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    अबू धाबी में तेल संसाधनों की नई उपलब्धि, भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को मिलेगा बल

    5 days ago

    भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास के तहत, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम से जुड़ी इकाइयों ने संयुक्त रूप से अबू धाबी के एक ऑनशोर क्षेत्र में तेल संसाधनों की नई उपलब्धि की जानकारी दी है। यह पहल भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

    कंपनियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि एक विशेष उद्देश्य के तहत गठित संयुक्त उपक्रम के माध्यम से हासिल की गई है, जिसमें दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की बराबर हिस्सेदारी है। यह उपक्रम वर्ष 2019 में अबू धाबी के ऑनशोर क्षेत्र में अन्वेषण कार्य के लिए चयनित हुआ था।

    अन्वेषण कार्य में सकारात्मक प्रगति

    संयुक्त उपक्रम ने पहले चरण में किए गए अन्वेषण के दौरान एक कुएं से तेल प्रवाह के संकेत प्राप्त किए थे। इसके बाद किए गए विस्तृत परीक्षण और तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से एक अन्य कुएं में भी तेल संसाधनों की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यह संकेत देते हैं कि क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों की संभावनाएं पहले के अनुमान से अधिक मजबूत हो सकती हैं।

    कंपनियों का कहना है कि इस चरण में प्राप्त परिणामों ने आगे के मूल्यांकन और संभावित विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त किया है। आने वाले समय में इन कुओं की क्षमता और आर्थिक उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।

    रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना

    यह ऑनशोर क्षेत्र लगभग छह हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला हुआ है और संयुक्त उपक्रम को यहां पूर्ण संचालन अधिकार प्राप्त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएं भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में अधिक मजबूत स्थिति प्रदान करने में सहायक होती हैं।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, विदेशों में संसाधन विकास से भारत को आपूर्ति विविधीकरण का लाभ मिलता है, जिससे भविष्य में किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम की जा सकती है।

    भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

    कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि इस उपलब्धि का सीधा उद्देश्य देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को दीर्घकाल में संतुलित और सुरक्षित बनाना है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रयास घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ रणनीतिक भंडारण को भी मजबूत करते हैं।

    एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह परियोजना भारत की ऊर्जा योजना के अनुरूप है, जिसमें विश्व स्तर पर संसाधनों की खोज और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

    निवेश और भविष्य की योजनाएं

    अन्वेषण चरण में अब तक सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किया जा चुका है, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अब अगला चरण संसाधनों की व्यावसायिक व्यवहार्यता को परखने का होगा। इसके आधार पर आगे विकास और उत्पादन से जुड़े निर्णय लिए जाएंगे।

    कंपनियों का कहना है कि प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं और यदि सभी तकनीकी मानदंडों पर खरे उतरते हैं, तो यह परियोजना आने वाले वर्षों में उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण

    यह परियोजना भारत और मध्य-पूर्व क्षेत्र के बीच ऊर्जा सहयोग का एक उदाहरण भी मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की साझेदारियां दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होती हैं और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती हैं।

    संयुक्त उपक्रम से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि वे न केवल वर्तमान क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, बल्कि आसपास के अन्य संभावित क्षेत्रों का भी अध्ययन किया जा रहा है।

    निष्कर्ष

     

    अबू धाबी के ऑनशोर क्षेत्र में तेल संसाधनों की यह नई उपलब्धि भारतीय ऊर्जा कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपस्थिति को मजबूत करती है, बल्कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की दिशा में भी सहायक साबित हो सकती है। आने वाले महीनों में होने वाले मूल्यांकन से यह स्पष्ट होगा कि यह परियोजना किस स्तर तक व्यावसायिक रूप ले सकती है।

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