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    डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे कमजोर होकर 90.43 पर बंद, व्यापार समझौते पर स्पष्टता का इंतजार

    3 months ago

    भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे की गिरावट के साथ 90.43 के स्तर पर बंद हुआ। एक दिन पहले भारत–अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद रुपये में आई तेज मजबूती के बाद निवेशकों और विदेशी मुद्रा बाजार के प्रतिभागियों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर मुद्रा की चाल पर दिखा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कॉरपोरेट्स और आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बना।

    अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.35 के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 90.26 के उच्च स्तर तक पहुंचा। हालांकि, दिन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया और यह 90.54 के निचले स्तर तक भी फिसला। कारोबार के अंत में रुपया 90.43 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 11 पैसे कम है।

    पिछले सत्र में रिकॉर्ड मजबूती

    मंगलवार को रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा था। उस दिन इसमें 117 पैसे या करीब 1.28 प्रतिशत की रिकॉर्ड मजबूती दर्ज की गई थी और यह 90.32 के स्तर पर बंद हुआ था। यह तेजी भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बनी सकारात्मक धारणा के कारण आई थी। हालांकि, बुधवार को बाजार सहभागियों ने समझौते के विस्तृत ब्योरे और आधिकारिक दस्तावेज सामने न आने तक सतर्क रहने का फैसला किया।

    व्यापार समझौते पर अभी भी सवाल

    विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक माहौल जरूर बना है, लेकिन अभी तक न तो कोई औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित समझौता सामने आया है और न ही उसका विस्तृत ढांचा या अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक किया गया है। इसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली और सतर्कता का रुख अपनाया, जिससे रुपये की बढ़त थम गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समझौते की शर्तों, समयसीमा और कानूनी रूपरेखा को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

    अन्य कारकों का भी असर

    रुपये पर दबाव डालने वाले अन्य कारकों में घरेलू आर्थिक आंकड़े और वैश्विक संकेत शामिल रहे। सेवाक्षेत्र से जुड़े हालिया आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे भी मुद्रा बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने भी रुपये की चाल पर असर डाला।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए ऊंची तेल कीमतें चालू खाते और मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

    आगे की संभावनाएं

    विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में रुपये की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी स्पष्टता, विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख, घरेलू शेयर बाजार की चाल और कच्चे तेल की कीमतें प्रमुख हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर व्यापार समझौते को लेकर ठोस और सकारात्मक जानकारी सामने आती है तथा विदेशी निवेश प्रवाह बना रहता है, तो रुपये को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी इसकी मजबूती को सीमित कर सकती है।

    विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 से 90.60 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर भी करीबी नजर बनाए रखेंगे।

    शेयर बाजार से मिला मिला-जुला संकेत

    इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में भी सीमित तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी भी मामूली तेजी में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से हालिया खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन आईटी सेक्टर में कमजोरी के कारण तेजी सीमित रही।

     

    कुल मिलाकर, बुधवार का दिन रुपये के लिए संतुलन और सतर्कता का संकेत लेकर आया। एक ओर व्यापार समझौते से जुड़ी उम्मीदें बाजार को सहारा दे रही हैं, तो दूसरी ओर अनिश्चितता और वैश्विक जोखिमों के चलते निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बचते नजर आ रहे हैं।

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