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    “आरम्भ-2026: नई शुरुआत, नए सपने और सफलता की नई उड़ान” — रीजनल कॉलेज में इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक विद्यार्थियों का भव्य स्वागत

    जयपुर। रीजनल कॉलेज, सीतापुरा, जयपुर के इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के नवागंतुक विद्यार्थियों के स्वागत हेतु कॉलेज के ऑडिटोरियम में ओरिएंटेशन प्रोग्राम “आरम्भ-2026” का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नवागंतुक विद्यार्थियों के साथ-साथ सीनियर विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ तिलक समारोह एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। सीनियर विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक के नवागंतुक विद्यार्थियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरुण वर्मा, सेंटर हेड, सीआईआई एवं लघु उद्योग भारती, जयपुर रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उद्योग जगत, कौशल विकास, इंटर्नशिप एवं उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया। डायरेक्टर, रीजनल कॉलेज कैंपस, डॉ. अशोक सिंह शेखावत ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण, सकारात्मक सोच एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित किया। इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रमोद शर्मा एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य श्री सौरभ पाटनी ने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर इंजीनियरिंग कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. केदार नारायण बैरवा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित रहे। चेयरमैन डॉ. प्रेम सुराना ने कहा, “कॉलेज जीवन विद्यार्थियों के भविष्य की नींव तैयार करता है। विद्यार्थी शिक्षा के साथ अनुशासन, कौशल एवं सकारात्मक सोच को अपनाकर अपने लक्ष्यों की ओर निरंतर आगे बढ़ें।” वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सुराना ने कहा, “नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं और नए अवसरों का द्वार खोलती है। विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को पहचानें, निरंतर सीखते रहें और अपने ज्ञान एवं कौशल से सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करें।” कार्यक्रम में इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक के नवागंतुक तथा सीनियर विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सीनियर विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने आयोजन की सराहना करते हुए कॉलेज के सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन अमित कुमार एवं विनीता गौतम ने किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र सक्सेना ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।  

    पारंपरिक वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता मानसिक स्वास्थ्य, हृदय रोग एवं मनोदैहिक विकारों पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन

    जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर में पारंपरिक भारतीय वैदिक विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता पत्र (एमओयू) संपन्न हुआ। यह समझौता 2 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा की गरिमामयी अध्यक्षता में किया गया। इस पहल का उद्देश्य आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद, हृदय रोगों तथा विभिन्न मनोदैहिक विकारों के संदर्भ में भारतीय पारंपरिक ज्ञान-पद्धतियों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वित अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. नारायण होसमने द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। इस अवसर पर वैदिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तावित सहयोग के अंतर्गत मंत्र चिकित्सा, गो-आधारित चिकित्सा तथा काऊ कडलिंग जैसी पारंपरिक एवं वैकल्पिक पद्धतियों का आधुनिक चिकित्सीय विज्ञान और वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक परामर्श के साथ अध्ययन एवं मूल्यांकन किया जाएगा। इस त्रिपक्षीय सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में प्रारंभिक चिकित्सा, डायग्नोस्टिक्स एवं परामर्श संबंधी जांच-सुविधाओं के लिए एक स्क्रीनिंग केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही मंत्रों की ध्वनि तरंगों एवं गो-आलिंगन जैसी गतिविधियों के मानव मस्तिष्क, हृदय गति परिवर्तनशीलता (हार्ट रेट वैरिएबिलिटी), रक्तचाप तथा मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों का क्लिनिकल एवं वैज्ञानिक अध्ययन करने की योजना है। यह संपूर्ण कल्याणकारी परियोजना परम पूज्य सिद्ध गुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव के आशीर्वाद एवं उनके वैश्विक शांति अभियान (ग्लोबल पीस मिशन) की प्रेरणा से मानव कल्याण के व्यापक उद्देश्य को समर्पित बताई गई। कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को समग्र रूप से देखने की समृद्ध दृष्टि रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के मध्य संवाद एवं प्रमाण-आधारित अनुसंधान समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी, संजय शर्मा, डॉ. सुनील कुमार गर्सा, महावीर खर्रा एवं आत्रेय कुमार सहित विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. राजधर मिश्र, डॉ. शम्भु कुमार झा, डॉ. दिवाकर मिश्र, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. मधुबाला शर्मा, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, सुरेन्द्र मोहन एवं राजेश कुमार शर्मा उपस्थित थे। उपस्थित विद्वानों ने इस सहयोगात्मक पहल को भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच सेतु निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया तथा मानव कल्याण के लिए इसके संभावित योगदान पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन मंत्र प्रतिष्ठान निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह पालावत ने किया।  

    फ्रेशर्स 2026-युवा ऊर्जा का संगम, छात्राओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुत किया डांस सहित अन्य कार्यक्रम

