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    तानसेन समारोह : विदुषी डॉ मधु भट्ट तैलंग के ध्रुवपद की अनुपम प्रस्तुति

    1 month ago

    ग्वालियर में आयोजित भारत के सबसे प्रतिष्ठित तानसेन समारोह में ध्रुवपदाचार्य पद्मश्री पं .लक्ष्मण भट्ट तैलंग की शिष्या विदुषी डॉ.मधु भट्ट तैलंग चौथी बार भाग ले रही हैं। समारोह के दूसरे दिन 16 दिसम्बर को मधु ने गुरू, गणपति वंदना, सरस्वती मन्त्रोच्चारणों से शुरू किया | तत्पश्चात् वैदिक संगीत, भरत,शारंगदेव , जयदेव, हवेली संगीत के संत संगीतज्ञ,तानसेन के गुरू स्वामी हरिदास एवं तानसेन, बैजू बावरा से लेकर ध्रुवपद पर आधारित अन्य कवियों मीरां, कबीर,आदि से लेकर आधुनिक रचनाकार बापू, अटल बिहारी वाजपेयी, रविन्द्र नाथ टैगोर, जयशंकर प्रसाद इक़बाल की राष्ट्रप्रेम, रचित रचनाओं को ध्रुवपद शैली में प्रस्तुत किया ! ध्रुवपद के प्रभाव से बनी कुछ अन्य शैलियों ख़्याल, चतुरंग त्रिवत्, भैरवी सुर तानसेन रचित राग मल्हार के 21 प्रकारों की रागमाला को विशेष रूप में प्रस्तुत कर अपने गुरू पिता एवं स्वयं रचित अनेक नावाचारों और नवीन प्रयोगों को रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया ! अंत में ध्रुवपद के छंद में राष्ट्र गीत वन्दे मातरम से किया | सारी प्रस्तुति परम्परा, आधुनिकता और समसामयिक सन्दर्भों पर आधारित थी। पखावज पर ग्वालियर के पण्डित जयवन्त गायकवाड़ ने संगत की। अंत में उस्ताद अल्लाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकेडमी, भोपाल एवं मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय द्वारा डॉ मधु भट्ट को सम्मानित किया गया |

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