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    विद्यालय परिसर में माध्यमिक कक्षाओं का वार्षिकोत्सव 'दिव्यता से नियति तक' धूमधाम से संपन्न

    जयपुर. आज विद्यालय परिसर में माध्यमिक कक्षाओं का वार्षिक उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। "दिव्यता से नियति तक" थीम पर आधारित इस विशेष कार्यक्रम में पौराणिक कथाओं, संगीत, नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियों का अद्भुत और अप्रतिम संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। इसमें लगभग 722 विद्यार्थियों को शिक्षा, खेलकूद, नेतृत्व क्षमता एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (Co-curricular activities) में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसके पश्चात भव्य 'त्रिदेवी' मंचन किया गया। इस प्रस्तुति ने समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का सुंदर संदेश दिया। मंच प्रस्तुति में महाभारत के महान पात्रों—एकलव्य, अभिमन्यु और अर्जुन के प्रेरणादायक जीवन प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया, जो साहस, समर्पण और दृढ़ता की भावना से ओत-प्रोत थे। इसी श्रृंखला में पश्चात्य संगीत एवं नृत्य खंड के अंतर्गत "गुड मॉर्निंग", "नाइसेस्ट किड्स इन टाउन", "वेल्मा एंड इंट्रो", "रन एंड टेल", और "दैट यू कांट स्टॉप द बीट" जैसी ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके अलावा 'द ग्रेटेस्ट शोमैन' की प्रस्तुति में "मिलियन ड्रीम्स", "दिस इज मी" एवं "द ग्रेटेस्ट शो" को शामिल किया गया। इनके माध्यम से विद्यार्थियों ने सभी को अपनी विशिष्टता को पहचानने और निडरता से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। शानदार समापन कार्यक्रम के अंत में आयोजित भव्य फिनाले (Grand Finale) में विद्यार्थियों की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिभा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मानवीय मूल्यों, रचनात्मकता, कलात्मकता और टीम भावना से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम ने सभी के दिलों पर अविस्मरणीय और मधुर क्षणों की छाप छोड़ी।  

    प्रशिक्षणार्थियों ने सीखें लोकवाद्यों के हुनर

    सप्त दिवसीय लोकवाद्य कार्यशाला संपन्न कला साहित्य संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग जयपुर और राजस्थान शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ शाहपुरा बाग के संयुक्त तत्वावधान में लोकवाद्यों के संरक्षण हेतु चल रही सप्त दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हुआ । इस अवसर पर बृजकिशोर शर्मा व डॉ. राजकुमार जोशी ने उद्बोधन में कहा कि संगीत का जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है ।लोकवाद्यो के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों में सृजनात्मकता, सौंदर्यबोध एवं सांस्कृतिक मूल्यों का विकास किया जा सकता है।लोक वाद्य विशेषज्ञ आर डी गौड़ तथा वीरेंद्र जैन ने विद्यापीठ के प्रशिक्षणार्थियों के साथ अलगोजा, बांसुरी, मोरचंग, ढोलक द्वारा महारा छेल भंवर सा अलगोजा जैसे लोक गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी । लोकवाद्य कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्राचार्य डॉ. मनीषा शर्मा ने कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संगीत आराधना और औषधि दोनों का काम करता है।लोक संगीत और लोक वाद्ययंत्रों से जुड़ी कार्यशालाएँ संस्कृति और संगीत प्रेमियों के लिए पारंपरिक वाद्ययंत्रों को सीखने, समझने और संरक्षित करने का बेहतरीन माध्यम हैं कार्यक्रम समन्वयक अरुणा शर्मा ने उपस्थित पदाधिकारियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम संचालन डॉ. कविता भारद्वाज ने किया  