      कनोडिया पीजी महिला महाविद्यालय,जयुपर में छात्राओं के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम फ्रेशर्स डे 2026 का आयोजन किया गया। महाविद्यालय निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, प्राचार्य, डॉ. सीमा अग्रवाल, उप प्राचार्य (छात्र गतिविधि) डॉ. मनीषा माथुर एवं प्रथम सेमेस्टर की सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली कला संकाय की खुशी जांगिड़, विज्ञान संकाय की ऋषिता अग्रवाल एवं वाणिज्य संकाय की छात्रा गरिमा मंगल ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में बारहवीं कक्षा में 90 प्रतिशत एवं इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली सभी संकायों की, प्रथम वर्ष की मेधावी छात्राओं को महाविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की गई। प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में नवागंतुक छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी और उन्होंने मेंटोरिंग ग्रुप की महत्ता बताते हुए छात्राओं को स्वयं को निरंतर निखारने और अपने व्यक्तित्व को संवारने के लिए प्रेरित किया। इस आयोजन में रंग-बिरंगे परिधानों में सजी प्रथम वर्ष की 55 छात्राओं ने विभिन्न टाइटल्स के लिए रैम्पवॉक की। मिस फ्रेशर 2026-पूर्वी वर्मा, फर्स्ट रनरअप-रिद्धि मीणा, सैकंड रनरअप-रमशा खान रहीं। इसके साथ ही मिस चार्मिंग-आलिया फातिमा, मिस फैशनिस्टा-सिद्धि सिंह, मिस आइस ऑन फायर-ख्वाहिश शर्मा, मिस रैपंजल-मीनल मौर्य तथा मिस आइकॉनिक का खिताब-माही सोनी ने जीता। कार्यक्रम में मिस फ्रेशर्स की निर्णायक महाविद्यालय की पूर्व छात्राएँ मिस राजस्थान फर्स्ट रनरअप 2026, वंशिका नूनिया और मॉडल एवं कंटेंट क्रिएटर अनुष्का गुप्ता रहीं। अतिथियों के साथ महाविद्यालय निदेशक,प्राचार्य एवं उप प्राचार्य डॉ. रंजुला जैन, डॉ. मनीषा माथुर और डॉ. रंजना अग्रवाल ने विजेता रहीं छात्राओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में गायक निशांत शर्मा एवं गिटारिस्ट शिवा ने लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर छात्राओं का मन मोह लिया। महाविद्यालय के नृत्यम क्लब की छात्राओं के विभिन्न ग्रुप्स-‘गिद्दा एंड ग्रेस‘, ‘जट्ट एंड जूलियट’ पंजाबी ग्रुप,’लोक लहर ‘राजस्थानी ग्रुप, ‘नृत्य नंदिनी’ क्लासिकल ग्रुप ,यूफोरिक्स एंड हिप्नोसिस’ वेस्टर्न डांस ग्रुप्स ने अपनी परफोर्मेंस से समां बांध दिया। मंच संचालन अभिव्यक्ति क्लब की छात्रा माही असीजा, हुदा एजाज,माया गोस्वामी,प्रिया कुमारी,एकता कुमावत,आस्था शर्मा और दरक्षा खान ने किया। कार्यक्रम समापन पर बीबीए प्रथम वर्ष की छात्रा श्रेया माथुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सभी संकायों की प्रथम वर्ष की लगभग 1500 छात्राओं ने समस्त प्राध्यापिकाओं के साथ उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का लुत्फ उठाया।  

    शिक्षक दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम का पोस्टर विमोचन

    जयपुर। शिक्षक दिवस के उपलक्ष में पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान द्वारा तैयार किया गया पोस्टर भारत देश का शिक्षक दिवस का विमोचन उपमुख्यमंत्री डाॅ.पी. सी. बैरवा ने अपने सरकारी निवास पर गुरुवार 3 सितंबर को किया। विमोचन करते समय डॉ. बैरवा ने कहा कि शिक्षक समाज को प्रेरणा और दिशा देते हैं । देश की भावी पीढ़ी तैयार करने में अहम भूमिका होती है भारत में महान शिक्षाविद और राष्ट्रपति रहे डॉक्टर राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। पुरस्कृत शिक्षक फोरम के प्रदेश संघटन सचिव महेश बाबू शर्मा ने बताया कि महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में फोरम अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर, उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार ने डॉ.बैरवा के राखी बांधी, प्रदेश महिला सचिव मधु कुल्हार ने फोरम की ओर से तिलक लगाकर राखी बांधने की रस्म पूरी की। अंत में फोरम की ओर से महासचिव ने ज्ञापन दिया। तथा बीजेपी के संकल्प पत्र में की गई घोषणा में प्रदेश के पुरस्कृत शिक्षकों को वेतन वृद्धि देने के संकल्प को संकल्प का दो वर्ष और आठ महीने गुजरने के बाद भी पूरा नहीं करने की शिकायत की। तथा चुनाव आचार संहिता के बाद अविलंब पूरा करने की मांग की।उप मुख्यमंत्री ने आचार संहिता समाप्त होने के बाद कार्यवाही करने का आश्वासन दिया । फोरम की ओर से अध्यक्ष निर्मल ग्रोवर, उपाध्यक्ष सुदर्शन कुल्हार, तथा विनोद कुमार शर्मा महासचिव रामेश्वर प्रसाद शर्मा कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा सलाहकार , के. के. चोटिया, जिला फोरम जयपुर के जिला अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश महिला सचिव मधु कुल्हार, तथा कार्यकारिणी सदस्य पवन भास्कर उपस्थित थे ।      

    शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर होगा प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड के 15वें संस्करण का भव्य आयोजन

    शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 148 शिक्षकों का होगा सम्मान सात वरिष्ठ शिक्षकों को प्रदान किया जाएगा माला माथुर मेमोरियल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन जयपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के सम्मान में प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड 2026 के 15वें संस्करण का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह समारोह थार सर्वोदय संस्थान, सिम्पली जयपुर एवं रघु सिन्हा माला माथुर चैरिटी ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगा। आयोजक सोमेंद्र हर्ष ने कहा कि " प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड का 15वां संस्करण शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी मेहनत, समर्पण और उपलब्धियों को सम्मान देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि समाज के भविष्य का निर्माण करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। वे विद्यार्थियों में ज्ञान विकसित करने के साथ-साथ उन्हें प्रेरित करते हैं और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। इस वर्ष के प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड समारोह में प्री-स्कूल, सरकारी एवं निजी विद्यालयों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की अलग-अलग श्रेणियों से कुल 141 शिक्षकों को प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड 2026 प्रदान किया जाएगा जिसमे राजस्थान के जयपुर के 68 शिक्षको के अलावा जोधपुर, अजमेर, बाड़मेर, सिरोही, पाली , भीलवाड़ा, ब्यावर, करोली, सीकर, किशनगढ़, लक्ष्मणगढ़, हनुमानगढ़, जैसलमेर और जालोर से लगभग 46 शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दिल्ली, लखनऊ, वृन्दावन, छत्तीसगढ़ और बहरोड़ से लगभग 27 शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा , यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के समर्पण, उत्कृष्ट कार्य, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान को रेखांकित करता है " आयोजक रघु सिन्हा माला माथुर चैरिटी ट्रस्ट के ट्रस्टी सुधीर माथुर ने बताया कि "इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले सात वरिष्ठ शिक्षकों को विशेष रूप से माला माथुर मेमोरियल “लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास है, जिन्होंने वर्षों तक ज्ञान, संस्कार और शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस वर्ष प्रो. बी.के. शर्मा, डॉ. दीपक सक्सेना, डॉ. रश्मि पाटनी, डॉ. जयश्री भार्गव, श्रीमती अनुराधा टंडन, डॉ. सिद्धार्थ मोथड़िया एवं श्रीमती लवलीना सोगानी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा" आयोजक थार सर्वोदय संस्थान की ट्रस्टी अंशु हर्ष ने बताया कि " प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड का उद्देश्य उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जो अपने ज्ञान, समर्पण और निरंतर प्रयासों से विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विशेष रूप से ऐसे वरिष्ठ शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा और नई पीढ़ी को ज्ञान देने के लिए समर्पित किया है" समारोह को विशेष बनाने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी जाएंगी। ये प्रस्तुतियाँ शिक्षकों के प्रति विद्यार्थियों की कृतज्ञता, सम्मान और स्नेह को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ समारोह की गरिमा को भी बढ़ाएंगी। प्रिंसिपल्स एंड टीचर्स अवॉर्ड पिछले 15 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है। 15वें संस्करण के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा जगत के समर्पित कर्मयोगियों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाएगा।    

    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रथम NSS कैंप 2026 एवं प्लास्टिक फ्री कैंपस ड्राइव का आयोजन

    जयपुर: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में NSS इकाई द्वारा प्रथम NSS कैंप 2026 एवं “प्लास्टिक फ्री कैंपस ड्राइव” का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के अवसर पर प्रो-चेयरपर्सन डॉ. अंशु सुराना ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। इसके पश्चात प्रेसिडेंट डॉ. रश्मि जैन ने विद्यार्थियों को NSS की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा समाज एवं पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत NSS कार्यक्रम अधिकारी यश यादव द्वारा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को NSS (National Service Scheme) के उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं सामाजिक सेवा में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। साथ ही विद्यार्थियों को My Bharat Portal के माध्यम से NSS एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के लिए पंजीकरण करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। कार्यक्रम के अगले चरण में डॉ. प्रेम कुमार ने प्लास्टिक प्रदूषण, प्लास्टिक के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के उपायों पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इसके बाद डॉ. मोनिका शर्मा ने भी प्लास्टिक मुक्त परिसर की आवश्यकता, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर NSS स्वयंसेविका तनिषा मीणा ने प्लास्टिक फ्री अभियान को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करने और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने में योगदान देने की अपील की। स्वच्छता अभियान का दूसरा चरण NSS कैंप के दूसरे चरण में विद्यार्थियों एवं NSS स्वयंसेवकों ने विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। स्वयंसेवकों ने परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में बिखरे हुए प्लास्टिक कचरे को एकत्र किया तथा उसे उचित तरीके से अलग कर निस्तारण के लिए भेजा। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ अभियान में भाग लेते हुए “स्वच्छ परिसर, स्वस्थ पर्यावरण” तथा “प्लास्टिक मुक्त परिसर” का संदेश दिया। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने अन्य विद्यार्थियों एवं परिसर के लोगों को भी प्लास्टिक कचरे को खुले में न फेंकने और कचरे का उचित निस्तारण करने के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में NSS कार्यक्रम अधिकारी यश यादव ने सभी NSS स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय के स्टाफ का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। यह NSS कैंप विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।  

    अमन माहेश्वरी एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में शामिल

    - इस नियुक्ति के साथ एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने बोर्ड में बदलाव पूरा किया इस बदलाव के बाद सभी चारों संस्थापकों ने बोर्ड की जिम्मेदारियां अगली पीढ़ी को सौंप दी हैं, जो अगले 100 वर्षों के लिए एलन के निर्माण के विजन को और मजबूत करता है कोटा. नेक्स्ट-जेनरेशन लीडरशिप की दिशा में बदलाव को आगे बढ़ाते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड ने अमन माहेश्वरी को बोर्ड आफ डायरेक्टर्स (निदेशक मंडल) में नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। इस नियुक्ति के साथ एलन के सभी चारों फाउंडर्स ने अगली पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह बदलाव एलन के अगले 100 वर्षों के भविष्य के लिए तैयार दीर्घकालिक विजन को दर्शाता है। अमन माहेश्वरी निदेशक मंडल में नेक्स्ट-जेनरेशन के साथी डायरेक्टर्स अविरल माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी और केशव माहेश्वरी के साथ शामिल हुए हैं। वे एलन के ग्लोबल स्टडीज डिवीजन का नेतृत्व करने के अनुभव के साथ-साथ भारत, यूएई, यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में शिक्षा एवं प्रोफेशनल अनुभव से विकसित अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण लेकर आए हैं। उनकी नियुक्ति एक सुनियोजित बदलाव के पूरा होने का प्रतीक है, जिसमें एलन के संस्थापक मूल्यों, प्रोफेशनल लीडरशिप के अनुभव और नेक्स्ट-जेनरेशन निदेशकों की ऊर्जा का समावेश है। इस बदलाव पर संस्थापक राजेश माहेश्वरी ने कहा कि अमन के बोर्ड में शामिल होने के साथ एलन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हुआ है। हमारे प्रत्येक नेक्स्ट-जेनरेशन निदेशक की अपनी विशिष्ट क्षमता है और ग्लोबल एजुकेशन वर्टिकल के निर्माण में अमन का अनुभव बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आएगा। मुझे विश्वास है कि यह सामूहिक नेतृत्व एलन के मिशन को आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाएगा। अपने बड़े बेटे अमन माहेश्वरी के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में शामिल होने का स्वागत करते हुए एलन के संस्थापक डॉ. ब्रजेश माहेश्वरी ने कहा, बड़े बेटे अमन को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हुए देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने वर्षों से एलन की ग्लोबल एजुकेशन इनिशिएटिव को मजबूती से विकसित करने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बोर्ड में अपनी नई भूमिका में भी वे उसी समर्पण, प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि के साथ कार्य करते हुए एलन को सफलता के नए आयामों तक ले जाएंगे। एक फाउंडर के रूप में हमारा सदैव प्रयास रहा है कि हम ऐसी संस्था का निर्माण करें, जो हमसे भी बड़ी हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत विरासत बने। अमन का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में यह दायित्व संभालना इसी दूरदर्शी सोच की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक कदम साबित होगा।” नियुक्ति पर अमन माहेश्वरी ने कहा, “एलन के निदेशक मंडल में शामिल होना मेरे लिए सम्मान की बात है। संस्था के साथ वर्षों से इसकी ग्लोबल एजुकेशन पहल के निर्माण एवं विस्तार में योगदान करते हुए मुझे एलन के मूल्यों को समझने के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को जानने का अवसर मिला है। मैं अपने अनुभव और दृष्टिकोण को बोर्ड में लेकर आने, अपने साथी निदेशकों और लीडरशिप टीम के साथ मिलकर एलन के मूल आधार को और मजबूत करने, इनोवेशन को गति देने, वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं, जिसने एलन को भारत के सबसे भरोसेमंद शिक्षा संस्थानों में से एक बनाया है।” निदेशक उदय शंकर ने कहा कि अमन की नियुक्ति के साथ एलन का बोर्ड अब संस्था के अगले अध्याय को दर्शाता है। एक ऐसा अध्याय, जिसमें संस्थापकों का अनुभव, प्रोफेशनल मैनेजमेंट का अनुशासन और अगली पीढ़ी की नई ऊर्जा एक साथ है। इससे ऐसी गवर्नेंस संरचना पूरी होती है, जो आने वाले दशकों तक एलन की उत्कृष्टता को बनाए रखने में सक्षम होगी।} सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि ग्लोबल स्टडीज डिवीजन का नेतृत्व करते हुए वर्षों में अमन ने जो विश्वास अर्जित किया है, उसके आधार पर उनका बोर्ड में शामिल होना एक स्वाभाविक प्रगति है। लीडरशिप टीम के रूप में हम एलन के सेंचुरी विजन की दिशा में काम करते हुए उनके निरंतर मार्गदर्शन की उम्मीद करते हैं। इस नियुक्ति के साथ एलन के पुनर्गठित निदेशक मंडल में उदय शंकर चेयरमैन के रूप में तथा अविरल माहेश्वरी, अमन माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी, केशव माहेश्वरी और प्रतीक गर्ग शामिल हैं। अमन माहेश्वरी के बारे में अमन माहेश्वरी एलन के ग्लोबल स्टडीज डिवीजन के प्रमुख हैं। जनवरी 2020 में एलन से जुड़ने के बाद से उन्होंने इंटरनेशनल अंडरग्रेजुएट एजुकेशन के लिए की गई पहल का नेतृत्व किया है। इसके तहत विद्यार्थियों को दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज में शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने में मदद की गई है, जिसमें हार्वर्ड, एमआईटी, ऑक्सफोर्ड और अन्य क्यूएस टॉप-200 यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। उनके कार्यक्षेत्र में इंटरनेशनल एडमिशन स्ट्रेटेजी, स्टूडेंट काउंसलिंग, स्टैंडड्राइज्ड टेस्ट प्रिपरेशन, प्रोफाइल बिल्डिंग और विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक मार्ग विकसित करना शामिल है। सेकंड-जेनरेशन बिजनेस लीडर के रूप में कई देशों में उनकी शिक्षा और प्रोफेशनल एक्सपीरियंस ने शिक्षा, उद्यमिता और युवा विकास के प्रति उनके वैश्विक दृष्टिकोण को आकार दिया है। अमन यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन, यूके से एमबीए हैं और उन्होंने बिट्स पिलानी, दुबई कैंपस से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की है। स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, कोटा से पूरी की है। शिक्षा और बिजनेस के अलावा क्रिकेट भी अमन की अंतरराष्ट्रीय यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में क्रोएशिया का प्रतिनिधित्व किया है। इसमें 2022 में फिनलैंड और 2024 में जर्मनी में हुए वल्र्ड कप क्वालिफाइंग टूर्नामेंट शामिल हैं। वे क्रोएशिया और पड़ोसी यूरोपीय देशों में क्रोएशियाई घरेलू क्रिकेट से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के बारे में 1988 में कोटा, राजस्थान में स्थापित एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड भारत के प्रमुख शिक्षा संस्थानों में से एक है, जो जेईई-मैन एवं एडवांस्ड, नीट-यूजी, ओलम्पियाड और अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को शिक्षित करता है। पिछले 38 वर्षों में एलन ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुभवी फैकल्टी, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा और निरंतर बेहतर परिणामों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास अर्जित किया है। आज यह संस्थान भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लासरूम प्रोग्राम्स और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स का एक मजबूत इकोसिस्टम संचालित करता है।  

    विश्व संस्कृत दिवस पर स्वस्तिवाचनम् के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डाक विभाग ने जारी किया विशेष आवरण

    नई दिल्ली विश्व संस्कृत दिवस के पावन अवसर पर स्वस्तिवाचनम् की स्थापना के 16 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग द्वारा एक विशेष आवरण (स्पेशल कवर) जारी किया गया। यह विशेष आवरण नई दिल्ली स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में आयोजित गरिमामय समारोह में जारी किया गया। इस विशिष्ट फिलाटेलिक समारोह में प्रख्यात आध्यात्मिक संतों, कुलपतियों, संस्कृत विद्वानों तथा सांस्कृतिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों ने सहभागिता की। समारोह में श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी, पीठाधीश्वर, पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी, कर्नाटक, प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन, प्रो. आर. जी. मुरली कृष्ण, कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, हरीश चंद्र जोशी, न्यासी एवं अध्यक्ष, स्वस्तिवाचनम्; डॉ. शुभश्री पाणिग्रही, संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं प्रोग्रामिंग), संसद टीवी; डॉ. आर. विट्टोबाचार, प्राचार्य, वेदव्यास गुरुकुलम् एवं निदेशक, वैदिक-वेदान्तिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान,डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अनेक विशिष्ट संस्कृत विद्वान उपस्थित रहे। नई दिल्ली के संसद मार्ग प्रधान डाकघर के वरिष्ठ पोस्टमास्टर इन्द्रेश कुमार वर्मा ने औपचारिक रूप से इस विशेष आवरण एवं कैंसिलेशन का विमोचन किया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने समारोह में सहभागिता करते हुए इसे सांस्कृतिक, अकादमिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामय बनाया। स्वस्तिवाचनम् के न्यासी एवं अध्यक्ष हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि यह विशेष आवरण डाक टिकट संग्रहण कला (फिलाटेली) की भाषा के माध्यम से भारत के प्राचीन ज्ञान और उसकी जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रतीकात्मक रूप से एक सूत्र में पिरोता है। विशेष आवरण में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थ चतुष्टय के साथ जीवात्मा के भावपूर्ण प्रतीक का समावेश किया गया है, जो सम्पूर्ण मानवता को एक कालजयी संदेश देता है कि वास्तविक प्रगति व्यक्ति, समाज और अंतःचेतना के समन्वित एवं संतुलित विकास में निहित है। इस विशेष आवरण पर प्रेरणादायी टैगलाइन— “Sixteen Years – A Glorious Journey of Values, Knowledge and the Arts” सोलह वर्ष—मूल्यों, ज्ञान और कलाओं की गौरवशाली यात्रा-अंकित है। यह स्मारक विशेष आवरण स्वस्तिवाचनम् की सोलह वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव है। स्वस्तिवाचनम् एक ऐसी संस्था है, जो संस्कृत पत्रकारिता, योग, आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, इंडोलॉजी तथा व्यापक भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित है। जोशी ने कहा कि वर्षों से स्वस्तिवाचनम् भारत की कालजयी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत और समकालीन समाज के मध्य एक सार्थक सेतु स्थापित करने का सतत प्रयास कर रहा है। वर्ष 2026 का विशेष महत्व इसलिए भी है कि यह स्वस्तिवाचनम् के संस्थापक, प्रख्यात संस्कृत विद्वान, दूरदर्शी चिंतक एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती का वर्ष है। आचार्य दिनेश चंद्र जोशी का जन्म 11 अप्रैल 1926 को उत्तराखंड में हुआ था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन संस्कृत, भारतीय दर्शन, पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान तथा भारत की सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। हरीश चंद्र जोशी ने कहा कि आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती के अवसर पर जारी यह विशेष आवरण उनके विचारों, मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनके आजीवन समर्पण को एक विनम्र श्रद्धांजलि है। यह अवसर न केवल स्वस्तिवाचनम् की 16 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है।  

    रावत पब्लिक स्कूल प्रताप नगर के विद्यार्थियों ने इंटर-स्टेट डांस प्रतियोगिता में लहराया परचम

    रावत पब्लिक स्कूल, प्रताप नगर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपनी अद्भुत नृत्य प्रतिभा, सधे हुए कदमों, प्रभावशाली भाव-भंगिमाओं और शानदार मंचीय प्रस्तुति के दम पर नृत्य शैली द्वारा आयोजित इंटर-स्टेट डांस प्रतियोगिता में विद्यालय का गौरव बढ़ाते हुए उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। विद्यार्थियों ने विभिन्न नृत्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता की वेस्टर्न सीनियर एवं वेस्टर्न जूनियर कैटेगरी में विनर ट्रॉफी अपने नाम की। विद्यालय के विद्यार्थियों ने केवल वेस्टर्न डांस में ही नहीं, बल्कि फोक डांस की सीनियर एवं जूनियर दोनों कैटेगरी में फर्स्ट रनर-अप ट्रॉफी हासिल कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया। विद्यार्थियों की ऊर्जावान प्रस्तुति, तालमेल, भावाभिव्यक्ति, कोरियोग्राफी और मंच पर आत्मविश्वास ने निर्णायकों एवं दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। प्रतियोगिता की सीनियर सोलो डांस कैटेगरी में रावत पब्लिक स्कूल की प्रतिभाशाली छात्रा रुद्राक्षी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी उत्कृष्ट नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं जूनियर सोलो डांस कैटेगरी में प्रिया स्वर्णकार ने फर्स्ट रनर-अप तथा प्रीशा ने सेकंड रनर-अप का स्थान प्राप्त किया। इन उपलब्धियों ने विद्यालय के खाते में कई महत्वपूर्ण सम्मान जोड़ते हुए विद्यार्थियों की मेहनत और निरंतर अभ्यास को सार्थक सिद्ध किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में लगभग 30 विद्यालयों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसके बीच रावत पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों का विभिन्न श्रेणियों में विजेता एवं उपविजेता बनना उनकी उत्कृष्ट तैयारी और उच्च स्तरीय प्रदर्शन को दर्शाता है। इसी क्रम में आयोजित बस्कर्स की डांस प्रतियोगिता में भी रावत पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए वेस्टर्न एवं फोक डांस की सीनियर तथा जूनियर दोनों कैटेगरी में अव्वल स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थियों की सशक्त मंचीय प्रस्तुति ने प्रतियोगिता में विद्यालय की विशिष्ट पहचान को और मजबूत किया। विद्यालय के विद्यार्थियों का नृत्य के क्षेत्र में यह शानदार प्रदर्शन कोई आकस्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन, समर्पण और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का परिणाम है। पिछले छह वर्षों से रावत पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी विभिन्न नृत्य प्रतियोगिताओं में अपनी रॉकिंग परफॉर्मेंस के माध्यम से लगातार विजय प्राप्त करते आ रहे हैं। विद्यार्थियों की यह निरंतर सफलता विद्यालय में कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहन और मंचीय प्रतिभाओं को निखारने की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है। रावत एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन बी एस रावत एवम निदेशक नरेंद्र सिंह रावत ने सभी विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनकी शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के पीछे उनके अथक परिश्रम एवं निरंतर अभ्यास की सराहना की। साथ ही, उन्होंने कोरियोग्राफर श्री श्याम आर्य ,श्री सौरभ और कृति शर्मा को विद्यार्थियों को प्रभावी मार्गदर्शन, उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं मंचीय प्रस्तुति के लिए तैयार करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान हेतु विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित न रखते हुए कला, संस्कृति, खेल और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को पहचानने एवं उसे निखारने के लिए निरंतर अवसर प्रदान करता है। प्राचार्या मैत्रेयी शुक्ला ने कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी उपलब्धियां न केवल विद्यालय के लिए गौरव का विषय हैं, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी अपने हुनर को पहचानने, मेहनत करने और उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।  

    नेत्रदान जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना की चारों इकाइयों एवं रेड रिबन क्लब के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 1 सितंबर 2026 को नेत्रदान जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेविकाओं को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नेत्रदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों एवं संकोच को दूर कर अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करना था। सत्र के दौरान ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक वीडियो के माध्यम से स्वयंसेविकाओं को नेत्रदान के महत्व, इसकी प्रक्रिया तथा इससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों के बारे में जानकारी दी गई। वीडियो के माध्यम से यह संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया कि “नेत्रदान महादान” है और मृत्यु के पश्चात नेत्रदान के माध्यम से किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में प्रकाश लाया जा सकता है। स्वयंसेविकाओं को यह भी समझाया गया कि नेत्रदान केवल एक व्यक्ति की दृष्टि लौटाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में मानवता, संवेदनशीलता और परोपकार की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य है। इस सत्र का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी एवं आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान की सदस्य डॉ. आंचल पुरी द्वारा किया गया। उन्होंने स्वयंसेविकाओं को नेत्रदान के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें इस सामाजिक एवं मानवीय कार्य के लिए स्वयं आगे आने तथा अपने परिवार एवं समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का संदेश दिया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने इस प्रकार के जागरूकता सत्रों की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक एवं मानवीय कार्य है। प्रत्येक व्यक्ति को नेत्रदान के महत्व को समझते हुए इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से समाज में नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है और अनेक दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है। इस अभियान में कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. विजय लक्ष्मी गुप्ता, डाॅ. मंजरी भारद्वाज, डाॅ. दीप्ति चौहान, डाॅ. हर्षा शर्मा एवं चारुल शर्मा की सक्रिय भूमिका रही ।  

    CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप का आग्रह, अनुच्छेद 142 के तहत मामले बंद करने की मांग

    Yugcharan News / 01 September 2026 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज आपराधिक मुकदमों को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन में शामिल विभिन्न लोगों के खिलाफ दर्ज FIR और संबंधित आपराधिक मामलों को बंद करने का आग्रह किया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण रूप से होने वाली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यह मामला प्रदर्शन, आपराधिक मामलों और संवैधानिक न्यायिक शक्तियों से जुड़ा होने के कारण कानूनी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उन आपराधिक मामलों को समाप्त करने की मांग की गई है, जो जंतर-मंतर पर हुए CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों में भाग लेने वाले अलग-अलग लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लेने का आग्रह किया है। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या निर्देश जारी करने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, इस शक्ति का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और किस सीमा तक किया जाएगा, यह संबंधित मामले के तथ्यों और अदालत के सामने रखी गई दलीलों पर निर्भर करता है। इस मामले में केंद्र द्वारा सीधे सुप्रीम कोर्ट से FIR समाप्त करने का अनुरोध किया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक मामलों को समाप्त करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ता है। जंतर-मंतर पर हुआ था छात्र प्रदर्शन यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन से संबंधित है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन का नेतृत्व Cockroach Janta Party यानी CJP से जुड़े लोगों द्वारा किया गया था। प्रदर्शन के बाद कुछ प्रतिभागियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, उनकी संख्या और प्रत्येक मामले में लगाए गए आरोपों का पूरा विवरण उपलब्ध सामग्री में नहीं दिया गया है। ऐसे में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत भूमिका या किसी विशेष आरोप के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। केंद्र सरकार अब इन मामलों को समाप्त करने के लिए शीर्ष अदालत के विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किए जाने की मांग कर रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल इन मामलों को आगे चलाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें समाप्त करने के विकल्प पर विचार कर रही है। अनुच्छेद 142 क्यों महत्वपूर्ण है? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेष शक्ति प्रदान करता है। इसके तहत शीर्ष अदालत किसी लंबित मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकती है। यह प्रावधान सामान्य न्यायिक प्रक्रिया से अलग एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था है। हालांकि, इसका इस्तेमाल प्रत्येक मामले में स्वतः नहीं किया जाता। अदालत मामले की परिस्थितियों, पक्षकारों की दलीलों और न्याय के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह तय करती है कि इस शक्ति का प्रयोग आवश्यक है या नहीं। इस मामले में केंद्र सरकार का आग्रह इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस अनुरोध पर किस दृष्टिकोण को अपनाता है और क्या वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने को उचित मानता है। सुप्रीम कोर्ट में होगी विस्तृत सुनवाई उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह बताया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में FIR और आपराधिक मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया गया है और अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल को किस आधार पर उचित माना जा रहा है। दूसरी ओर, अदालत इस बात की भी समीक्षा कर सकती है कि मामलों को समाप्त करने का अनुरोध कानूनी मानकों और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं। इस तरह की सुनवाई में अदालत केवल सरकार के अनुरोध को स्वीकार या अस्वीकार करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मामले से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर भी विचार कर सकती है। प्रदर्शन और आपराधिक मामलों के बीच कानूनी संतुलन देश में विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी आवश्यक होता है। किसी प्रदर्शन में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका समान नहीं होती। इसलिए किसी भी आपराधिक मामले में व्यक्तिगत भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किया जाना महत्वपूर्ण होता है। इसी संदर्भ में केंद्र की ओर से सभी संबंधित FIR को समाप्त करने का अनुरोध व्यापक कानूनी सवाल खड़ा करता है। अदालत को यह देखना होगा कि क्या मामले की परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें सभी संबंधित मामलों को एक साथ समाप्त करना न्यायहित में होगा या प्रत्येक मामले की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। सरकार के अनुरोध से जुड़ा व्यापक महत्व केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत हस्तक्षेप का अनुरोध इस मामले को सामान्य FIR से जुड़े विवाद से आगे ले जाता है। अब इसमें संवैधानिक न्यायिक शक्ति का प्रश्न भी शामिल हो गया है। यदि सुप्रीम कोर्ट केंद्र के अनुरोध को स्वीकार करता है, तो संबंधित मामलों को समाप्त करने का रास्ता साफ हो सकता है। वहीं, यदि अदालत इस अनुरोध को स्वीकार नहीं करती या अलग-अलग मामलों की स्वतंत्र समीक्षा की आवश्यकता मानती है, तो आपराधिक मामलों की प्रक्रिया अपने निर्धारित कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगा। न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर मामले की अगली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 की अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति के इस्तेमाल पर विचार करना है। अदालत के सामने यह प्रश्न रहेगा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों को समाप्त करने के लिए इस असाधारण संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया जाना चाहिए या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को बंद करने की मांग की है और इस उद्देश्य के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत विशेष हस्तक्षेप का आग्रह किया है। मामले में अदालत का विस्तृत आदेश आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित FIR और आपराधिक मामलों का भविष्य क्या होगा। तब तक इस मामले में किसी भी पक्ष की अंतिम कानूनी स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। कानूनी विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल को लेकर क्या रुख अपनाता है और प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामलों को समाप्त करने के लिए किन संवैधानिक तथा कानूनी मानकों को आधार बनाया जाता है। अदालत की सुनवाई इस मामले में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

