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    आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार की धारणा कमजोर, सेंसेक्स-निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद

    3 months ago

    भारतीय शेयर बाजार बुधवार को सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के बाद हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में तेज बिकवाली के कारण बाजार की सकारात्मक धारणा पर असर पड़ा, जिससे प्रमुख सूचकांक बड़ी बढ़त दर्ज नहीं कर सके। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, दोनों ही दिन के अंत में मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

    बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 78.56 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,817.69 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स ने 83,947.53 का उच्च स्तर और 83,119.95 का निचला स्तर छुआ। इस दौरान सूचकांक करीब 827 अंकों के दायरे में घूमता रहा, जो बाजार में अस्थिरता को दर्शाता है।

    वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 48.45 अंक यानी 0.19 प्रतिशत चढ़कर 25,776 के स्तर पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन बुधवार को आईटी शेयरों में कमजोरी के कारण वह रफ्तार कायम नहीं रह सकी।

    आईटी सेक्टर पर दबाव

    बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर से आया। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज आईटी शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कुछ शेयरों में सात प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसका असर बीएसई आईटी इंडेक्स पर भी पड़ा, जो 5.49 प्रतिशत टूटकर 35,109.51 पर बंद हुआ।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक टेक शेयरों में कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नए घटनाक्रमों ने आईटी सेक्टर की धारणा को प्रभावित किया। हाल के दिनों में एआई आधारित ऑटोमेशन टूल्स को लेकर बढ़ती चर्चा से यह चिंता गहराई है कि पारंपरिक सॉफ्टवेयर और आउटसोर्सिंग मॉडल पर दबाव बढ़ सकता है।

    इन शेयरों में रही मजबूती

    आईटी सेक्टर की कमजोरी के बावजूद, कुछ अन्य सेक्टरों ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स की कंपनियों में इटरनल, ट्रेंट, एनटीपीसी, अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड और मारुति सुजुकी के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। तेल एवं गैस, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।

    संस्थागत निवेशकों की गतिविधि

    बाजार को संस्थागत निवेशकों से भी कुछ समर्थन मिला। हालिया आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एक दिन पहले भारतीय शेयरों में 5,236 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी करीब 1,014 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इससे संकेत मिलता है कि दीर्घकालिक निवेशक अभी भी भारतीय बाजार को लेकर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं।

    वैश्विक संकेत और कच्चा तेल

    वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्केई 225 गिरावट में रहा। यूरोपीय बाजारों में कारोबार के दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिला।

    अमेरिकी बाजारों में एक दिन पहले गिरावट दर्ज की गई थी। नैस्डैक कंपोजिट, एसएंडपी 500 और डॉव जोन्स जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही, जिसका असर वैश्विक निवेश धारणा पर भी पड़ा।

    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड 0.36 प्रतिशत बढ़कर 67.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऊर्जा कीमतों में यह उतार-चढ़ाव भी बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल रहा।

    आगे की राह

    विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा आईटी सेक्टर की चाल, वैश्विक तकनीकी घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक संकेतों पर निर्भर करेगी। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत संकेत और संस्थागत निवेशकों की रुचि बाजार को नीचे की ओर बड़ी गिरावट से बचाए रख सकती है।

    कुल मिलाकर, बुधवार का कारोबारी सत्र यह दिखाता है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है, जहां कुछ सेक्टरों की कमजोरी को अन्य क्षेत्रों की मजबूती संतुलित कर रही है।

     
     
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