    सीनियर महिला टी-20 ट्रॉफी के लिए राजस्थान टीम चंडीगढ़ रवाना

    राजस्थान का पहला मुकाबला 26 को हरियाणा से जयपुर। बीसीसीआई की सीनियर महिला टी-20 लीग में हिस्सा लेने के लिए राजस्थान की महिला टीम सुमन मीणा की कप्तानी में आज चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गई। टूर्नामेंट में राजस्थान टीम अपने अभियान की शुरुआत 26 अक्टूबर को पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के न्यू चंडीगढ़ ग्राउंड पर हरियाणा के खिलाफ मुकाबले से करेगी। इसके बाद राजस्थान टीम 27 अक्टूबर को सौराष्ट्र, 29 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश, 31 अक्टूबर को मध्य प्रदेश, 2 नवम्बर को बड़ौदा, 4 नवम्बर को आंध्र प्रदेश और 6 नवम्बर को ओडिशा के खिलाफ अपने लीग मुकाबले खेलेगी। सभी मैच न्यू चंडीगढ़ में खेले जाएंगे। राजस्थान टीम : सीजे भाटी (विकेट कीपर), डिम्पल कंवर, हैप्पी कुमारी, ज्योति चौधरी, मेघा सैनी, रिंकू, संगीता कुमावत, शानु सेन, श्रेया जोशी, सिद्धि शर्मा, सोनल कलाल, सुमन मीणा (कप्तान), सुमित्रा जाट, तनिका शर्मा, तनुजा वैष्णव।  

    सौ फीसदी फिट होकर ही मैदान पर लौटना चाहते हैं खलील

    आईपीएल में लगी चोट के कारण 5 माह से है क्रिकेट से दूर ट्रेनर विनय के साथ एसएमएस स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए आए  जयपुर। राजस्थान के तेज गेंदबाज खलील अहमद को जब आरसीए एकेडमी के नेट्स पर गेंदबाजी करते देखा तो बड़ा सुखद लगा। उम्मीद जगी है कि प्रदेश के टोंक जिले का ये स्टार बॉलर जल्दी ही एक्शन में नजर आएगा। लेकिन खलील बोले, चाहता तो मैं भी यही हूं पर सौ फीसदी फिट होकर ही ग्राउंड पर आऊंगा ताकि अपना बेस्ट दे सकूं। खलील चोट के कारण पिछले करीब 5 महीने से मैदान से दूर हैं। खलील अभी गेंदबाजी में अपनी लय और रफ्तार हासिल करने के साथ ही फिटनेस पर भी काम कर रहे हैं। अभ्यास के बाद बातचीत में खलील ने कहा कि किसी भी क्रिकेटर को मैदान से दूर रहना अच्छा नहीं लगता। वे भी जल्द से जल्द फिट होकर मैदान पर लौटना चाहते हैं। खलील ने कहा, मैं चाहता हूं कि जल्द से जल्द 100 प्रतिशत फिट हो जाऊं और राजस्थान, आईपीएल या भारतीय टीम के लिए अपना बेस्ट दे सकूं। इसके लिए पूरी मेहनत कर रहा हूं। धीरे-धीरे गेंदबाजी की ताकत भी बढ़ा रहा हूं। हालांकि, पूरी तरह फिट होने में कितना समय लगेगा, यह अभी नहीं बता सकता। राजस्थान की गेंदबाजी पर पड़ा असर खलील के फिट नहीं होने से राजस्थान की तेज गेंदबाजी कमजोर हुई है। अनुभवी तेज गेंदबाज अनिकेत चौधरी भी चोट के कारण टीम से बाहर थे, लेकिन अब फिट होकर रणजी टीम में लौट आए हैं। दीपक चाहर के रेड बॉल क्रिकेट खेलने को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। वहीं, अशोक शर्मा राजस्थान छोड़ चुके हैं। तेज गेंदबाजों की कमी का असर रणजी ट्रॉफी के शुरुआती दो मैचों में भी दिखा। राजस्थान की टीम तमिलनाडु और रेलवे के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज नहीं कर सकी। आईपीएल मैच में लगी थी चोट खलील अहमद को 14 अप्रैल 2026 को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ आईपीएल मैच के दौरान चोट लगी थी। अपना आखिरी ओवर डालते समय उनके पैर में खिंचाव आ गया था। जांच में दाहिनी जांघ की मांसपेशी के टेंडन में चोट और आंशिक रूप से फटने की पुष्टि हुई थी। चोट को ग्रेड-2 का बताया गया था। उस समय डॉक्टरों ने ठीक होने में 12 सप्ताह से ज्यादा लगने की संभावना जताई थी। अप्रैल के आखिर में खलील की सर्जरी भी हुई थी। खलील 5 महीने से एनसीए बैंगलोर में रिहैब में हैं और अपने फिजियो और ट्रेनर की ओर से हर दिन जो टास्क दिया जाता है उसे फालो कर रहे हैं। खलील धीरे-धीरे गेंदबाजी का अभ्यास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य पूरी तरह फिट होकर जल्द मैदान पर वापसी करना है। जयपुर आने से पहले उन्होंने बैंगलोर और चेन्नई में भी प्रैक्टिस की।  

