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    आठ देशों ने नए अंतरराष्ट्रीय शांति मंच से जुड़ने पर जताई सहमति

    1 hour ago

    पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के आठ देशों ने एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग मंच से जुड़ने पर सहमति जताई है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को प्रोत्साहित करना, आपसी सहयोग को मजबूत करना और दीर्घकालिक विकास के लिए एक संरचित ढांचा उपलब्ध कराना बताया गया है।

    इस संबंध में जारी संयुक्त बयान में क़तर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने कहा कि उन्होंने इस मंच में भागीदारी के लिए आमंत्रण का स्वागत किया है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी देश अपनी-अपनी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार औपचारिक रूप से इससे जुड़ने की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

    विदेश मंत्रियों ने जानकारी दी कि कुछ देशों ने आवश्यक औपचारिक कदम शुरू कर दिए हैं, जबकि अन्य देश आने वाले समय में संबंधित प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि भागीदारी पूरी तरह पारदर्शी होगी और राष्ट्रीय नियमों तथा संस्थागत ढांचे के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी।

    यह शांति मंच हाल ही में एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान प्रस्तुत किया गया था। इससे जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शासन क्षमता को मजबूत करना, क्षेत्रीय संवाद को बढ़ावा देना, आर्थिक पुनर्निर्माण में सहयोग देना और विकास से जुड़े दीर्घकालिक लक्ष्यों पर समन्वय स्थापित करना है।

    संयुक्त बयान में कहा गया कि भाग लेने वाले देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्थिरता और विकास प्रयासों के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्रियों ने यह भी रेखांकित किया कि संवाद, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सिद्धांतों का सम्मान किसी भी दीर्घकालिक समाधान की आधारशिला है।

    बयान के अनुसार, इस मंच के माध्यम से प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा। इसका लक्ष्य ऐसे विकास कार्यक्रमों को समर्थन देना है, जिनसे स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके और आर्थिक गतिविधियों को गति मिले।

    राजनयिक सूत्रों का कहना है कि यह मंच एक अस्थायी समन्वय तंत्र के रूप में कार्य करेगा, जो संस्थागत क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देगा। इसके साथ-साथ यह पहल पहले से सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय ढांचों के साथ समन्वय में काम करेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कई देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण में रुचि बढ़ रही है। विश्लेषकों के अनुसार, यह मंच नीति-निर्माण, विकास प्राथमिकताओं के समन्वय और विशेषज्ञता साझा करने का अवसर प्रदान कर सकता है।

    हालांकि मंच की कार्यप्रणाली और ढांचे से जुड़े सभी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाली बैठकों में शासन संरचना, वित्तीय व्यवस्था और सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इनमें बुनियादी ढांचा विकास, मानवीय समन्वय और आर्थिक पुनर्जीवन जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

    यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब वैश्विक स्तर पर संवाद-आधारित समाधानों और बहुपक्षीय सहयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है। कई देशों ने यह विचार दोहराया है कि स्थायी प्रगति और क्षेत्रीय संतुलन के लिए समावेशी विकास और आपसी सहयोग आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार, यह पहल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें पूरक रूप में समर्थन देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी और साझा लक्ष्यों पर आधारित रहेगी।

    आने वाले दिनों में, भाग लेने वाले देशों द्वारा अपने प्रतिनिधियों के नामांकन और प्राथमिक क्षेत्रों की घोषणा किए जाने की संभावना है। इसके बाद इस मंच के संचालन और आगामी गतिविधियों को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

     

    यह पहल उन कूटनीतिक प्रयासों का संकेत मानी जा रही है, जिनका उद्देश्य शांतिपूर्ण, सहयोगात्मक और विकास-केंद्रित रास्तों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक विकास को आगे बढ़ाना है।

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