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    भारत और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा व रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति

    1 hour ago

    भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने पर आपसी सहमति जताई है। यह जानकारी यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति से जुड़ी वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास ने दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    ब्रुसेल्स में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कैलास ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और सुरक्षा व रक्षा के क्षेत्र में यह साझेदारी दोनों के साझा हितों को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह समझौता बदलते वैश्विक हालात में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।

    यूरोपीय संघ और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संवाद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दोनों पक्ष पहले ही व्यापार, जलवायु, डिजिटल तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। सुरक्षा और रक्षा से जुड़ी यह प्रस्तावित साझेदारी उसी व्यापक संबंध का विस्तार मानी जा रही है।

    राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस साझेदारी का उद्देश्य नीति-स्तर पर समन्वय बढ़ाना, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग करना तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श को मजबूत करना है। हालांकि समझौते के विस्तृत प्रावधानों को लेकर अभी औपचारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

    यूरोपीय संसद में हाल ही में हुई एक चर्चा के दौरान कैलास ने कहा कि ईयू अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय संतुलन जैसे सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि साझेदार देशों के साथ सहयोग इन्हीं मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह पहल ऐसे समय पर सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग की आवश्यकता बढ़ गई है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर यूरोप तक, कई साझा चुनौतियां सामने हैं जिन पर संवाद और समन्वय को अहम माना जा रहा है।

    भारत के लिए, यह साझेदारी यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक संपर्क को और गहरा करने का अवसर प्रदान कर सकती है। वहीं यूरोपीय संघ के लिए, भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है, जिसकी भूमिका वैश्विक मंच पर लगातार बढ़ रही है।

    राजनयिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस समझौते के तहत समुद्री सुरक्षा, साइबर सहयोग, आपदा प्रबंधन और शांति अभियानों जैसे विषयों पर सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। हालांकि, दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया है कि सभी पहल पारदर्शी होंगी और आपसी सहमति पर आधारित रहेंगी।

    कैलास ने कहा कि यह साझेदारी किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आपसी विश्वास बढ़ाना और साझा हितों को सुरक्षित करना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बहुपक्षीय सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था ईयू की विदेश नीति का प्रमुख आधार है।

    भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को लेकर जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में उच्च-स्तरीय बैठकों और संवादों के माध्यम से इस समझौते को औपचारिक रूप दिया जा सकता है। इसके बाद संयुक्त कार्ययोजनाओं और सहयोग के व्यावहारिक पहलुओं पर काम शुरू होने की संभावना है।

     

    कुल मिलाकर, सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में यह प्रस्तावित साझेदारी भारत-ईयू संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। यह न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में स्थिरता और सहयोग के प्रयासों को भी समर्थन दे सकती है।

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