलें नये जिलों में समाहित हुई है।
        
    शिक्षकों को अपने मूल जिले में जाने के लिए विकल्प आमंत्रित कर वरिष्ठता विलोपित तथा नए जिले में कनिष्ठतम वरिष्ठता स्वीकार करने की बाध्यता लगाई गई है।
         *राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया  कि शिक्षक पूर्व के जिले में नियुक्त होकर कार्यरत रहे हैं। उनकी वरिष्ठता उस जिले में नियुक्ति अधिकारी द्वारा निर्धारित हुई है। पुनः उसी नियुक्ति अधिकारी के नियन्त्रण में जा रहे हैं।*
        *राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर जिलों का पुनर्गठन किया गया है।*
    उदाहरणार्थ -
         अजमेर जिले में नियुक्त शिक्षक ब्यावर में पोस्टेड रहे हैं। अजमेर जिले में वरिष्ठता बनी हुई है। नव गठित ब्यावर जिले से अपने अजमेर गृह जिले के विकल्प पर वरिष्ठता विलोपन व कनिष्ठतम के बाद निर्धारण अव्यवहारिक है।

         राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम 2021 के नियम 36(7) के अनुसार स्थानांतरण से जिला/मण्डल बदलने पर वरिष्ठता विलोपन तथा नये जिले में कनिष्ठतम के बाद स्थापित का प्रावधान है, लेकिन सरकार द्वारा जिला पुनर्गठन के कारण शिक्षकों को अपने गृह जिले के लिए मजबूरन विकल्प करना पड़ रहा है। यह स्वेच्छा का स्थानांतरण नहीं है। इसलिए इस पर नियम 36(7) लागू नहीं होना चाहिए।

         *संगठन के प्रदेश मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने कहा कि  सरकार द्वारा नये गठित जिलों की तहसीलों से अपने गृह जिले में जाने का विकल्प देने वाले शिक्षकों की वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति से पूर्व जिले के अनुसार यथावत रखवाया जाना समीचीन रहेगा।*
    ध्यातव्य - नवगठित जिले में रहने पर वहां वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से बनेगी ना कि जिला बनने की तिथि से आदेशों में यह स्पष्ट नहीं होने के कारण शिक्षकों में अनेक भ्रांतियां तथा भय का वातावरण स्थापित हो रहा है। स्पष्टीकरण आदेश जारी करवाने की आवश्यकता है

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