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    कुत्तों के काटने के मामलों में भारी मुआवज़े का संकेत, सुप्रीम कोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने की बात कही

    5 days ago

    सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के काटने से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में राज्य सरकारों पर भारी मुआवज़ा लगाया जा सकता है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों को भोजन देने वाले व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    मंगलवार को इस विषय पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि कुत्तों के हमलों के परिणाम कई बार पीड़ितों के लिए जीवनभर का शारीरिक और मानसिक आघात बन जाते हैं।

    फीडरों की भूमिका पर सवाल

    अदालत ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति आवारा कुत्तों को नियमित रूप से भोजन देता है, तो उसकी जिम्मेदारी क्यों न तय की जाए। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग कुत्तों को अपने घर या निजी परिसर में रखकर उनकी देखभाल क्यों नहीं करते, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर खतरे की स्थिति उत्पन्न न हो।

    नगर निकायों की जवाबदेही भी तय

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अदालत के अनुसार, पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के तहत निर्धारित दायित्वों का सही ढंग से पालन न होने के कारण समस्या और गंभीर हुई है।

    पीठ ने कहा कि यदि स्थानीय निकाय अपने कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करते, तो उनकी जवाबदेही तय करना आवश्यक हो जाता है।

    राज्यों पर मुआवज़े का दबाव

    अदालत ने संकेत दिया कि कुत्तों के काटने से हुई चोटों या मौत के मामलों में पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली जा सकती है। इस संदर्भ में “भारी मुआवज़ा” शब्द का उपयोग करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि लापरवाही को अब अनदेखा नहीं किया जाएगा।

    आगे की सुनवाई पर नजर

     

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को कुत्तों के प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। आने वाली सुनवाइयों में यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्यों, नगर निकायों और व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी किस प्रकार तय की जाएगी।

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