    एसएमएस स्टेडियम में बनेगा आॅल ग्लास स्क्वैश कोर्ट

    सब जूनियर और जूनियर नेशनल स्क्वैश के उद्घाटन में खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह की घोषणा जयपुर। सवाई मानसिंह स्टेडियम में अब जल्दी ही आॅल ग्लास कोर्ट लगाया जाएगा। इसके बाद यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हो सकेगा। राजस्थान के युवा मामले और खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह ने शुक्रवार को यहां एसएमएस स्टेडियम कोर्ट्स पर सब जूनियर और जूनियर नेशनल स्क्वैश चैंपियनशिप के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। कर्नल राज्यवर्धन ने कहा कि जब वे केन्द्र में खेलमंत्री थे तब आॅल ग्लास कोर्ट की घोषणा की और इसके लिए बजट भी आवंटित किया। लेकिन अब मैं फिर घोषणा कर रहा हूं कि जल्दी ही ग्लास कोर्ट की कमी दूर कर दी जाएगी। खेलमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की योजना इस तरह तैयार की जानी चाहिए कि उसका स्तर और परिस्थितियां वास्तविक मुकाबले के जितना संभव हो उतना करीब हों। अभ्यास के दौरान मैच जैसी परिस्थितियां तैयार करना जरूरी है, ताकि खिलाड़ी प्रतियोगिता के दबाव को समझ सकें और उसके अनुसार खुद को ढाल सकें। उन्होंने कहा कि एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पीछे पूरा ईको सिस्टम काम करता है। खिलाड़ियों को केवल तकनीकी रूप से मजबूत बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें दबाव में सही निर्णय लेने, एकाग्रता बनाए रखने और बड़े मुकाबलों की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करना होगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसा खिलाड़ी तैयार करना होना चाहिए, जो मैच के दिन अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन कर सके। उद्घाटन समारोह में राजस्थान स्क्वैश रैकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र मेहता, सचिव धीरज सिंह, जयपुर क्लब के अध्यक्ष अजीत सक्सेना, सचिव हिमांशु सहगल भी मौजूद थे। आयोजन सचिव सुरभि मिश्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।  

    ऑनलाइन ठगी से ट्रैफिक तक, आम जनता की समस्याओं के तकनीकी समाधान खोज रहे स्टूडेंट्स

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय जेयू टेकफेस्ट 2026 का आगाज़; 3,000 से अधिक प्रतिभागी, 25 से ज्यादा प्रतियोगिताएँ और 8 लाख रुपये तक के पुरस्कार जयपुर। तकनीक को केवल सीखने तक सीमित न रखते हुए वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय ‘जेयू टेकफेस्ट 2026’ का शुभारंभ हुआ। ‘बिल्ड, क्रिएट, इनोवेट’ थीम पर आयोजित इस टेकफेस्ट में देशभर से 3,000 से अधिक विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, ई-स्पोर्ट्स और तकनीक से जुड़ी 25 से अधिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं के लिए कुल 8 लाख रुपये तक के पुरस्कार रखे गए हैं। इस बार 30 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागी दूसरे राज्यों से आए हैं। 500 पंजीकरण से 3,000 से अधिक प्रतिभागियों तक का सफर टेकफेस्ट के चौथे संस्करण के उद्घाटन अवसर पर डिजिटल स्ट्रेटेजीस एंड स्टूडेंट अफेयर्स के निदेशक धीमंत अग्रवाल ने अतिथियों, प्रतिभागियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 पंजीकरण और कुछ प्रतियोगिताओं से शुरू हुआ यह आयोजन आज 25 से अधिक गतिविधियों और हजारों प्रतिभागियों तक पहुँच चुका है। उन्होंने कहा, “टेकफेस्ट केवल प्रतियोगिताओं का मंच नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रयोगशाला है, जहाँ विद्यार्थी कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर वास्तविक समस्याओं को समझते हैं और उनके समाधान तैयार करते हैं। इस बार हैकाथॉन में ऑनलाइन ठगी, ट्रैफिक प्रबंधन और मेडिकल रिपोर्ट को सरलता से समझने जैसी रोजमर्रा की समस्याओं को शामिल किया गया है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों के विचार ऐसे व्यावहारिक समाधान बनें, जिनका उपयोग समाज और उद्योग जगत में किया जा सके। 500 से बढ़कर 3,000 से अधिक प्रतिभागियों तक पहुँचना युवाओं की तकनीक और नवाचार में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।” उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में स्टूडेंट काउंसिल, स्वयंसेवकों और पूरी आयोजन टीम के योगदान की सराहना की। हैकाथॉन में सात ट्रैक, फोकस वास्तविक समस्याओं पर जेयू टेकफेस्ट 2026 का प्रमुख आकर्षण हैकाथॉन है, जिसमें विद्यार्थी निर्धारित समय में तकनीकी समाधान विकसित कर उनका कार्यशील मॉडल यानी प्रोटोटाइप तैयार कर रहे हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, स्मार्ट सिटीज एवं आईओटी, साइबर सिक्योरिटी एवं डिजिटल ट्रस्ट, हेल्थटेक एवं एक्सेसिबिलिटी, फिनटेक एवं डिजिटल कॉमर्स, सस्टेनेबिलिटी एवं क्लाइमेट टेक तथा एडटेक एवं फ्यूचर ऑफ वर्क सहित सात प्रमुख ट्रैक निर्धारित किए गए हैं। इनमें तीन प्रमुख चुनौतियाँ सीधे आम लोगों की समस्याओं से जुड़ी हैं। ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए ‘स्टॉप द स्कैम बिफोर द क्लिक’ फर्जी लिंक, नकली ईमेल और फिशिंग मैसेज के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए विद्यार्थियों को ऐसा टूल विकसित करना है, जो किसी लिंक, संदेश, ईमेल या क्यूआर कोड में छिपे संभावित जोखिमों की पहचान कर सके। यह टूल संदिग्ध वेबसाइट के नाम, भ्रामक संदेशों और जल्दबाजी में कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाने जैसी बातों के आधार पर खतरे को समझाएगा और उपयोगकर्ता को सुरक्षित कदम उठाने का सुझाव देगा। इसका उद्देश्य केवल चेतावनी देना नहीं, बल्कि लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति जागरूक और सतर्क बनाना भी है। बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए ‘ट्रैफिक दैट थिंक्स’ शहरों में ट्रैफिक जाम और सिग्नल पर लगने वाले समय को कम करने के लिए विद्यार्थी ऐसा स्मार्ट सिस्टम विकसित करेंगे, जो वाहनों की संख्या, कतार की लंबाई, मौसम और एम्बुलेंस की आवाजाही जैसे कारकों के आधार पर सिग्नल के समय में बदलाव या वैकल्पिक मार्गों का सुझाव दे सके। इस समाधान के जरिए यह भी आकलन किया जाएगा कि ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होने से प्रतीक्षा समय कितना कम हो सकता है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसका परीक्षण वास्तविक ट्रैफिक सिग्नलों के बजाय कंप्यूटर सिमुलेशन पर किया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट को आसान भाषा में समझाने के लिए एआई सिस्टम मेडिकल रिपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी शब्दों और आंकड़ों को आम लोगों के लिए समझना आसान बनाने के उद्देश्य से विद्यार्थी ‘एआई मेडिकल रिपोर्ट सिम्प्लिफिकेशन सिस्टम’ तैयार करेंगे। यह सिस्टम रिपोर्ट की मुख्य जानकारियों को सरल भाषा में समझाने, सामान्य संदर्भ सीमा से बाहर के परिणामों को चिह्नित करने और डॉक्टर से पूछे जा सकने वाले सवाल सुझाने पर केंद्रित होगा। इसमें रिपोर्ट के मूल आंकड़ों और माप की इकाइयों को यथावत रखा जाएगा। यह सिस्टम डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं होगा और न ही स्वयं किसी बीमारी का निदान करेगा। विशेषज्ञों ने दिया सीखने, प्रयोग करने और आगे बढ़ने का संदेश टेकफेस्ट के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और तकनीकी कौशल, टीमवर्क तथा लगातार सीखते रहने के महत्व पर जोर दिया। सॉफ्टवेयर इंजीनियर, कंटेंट क्रिएटर और स्टूडेंट मेंटर पारस अटल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कॉलेज के शुरुआती दिनों में उन्हें कोडिंग की विशेष जानकारी नहीं थी, लेकिन ऑनलाइन संसाधनों और व्हाट्सऐप समूहों की मदद से उन्होंने पाइथन और 3डी गेम डेवलपमेंट सीखा। उन्होंने विद्यार्थियों को खुद पर भरोसा रखने, दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की सलाह दी। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डीन राजेश गोयल ने कहा कि टेकफेस्ट विद्यार्थियों को सीखने, टीम बनाने और नए लोगों से जुड़ने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि आज प्रतियोगिता में साथ खड़े विद्यार्थी भविष्य में मित्र, सहयोगी या व्यावसायिक साझेदार बन सकते हैं। उन्होंने दूसरे राज्यों से आए प्रतिभागियों को जयपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होने के लिए प्रेरित किया। फेज एआई के संस्थापक एवं सीईओ मंथन जेठवानी ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से घबराने के बजाय उसका जिम्मेदारी से उपयोग सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टेकफेस्ट जैसी प्रतियोगिताएँ नए विचारों को स्टार्टअप में बदलने की संभावनाएँ पैदा करती हैं। विद्यार्थियों को असफलताओं से सीखते हुए अपने कॉलेज प्रोजेक्ट्स को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि व्यावहारिक तकनीकी कौशल भविष्य में इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है। तकनीक, रचनात्मकता और टीमवर्क का संगम तीन दिनों तक चलने वाले जेयू टेकफेस्ट 2026 में हैकाथॉन के साथ रोबो वॉर, ई-स्पोर्ट्स और अन्य तकनीकी प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आयोजन युवाओं को नए विचारों पर प्रयोग करने, वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने और तकनीक के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को पहचानने का अवसर प्रदान कर रहा है।

