Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    आज का कर्म ही कल का भाग्य है : डॉ. समित शर्मा

    1 month ago

    सुबोध पी.जी. कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
    एस.एस. जैन सुबोध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामबाग सर्किल, जयपुर में, शुक्रवार से ‘संधारणीय रसायनशास्त्र में अभिनव उन्नति और भारतीय भाषाओं में तकनीकी शब्दावली की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ। एस.एस. जैन सुबोध पी.जी. महाविद्यालय, जयपुर एवं वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. समित शर्मा, (आई.ए.एस.), सचिव, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं गौपालन विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर ने कहा कि आज का कर्म ही कल का भाग्य है हमें एक ऐसे समाज की संरचना करनी है, जिसमें विकास होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी सुरक्षित हो। हमें ऐसे आविष्कार करने चाहिए, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहे। हमें पर्यावरण संरक्षण करते हुए विकास करना चाहिए। कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि डॉ. पंकज कुमार शर्मा, वैज्ञानिक, सीएफईएस, डी.आर.डी.ओ. नई दिल्ली ने कहा कि हमें विज्ञान को पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास करना चाहिए और भारतीय भाषाओं को समृद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. शैलेन्द्र सिंह, सहायक निदेशक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग ने कहा कि भारतीय भाषाओं में तकनीकी शब्दावली कठिन नहीं है वह केवल आमजन के लिए अपरिचित है। जब वे इसका अधिकाधिक प्रयोग करेंगे तो उन्हें तकनीकी शब्दावली कठिन नहीं लगेगी। इस अवसर पर वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की सहायक निदेशक, मर्सी लालरोहलू हमार, ने कहा कि आयोग का उद्देश्य सभी भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली उपलब्ध करवाना है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि आप दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपनी पूर्ण प्रतिभागिता निभाते हुए, हमें उसका फीडबैक भी दें। 
    उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के संयोजक वी.सी. डागा ने कहा कि आज हम विकसित हों, लेकिन उसके दुष्प्रभाव नहीं हो और हमें प्रदूषण को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने होंगे। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रेणु जोशी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि हमें नवीनीकरण, शोध व नवाचार पर अधिक बल देना है और तकनीकी शब्दावली को सरल बनाकर सभी तक पहुंचाना है। वैज्ञानिक शब्दावली मातृभाषा में उपलब्ध हो सके, इसके प्रयास करें। राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. शोभना शर्मा ने संगोष्ठी की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए होने वाले तकनीकी सत्रों की जानकारी से अवगत करवाया।

    Click here to Read More
    Previous Article
    कुलाधिपति बागडे ने जारी किए नियुक्ति आदेश
    Next Article
    2026 G20 शिखर सम्मेलन के लिए साउथ अफ्रीका को निमंत्रण नहीं भेजेगा अमेरिका: ट्रंप

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment