Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस विशेष: संघर्ष, सपनों और संवेदनाओं को कला में पिरोकर रच रहे नई प्रेरणा की कहानी

    1 month ago

    — कूची के रंगों में बोलती भावनाएं: भावनाओं के रंग–कैनवास पर चमकते दिव्यांग विद्यार्थी
    जयपुर। प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती और दिव्यांग विद्यार्थी इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण हैं। चुनौतियां चाहे कितनी भी हों, इन बच्चों का आत्मविश्वास, उनकी कला और सकारात्मक सोच हर बाधा से बड़ी साबित होती है। सीडब्ल्यूएसएन (विशेष आवश्यकता वाले) विद्यार्थियों में अपनी कल्पनाओं को आकार देने की अद्भुत क्षमता होती है। ये विशेष बच्चे संघर्ष, सपनों और भावनाओं को रंगों में ढालकर जिस तरह कैनवास पर उकेरते हैं, वह किसी को भी आश्चर्यचकित कर देता है। अपने मन की बातों को शब्दों में व्यक्त करने के बजाय वे पेंटिंग के माध्यम से अपने हृदय की भावनाओं को जीवंत बना देते हैं। इनकी बनाई हर तस्वीर में एक अनकहा संदेश छुपा होता है: हिम्मत का, उम्मीद का और आत्मविश्वास का।

    राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के ये विद्यार्थी अपनी ब्रश और रंगों के जरिये जीवन की छोटी-छोटी खुशियों से लेकर संघर्षों तक को बड़े सहज भाव में दर्शाते हैं। उनके लिए रंगों की दुनिया केवल एक कला नहीं, बल्कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्र उड़ान है जहां वे बिना किसी बाधा के खुद को खुलकर महसूस कर पाते हैं।

    पेन्टिंग में झलकता नया दृष्टिकोण

    विद्यार्थियों ने राज्य विधि सेवा द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पुरस्कार जीते हैं और अपनी प्रतिभा का दमखम साबित किया है। इनकी पेंटिंग्स में झलकती चमक न केवल समाज को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि 'दिव्यांगता सीमाएं नहीं, क्षमताओं का एक नया दृष्टिकोण है।'

    इनका कहना है

    1. ये बच्चे भले ही किसी अंग से दिव्य हों, पर इनकी क्षमताएं असीमित हैं। हमारा प्रयास है कि समावेशी शिक्षा के माध्यम से इन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

    — श्रीमती रजनी यादव, उप निदेशक, समावेशी शिक्षा एवं सामुदायिक गतिशीलता, स्कूल शिक्षा परिषद, राजस्थान।

    2. दिव्यांगता इनके कदम नहीं रोकती, बल्कि इन्हें और मजबूत बनाती है। ऐसे हर बच्चे का हाथ थामकर उसे उसके सपनों तक पहुंचाना ही हमारा सबसे बड़ा दायित्व है।

    —  भरत जोशी, प्राचार्य, राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय जयपुर।

    Click here to Read More
    Previous Article
    ओपन स्कूल की परीक्षाएं 4 दिसंबर से शुरू
    Next Article
    युवाओं में जागरूकता पैदा करने के लिए कार्यक्रम

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment