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    आलोचना के लिए खुली सरकार और आत्म-आलोचना के लिए तैयार नागरिक ज़रूरी: गोपालकृष्ण गांधी

    1 month ago

    बेंगलुरु में आयोजित बेंगलुरु लिटरेचर फेस्टिवल के 14वें संस्करण में पूर्व राज्यपाल और लेखक गोपालकृष्ण गांधी ने लोकतंत्र की मजबूती पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी सरकार की जरूरत है जो आलोचना से न डरती हो, और ऐसे नागरिकों की भी, जो आत्म-आलोचना करने से नहीं कतराते।

    उन्होंने अपनी पुस्तक The Undying Light: A Personal History of Independent India पर बात करते हुए बताया कि इसका प्रेरणा-स्रोत जवाहरलाल नेहरू थे। गांधी ने कहा कि नेहरू का कथन—“The light has gone out of our lives… yet the light will never go out”—भारतीय लोकतंत्र की स्थायी उम्मीद का प्रतीक है।

     

    गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि पुस्तक में गांधीजी, नेहरूजी और राजाजी जैसे बड़े नामों के साथ-साथ उन अनसुने नायकों को भी सम्मान दिया गया है, जिन्होंने भारत के सामाजिक और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाया है।

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