    समाज के विकास मे सभी की सहभागिता जरूरी: रमेश चंद्र गुप्ता

    -खंडेलवाल वैश्य महासभा ने गत तीन सालों मे शिक्षा, महिला कल्याण, स्वास्थ्य, विकलांग एवं बुजुर्गो के लिए समाज बंधुओ को दी तीन करोड़ 64 लाख से ज्यादा की सहायता -राज्य सरकार के जमीन आवंटित करते ही 50 करोड़ की लागत से समाज के दान दाताओं, भामाशाह एवं समाज के हर सदस्य के सहयोग से अत्याधुनिक 50 बेड का हॉस्पिटल बनाने का काम शुरू होगा समाज के विकास मे सभी की सहभागिता जरूरी है, इसके लिए हम सब को निरंतर मिलकर प्रयास करना चाहीये! यह बात अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तुंगा वाला) एवं अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा ने राजस्थान प्रदेश के जयपुर जिले की चोमू नगर परिषद की अशोक विहार कॉलोनी के निवासी एवं सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, गैंगटोक, सिक्किम, के कुलसचिव एवं अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रोफेसर रमेश कुमार रावत के गैंगटोक, सिक्किम से आकर एक शिष्टाचार भेट के दोरान राजस्थान प्रदेश की राजधानी जयपुर मे अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय कार्यालय मे कही! मुलाकात के दोरान प्रोफेसर रमेश कुमार रावत ने दोनों को सिक्किम प्रदेश का रुद्राक्ष के पेड से टूटा हुआ एवं पक्षी की चोच से गिराया हुआ ओमकार से अंकित प्राकृतिक ओरिजनल पंच मुखी रुद्राक्ष की कंठी पहनाई, पटका पहनाया, एवं रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित राष्ट्र गान का फोटो फ्रेम भेट कर उन्हें नवरात्री की दशहरा एवं आने वाले पंच दिवसीय दीपोत्सव दीपावली की शुभकामना दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनसे आशीर्वाद लिया! इस अवसर पर महासभा के अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता (तुंगा वाला) एवं महासभा के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कट्टा ने बताया कि श्री खंडेलवाल वैश्य महासभा की और से 2024 से 2027 तक उच्च शिक्षा सहायता के लिए 2 करोड़ 53 लाख रुपये समाज के जरूरत मंद विधार्थियो को दिये गए है! इसी क्रम मे छात्रवृत्ति के तोर पर शिक्षा सहायता करीब 10 लाख रुपये दी गई है! महिला कल्याण एवं जन कल्याण सहायता के तोर पर समाज की जरूरत मंद महिलाओ को एक करोड़ रुपये की सहायता पिछले तीन सालों मे दी गई है! समाज बंधुओ को मेडिकल सहायता 80000 रुपये दी गई है!उन्होंने अपने आप को समाज का सिपाही बताया! इसके साथ ही उन्होंने बताया कि महासभा की और से समाज के विकलांग एवं जरूरतमंद बुजुर्गो की भी गत तीन सालों मे लाखों रुपये की सहायता प्रदान की गई है! इसके साथ ही महासभा की और से राज्य सरकार को महासभा को लगभग 5000 वर्गगज भूमि जयपुर जेडीए ज़ोन मे आवंटित करने के लिए सभी दस्तावेजो के साथ निवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है! राज्य सरकार जैसे ही यह लगभग 5000 वर्गगज भूमि जयपुर जेडीए ज़ोन मे आवंटित करती है, इस भूमि पर समाज के दान दाताओं, समाज के भामाशाह एवं समाज के हर सदस्य के सहयोग से करीब 50 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक, 50 बेड का हॉस्पिटल बनाकर समाज के हर तबके के लोगों को उचित एवं गुणवत्ता पूर्ण, कम से कम खर्च मे इलाज दिलवाने का मुख्य लक्ष्य है!  

    कानपुर में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब का शानदार प्रदर्शन, प्लेट ग्रुप में बना उपविजेता

    राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के अधिवक्ताओं ने लहराया परचम, अब जयपुर में होगा टूर्नामेंट का अगला संस्करण जयपुर। कानपुर में आयोजित 8वें ऑल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट टूर्नामेंट में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेट ग्रुप में उपविजेता का खिताब हासिल किया। कप्तान एडवोकेट अमित छंगाणी और उपकप्तान अमित पारीक के नेतृत्व में टीम ने अनुशासन, खेल भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का गौरव बढ़ाया। क्लब के सदस्य महेश दुबे , विलियम पाठक, पवन कुमार पाण्डेय और सुभाष सैनी ने बताया की इलाहाबाद हाई कोर्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा इंडियन एडवोकेट्स स्पोर्ट्स एसोसिएशन के तत्वावधान में 17 से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने किया। प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हाई कोर्ट की कुल 12 टीमों ने भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन टीमवर्क और प्रतिस्पर्धात्मक खेल भावना का परिचय दिया। प्लेट ग्रुप में उपविजेता बनना टीम की निरंतर मेहनत, सामूहिक प्रयास और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है। क्लब के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। टूर्नामेंट के आठ संस्करणों में राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब अब तक तीन बार उपविजेता और दो बार सेमीफाइनलिस्ट रह चुका है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर क्लब की निरंतर मजबूत उपस्थिति और क्रिकेट के प्रति अधिवक्ताओं के उत्साह को दर्शाती है। इस सफलता के साथ राजस्थान के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। आयोजकों ने टूर्नामेंट का अगला संस्करण जयपुर में आयोजित करने की घोषणा की है। इससे जयपुर को देशभर के अधिवक्ताओं की क्रिकेट प्रतिभा की मेजबानी करने का अवसर मिलेगा और राजस्थान की खेल एवं अधिवक्ता जगत में पहचान को और मजबूती मिलेगी। इस उपलब्धि पर रवि सूर्य ग्रुप के चेयरमैन एवं क्रेडाई अध्यक्ष रविन्द्र प्रताप सिंह तथा कोरल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर गिर्राज डागा ने टीम को शानदार प्रदर्शन और उपविजेता बनने पर शुभकामनाएं दीं। साथ ही, आगामी संस्करण की मेजबानी जयपुर को मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राजस्थान के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। राजस्थान हाईकोर्ट रॉयल लॉयर्स क्रिकेट क्लब की यह सफलता साबित करती है कि अधिवक्ता न्यायिक दायित्वों के साथ खेल के मैदान पर भी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और टीम भावना से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। अब जयपुर में होने वाले आगामी संस्करण को लेकर क्लब और प्रदेश के खेलप्रेमियों की उम्मीदें और उत्साह बढ़ गए हैं।

    प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत बने विराज फाउंडेशन के प्रदेश संरक्षक

    सामाजिक सरोकारों में योगदान को देखते हुए सौंपी जिम्मेदारी, पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं चौमूं। सामाजिक सेवा, जनकल्याण एवं समाजहित के कार्यों में सक्रिय विराज फाउंडेशन द्वारा अशोक विहार निवासी प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत को प्रदेश संरक्षक नियुक्त किया गया है। फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान कर नई जिम्मेदारी सौंपी। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष भुवनेश तिवाड़ी ने कहा कि समाज के प्रति समर्पित व्यक्तियों का मार्गदर्शन किसी भी सामाजिक संगठन की कार्यशैली को मजबूती प्रदान करता है। प्रोफेसर डॉ. रावत के अनुभव एवं मार्गदर्शन से फाउंडेशन के सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों को नई दिशा मिलेगी। नियुक्ति के दौरान फाउंडेशन के प्रदेश मार्गदर्शक बनवारी लाल शर्मा, प्रदेश सलाहकार सत्य प्रकाश पारीक तथा चौमूं नगर अध्यक्ष डॉ. सीताराम कुमावत उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार रावत को प्रदेश संरक्षक नियुक्त होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विराज फाउंडेशन समाज में सेवा, समर्पण एवं संस्कार की भावना को प्रोत्साहित करते हुए सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के लिए निरंतर प्रयासरत है।  

    राजस्थान विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र विभाग में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICAPST-2026 का भव्य शुभारंभ

    राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Advances in Physical Sciences & Technologies (ICAPST-2026)” का शुभारंभ गुरुवार को विश्वविद्यालय के ह्यूमैनिटीज हॉल में हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य भौतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम शोध, वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा तकनीकी नवाचारों पर विचार-विमर्श करना और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के बीच अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। उद्घाटन समारोह में इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सीलरेटर सेंटर (IUAC), नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडे मुख्य अतिथि तथा दक्षिण अफ्रीका स्थित नॉर्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर स्पेस रिसर्च (CSR) के निदेशक प्रो. अमारे अबेबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, विश्वविद्यालय के कुलगीत, राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्प स्वागत किया गया तथा सम्मेलन के उद्देश्यों और महत्व से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. एस. के. गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन देते हुए देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान, शोध की नई दिशाओं की पहचान तथा विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुनीता महावर ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके प्रमुख उद्देश्यों, वैज्ञानिक सत्रों और विभिन्न शोध विषयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में भौतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित विविध क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञ अपने शोध निष्कर्ष और नवीन वैज्ञानिक विचार साझा करेंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत प्रायोगिक सुविधाओं तथा आधुनिक तकनीकों के विकास में अंतर्विषयी सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि प्रो. अमारे अबेबे ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग तथा अंतरिक्ष विज्ञान और संबंधित अनुसंधान क्षेत्रों में नवीन संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उद्घाटन समारोह का प्रमुख आकर्षण सम्मेलन की शोध-सार पुस्तक का विमोचन रहा। मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे, विशिष्ट अतिथि प्रो. अमारे अबेबे तथा संयोजक समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति में शोध-सार पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध कार्यों के सार संकलित हैं, जो विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में हो रहे अनुसंधान और नवीन विचारों का परिचय प्रदान करते हैं। यह विमोचन सम्मेलन के अकादमिक महत्व को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। उद्घाटन सत्र के बाद मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने पूर्ण सत्र व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान से संबंधित महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए। प्रथम दिवस के आगामी कार्यक्रमों में दक्षिण अफ्रीका के प्रो. अमारे अबेबे तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. केदार सिंह के व्याख्यानों सहित विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त फ्रांस के IP2I–CNRS से डॉ. मैक्सिम गूज़ेविच, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के डॉ. हरफूल कुमावत, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. अजय कुमार त्यागी तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रो. एस. के. शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने शोध एवं वैज्ञानिक विचार प्रस्तुत किए। बेल्जियम की KU Leuven यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्टेन वानियर्शॉट तथा दक्षिण अफ्रीका के नॉर्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रो. एशमोर माविरे ने भी सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रो. मार्टेन वानियर्शॉट ने एक तकनीकी सत्र में आमंत्रित व्याख्यान दिया, जबकि प्रो. एशमोर माविरे ने वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता की। उनकी सहभागिता से सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभवों और वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिला। सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने, नवीन वैज्ञानिक प्रगति पर चर्चा करने तथा भविष्य में अनुसंधान सहयोग की संभावनाओं को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सम्मेलन का आयोजन भौतिक विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. एस. के. गुप्ता, संयोजक डॉ. सुनीता महावर, सह-अध्यक्ष डॉ. मनीषा गुप्ता तथा आयोजन सचिव डॉ. संजय कुमार एवं डॉ. अरविंद कुमार सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

    एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विष्वविद्यालय, अजमेर के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से 'Research for Viksit Bharat' विषय पर डॉ. सुरेश कुमार अग्रवाल कुलगुरु महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के निर्देशन में ऑनलाइन एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ आज दिनांक 22 अक्टूबर, 2026 को कानोड़िया पी.जी महिला महाविद्यालय, जयपुर में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप शोध अभिरुचि को प्रोत्साहित करना तथा अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। डॉ. सीमा अग्रवाल, प्राचार्य, कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर ने मुख्य अतिथि एवं सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, अजमेर के निदेशक प्रो. शिव प्रसाद ने कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. नीरजा अरुण गुप्ता, मध्य प्रदेश की सांची यूनिवर्सिटी और अहमदाबाद की गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, निदेशक, कानोड़िया महाविद्यालय, जयपुर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रंजना अग्रवाल ने कार्यक्रम का संचालन व सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र के पश्चात दो अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में प्रो. नीरजा अरुण ने “Indian Insight for Shodh” विषय पर व्याख्यान दिया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के शोध में महत्व पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में प्रो. पी. के. दशोरा ने “Research Methodology” विषय पर व्याख्यान देते हुए व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध की प्रक्रिया पर विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में देशभर से 319 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    अंग्रेजी के हुनर से वैश्विक सपनों तक: जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 साल का जश्न

    डिजिटल लर्निंग, विदेश में उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय करियर के अवसरों पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से किया संवाद; आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी सीखने के लिए किया प्रेरित जयपुर। वैश्विक शिक्षा के नए अवसरों, डिजिटल माध्यम से अंग्रेजी सीखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा के साथ जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेजेज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा की दक्षता, विदेश में उच्च शिक्षा और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध शैक्षणिक एवं करियर अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इस अवसर पर जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहा, “आज के वैश्विक दौर में विद्यार्थियों के लिए अकादमिक ज्ञान के साथ भाषा कौशल, आत्मविश्वास और विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है। डिजिटल तकनीक ने दुनिया भर में शिक्षा के अवसरों तक पहुंच को आसान बनाया है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसे मंच और अनुभव उपलब्ध कराए जाएं, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए तैयार करें। डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के बदलते स्वरूप और नई संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।” डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट एक ऑनलाइन अंग्रेजी दक्षता परीक्षा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अपनी अंग्रेजी भाषा की क्षमता प्रदर्शित कर सकते हैं। कार्यक्रम में डिजिटल शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने और विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने में भाषा कौशल की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की सीनियर मार्केटिंग मैनेजर दिव्या राव ने कहा कि शिक्षा लोगों के जीवन में नए अवसर खोलने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डुओलिंगो का उद्देश्य अंग्रेजी भाषा सीखने और उसकी दक्षता जांचने की प्रक्रिया को आसान, सुलभ और किफायती बनाना है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट को दुनिया भर के 6,500 से अधिक संस्थानों ने स्वीकार किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को सवाल पूछने, उपलब्ध अवसरों को समझने और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान वैश्विक शिक्षा के अवसरों पर आयोजित विशेष संवाद में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की ग्लोबल मार्केटिंग डायरेक्टर तारा कपूर ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा और डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की परीक्षार्थी अनहीज़ पटेल से बातचीत की। इस दौरान विदेश में पढ़ाई के अनुभवों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि विदेश में उच्च शिक्षा केवल बेहतर करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को नई संस्कृतियों को समझने, अपनी सोच का दायरा बढ़ाने और व्यक्तिगत विकास के नए अवसर भी प्रदान करती है। अनहीज़ पटेल ने विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटकर देश में उपलब्ध अवसरों को तलाशने के लिए भी प्रेरित किया। डुओलिंगो के इंडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के रीजनल मार्केटिंग डायरेक्टर करनदीप सिंह कपनी ने कहा कि भाषा सीखने का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना और नए लोगों से जुड़ना भी है। अंग्रेजी बोलते समय झिझक होना स्वाभाविक है, लेकिन नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नई संस्कृतियों से सीखने, सवाल पूछने और अपनी मातृभाषा एवं संस्कृति पर गर्व करते हुए दूसरी भाषाओं को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आपसी सहयोग और संवाद के लिए ऐसा माहौल बनाने पर भी जोर दिया, जहां प्रत्येक विद्यार्थी बिना झिझक अपनी बात रख सके। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेजेज के प्रोग्राम मैनेजर मुदित कृष्ण शर्मा के संचालन में आयोजित चर्चा के दौरान तारा कपूर ने डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट की वैश्विक पहुंच और विद्यार्थियों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार परीक्षा देने का अवसर प्रदान करती है। इसके साथ ही, डुओलिंगो की वेबसाइट पर उपलब्ध निःशुल्क मॉक टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थी परीक्षा के प्रारूप को समझ सकते हैं और अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में अपनी दक्षता बढ़ाने, आत्मविश्वास के साथ संवाद करने और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने के साथ हुआ। इस आयोजन ने डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि भाषा कौशल, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के माध्यम से वे वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।