    SCO Summit: पीएम मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश, बोले- आतंक के पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी

      Yugcharan News / 01 September 2026 नई दिल्ली। किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध और संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया। SCO सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आपसी सहयोग के मुद्दों पर खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आतंकवाद पर एकजुट होने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि सभी देशों को आतंकवाद के खिलाफ एक समान दृष्टिकोण अपनाते हुए उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को केवल हिंसक गतिविधियों तक सीमित न मानते हुए उसके पीछे मौजूद व्यापक तंत्र पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई। इसमें आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग, लोगों की भर्ती, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां और कथित सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं। पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे मंच पर आया, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख देशों के नेता मौजूद थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी के कारण भारत की आतंकवाद संबंधी नीति पर दिए गए इस बयान को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व मिला। युद्ध नहीं, बातचीत और कूटनीति पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक संघर्षों को लेकर भारत की पारंपरिक नीति को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान में किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता और संघर्षों का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। मध्य पूर्व में जारी युद्ध और यूक्रेन संघर्ष के बीच यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इन संघर्षों का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर प्रधानमंत्री का यह रुख क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। पाकिस्तान की मौजूदगी में आतंकवाद का मुद्दा SCO सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी के बीच पीएम मोदी का आतंकवाद पर दिया गया बयान खास चर्चा में रहा। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को कथित समर्थन के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के बयान को भारत की उस व्यापक नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें आतंकवाद के लिए वित्तीय सहायता, भर्ती, कट्टरपंथ और कथित सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई की मांग शामिल है। भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद लंबे समय से एक प्रमुख विवाद का विषय रहा है। जम्मू-कश्मीर में पिछले वर्ष पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद कथित आतंकवादी ढांचे तथा कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी थी। भारत का कहना रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल किसी एक संगठन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस पूरे तंत्र को निशाना बनाया जाना चाहिए जो आतंकवादी गतिविधियों को आर्थिक, वैचारिक या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराता है। CPEC और संप्रभुता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण SCO सम्मेलन में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग होना चाहिए, लेकिन ऐसी परियोजनाओं को दूसरे देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। इस संदर्भ में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह परियोजना चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाली लगभग 3,000 किलोमीटर लंबी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की श्रृंखला है। भारत लंबे समय से CPEC का विरोध करता रहा है, क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से गुजरने वाली परियोजनाएं उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े सवाल खड़े करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संप्रभुता का सम्मान करते हुए बुनियादी ढांचा सहयोग की बात करना इसी व्यापक भारतीय नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। SCO का बढ़ता महत्व शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद ईरान वर्ष 2023 में और बेलारूस वर्ष 2024 में संगठन में शामिल हुए। आज SCO एशिया और उससे जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, परिवहन, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे मुद्दों पर चर्चा करने वाले प्रमुख बहुपक्षीय संगठनों में शामिल है। इस संगठन की खासियत यह भी है कि इसमें ऐसे देश एक मंच पर आते हैं जिनके बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद तथा सुरक्षा संबंधी मतभेद और रूस से जुड़े वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दे SCO के भीतर बहुपक्षीय कूटनीति को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इसके बावजूद संगठन के मंच पर बातचीत और सहयोग जारी रखना क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। SCO-Plus प्रारूप में कई देशों की भागीदारी इस बार SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन विस्तारित SCO-Plus प्रारूप में किया जा रहा है। इस प्रारूप में संगठन से जुड़े देशों के अलावा कई अन्य देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख, लाओस के प्रधानमंत्री थोंगलून सिसौलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंगबे सहित कई नेताओं की भागीदारी बताई गई है। इस व्यापक भागीदारी से SCO का मंच केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति की जरूरत प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता आवश्यक है। भारत लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों पर रोक, आतंकवादी संगठनों की भर्ती व्यवस्था को कमजोर करना, कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को रोकना और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करना जो आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने या अन्य सहायता उपलब्ध कराते हैं—ये सभी पहलू किसी भी व्यापक आतंकवाद-रोधी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। भारत का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना चाहता है, तो देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत करना होगा। साथ ही आतंकवाद से संबंधित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग पर भी निगरानी बढ़ानी होगी। वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत का संतुलित संदेश SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य को भारत की संतुलित विदेश नीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। एक ओर भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता है, वहीं दूसरी ओर वह अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक बातचीत पर जोर देता है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों के बीच भारत के लिए क्षेत्रीय स्थिरता महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी निर्भर है। ऐसे में किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत लगातार शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। SCO मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखता है। आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, देशों की संप्रभुता का सम्मान और संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत—इन तीनों मुद्दों को भारत ने अपनी प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। कुल मिलाकर, किर्गिस्तान में हुए SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की उसकी प्रतिबद्धता को एक साथ सामने लाता है। चीन और पाकिस्तान समेत प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी में दिया गया यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य के बहुपक्षीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि SCO के सदस्य और सहभागी देश आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। साथ ही, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मतभेदों के बीच आर्थिक एवं बुनियादी ढांचा सहयोग को किस प्रकार संतुलित किया जाता है, यह भी संगठन की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।