Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    अल फ़लाह यूनिवर्सिटी मामले में बड़ा घटनाक्रम, दिल्ली अदालत ने चेयरमैन की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ाई

    3 months ago

    Yugcharan / 13 फ़रवरी 2026

    दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को अल फ़लाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय और शैक्षणिक अनियमितताओं के मामले में उसके चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत को 14 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब विश्वविद्यालय, उसके संचालन और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज़ होती जा रही है।

    अदालत की कार्यवाही और ताज़ा आदेश

    शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सिद्दीकी द्वारा दायर एक याचिका पर भी संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसियों से संबंधित दस्तावेज़ और चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की थी। अदालत ने इस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह की याचिकाएं आमतौर पर अभियुक्त को अपने बचाव की तैयारी के लिए आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त करने के उद्देश्य से दायर की जाती हैं।

    गिरफ्तारी और आरोपों की पृष्ठभूमि

    जवाद अहमद सिद्दीकी को 27 जनवरी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दो अलग-अलग प्राथमिकी के तहत गिरफ्तार किया था। ये प्राथमिकी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थीं। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने अपनी मान्यता से जुड़ी स्थिति को लेकर भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की और इसके ज़रिए छात्रों को दाखिले के लिए आकर्षित किया।

    अदालत ने 31 जनवरी को सिद्दीकी को पहली बार 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने से यह संकेत मिलता है कि जांच अभी निर्णायक चरण में नहीं पहुंची है और एजेंसियां आगे की पड़ताल के लिए समय चाहती हैं।

    मान्यता समाप्त होने के बाद भी दाखिले का आरोप

    जांच एजेंसियों के अनुसार, अल फ़लाह यूनिवर्सिटी की वैध मान्यता वर्ष 2018 में समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय की वेबसाइट और प्रचार सामग्री में स्वयं को मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा। आरोप है कि इसी आधार पर बी.एड., इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रों को दाखिला दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से छात्रों को गुमराह करने का हो सकता है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई छात्रों ने भारी फीस जमा की, जबकि उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि संस्थान की मान्यता समाप्त हो चुकी है।

    सुरक्षा एजेंसियों की जांच में क्यों आया विश्वविद्यालय

    यह मामला तब और गंभीर हो गया जब विश्वविद्यालय से जुड़े एक मेडिकल संस्थान के तीन डॉक्टरों के नाम पिछले वर्ष दिल्ली के ऐतिहासिक इलाके के पास हुई एक विस्फोट की घटना की जांच में सामने आए। जांच एजेंसियों ने उन्हें संदिग्धों की सूची में शामिल किया था। हालांकि इस पहलू पर अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसी के बाद विश्वविद्यालय और उसके प्रबंधन पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई।

    अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की आंतरिक गतिविधियों, फंडिंग पैटर्न और प्रशासनिक ढांचे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

    प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई

    दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में सक्रिय हो चुका था। एजेंसी ने नवंबर 2025 में सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने कथित तौर पर झूठे दावों के ज़रिए छात्रों को दाखिले के लिए प्रेरित किया और इससे लगभग 45 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की।

    जनवरी में एजेंसी ने विश्वविद्यालय से जुड़ी लगभग 139.97 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया था। यह कार्रवाई चार्जशीट दाखिल करने के साथ की गई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग का विस्तृत विवरण शामिल है।

    पारिवारिक संस्थाओं और विदेशी लेन-देन की जांच

    जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि विश्वविद्यालय के फंड को सिद्दीकी के परिवार द्वारा नियंत्रित विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया। इसके अलावा, कुछ मामलों में विदेशी लेन-देन के संकेत भी मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर परिवार के सदस्यों के पक्ष में धन प्रेषण किया गया।

    इन आरोपों के बाद एजेंसियां बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दस्तावेज़ों की भी गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि इन लेन-देन में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

    बचाव पक्ष की दलीलें

    सिद्दीकी के वकीलों का कहना है कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कई मुद्दे प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन्हें आपराधिक मामला बनाना उचित नहीं है। बचाव पक्ष ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि सभी दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाएं ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

    उच्च शिक्षा व्यवस्था पर असर

    यह मामला देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मान्यता से जुड़ी जानकारी समय पर और स्पष्ट रूप से सार्वजनिक न हो, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने नियामक संस्थाओं से ऐसी प्रणालियां विकसित करने की मांग की है, जिससे छात्र और अभिभावक किसी भी संस्थान की स्थिति को आसानी से सत्यापित कर सकें।

    आगे की राह

    फिलहाल जवाद अहमद सिद्दीकी न्यायिक हिरासत में रहेंगे और मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी। जांच एजेंसियां इस अवधि में वित्तीय दस्तावेज़ों, शैक्षणिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण पूरा करने की तैयारी में हैं।

     

    अदालत के अगले आदेश और जांच की दिशा यह तय करेगी कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित रहेगा या देश की निजी उच्च शिक्षा संस्थाओं के लिए एक बड़े उदाहरण के रूप में सामने आएगा। Yugcharan News इस मामले से जुड़े हर महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर नज़र बनाए रखेगा और पाठकों को तथ्यात्मक व संतुलित जानकारी उपलब्ध कराता रहेगा।

    Click here to Read More
    Previous Article
    दिल्ली में तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर तीन लोगों की संदिग्ध मौत, पुलिस ने बुज़ुर्ग आरोपी को हिरासत में लिया
    Next Article
    बांग्लादेश चुनाव में अपेक्षाओं पर खरा क्यों नहीं उतर सका जमात-ए-इस्लामी: रणनीति, मतदाता रुझान और बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment