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    देश में पहली बार घड़ियाल संरक्षण की अनूठी पहल

    2 months ago

    वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने घड़ियाल के 10 बच्चों को चम्बल नदी में छोड़ा —चम्बल अभ्यारण्य 'घड़ियाल हॉटस्पॉट' के रूप में होगा विकसित जयपुर। प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा ने गुरुवार को सवाई माधोपुर जिले के राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य, पालीघाट में घड़ियालों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए एक अनूठी पहल की। उन्होंने 5 माह उम्र के कुल 30 में से 10 घड़ियाल हैचलिंग्स को चम्बल नदी में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। शेष को 5-6 दिन के अंतराल पर चंबल नदी में छोड़ा जाएगा। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा रियरिंग फास्ट ट्रैक-हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम के तहत घड़ियाल के इन बच्चों को अंडों से बाहर निकालने के बाद संरक्षित किया गया था।  राज्यमंत्री संजय शर्मा ने बताया कि यह घड़ियाल संरक्षण की यह अनूठी पहल मुख्यमंत्री श भजनलाल शर्मा के दिशा निर्देशानुसार शुरू की गयी है। वन विभाग ने चंबल किनारे मादा घड़ियाल के अंडे देने के स्थान से अंडे से निकले बच्चों को संरक्षण के लिए रेस्क्यू किया गया। तब इनकी लम्बाई लगभग 25 सेंटीमीटर थी। सुरक्षा की दृष्टि से उन सभी को अलग-अलग केबिन में रखकर घड़ियाल के हैचलिंग्स को नेचुरल फूड (जिंदा मछली) दी गई, जिससे वह शिकार की आदत नहीं भूलें। अब जब ये घड़ियाल के बच्चे 75 सेंटीमीटर के हो गए हैं, तब उनको प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जा रहा है। वन राज्यमंत्री ने चंबल अभयारण्य का अवलोकन कर घड़ियाल संरक्षण, कृत्रिम प्रजनन और वैज्ञानिक रियरिंग तकनीकों की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि “चम्बल नदी क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन की धुरी है। पालीघाट में जिस प्रकार वैज्ञानिक ढंग से कार्य हो रहा है, उसी तर्ज पर धौलपुर और अन्य क्षेत्रों में भी चम्बल नदी तंत्र में घड़ियाल संरक्षण को सशक्त किया जाएगा।” शर्मा ने कहा कि घड़ियाल अभयारण्य को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पालीघाट और चम्बल तट को “इको-टूरिज्म जोन” के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चम्बल क्षेत्र “घड़ियालों की धरती और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक” बनकर उभर रहा है।

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