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    "अधूरे पन्ने -पूरी कहानी" नाटक का मंचन

    1 month ago

    यह नाटक एक ऐसे प्रेमी युगल की कहानी है जो जीवन भर साथ -साथ चलना चाह रहे थे लेकिन लड़की का पिता अपनी लड़की की शादी किसी अमीर लड़के से करना चाहता था। उसने अपनी लड़की की भावनाओं का भी ध्यान नहीं रखा। नतीजतन दोनों के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं। लड़की की नौकरी एक दूसरे शहर में लग जाती है जबकि लड़का उसी शहर में बिजनेस करने लगता है।
    वर्षों बाद दोनों फिर से उसी पार्क में अचानक मिल जाते हैं। दोनों के बीच अतीत के बारे में काफी भावनात्मक बातचीत होती है। दोनों अब भी अविवाहित हैं। बीस वर्ष बाद अधेड़ उम्र में दोनों अपनी अधूरी कहानी को मुकम्मल करने का तय करते हैं। लड़की (अब एक प्रौढ़ महिला)पहले थोड़ा हिचकिचाती है लेकिन लड़के (अब एक प्रौढ़ पुरुष) उसे अन्ततः अपने तर्कों से मना लेता है।
    इस बीच उसी पार्क में एक चाय बेचने वाले युवक और फूल बेचने वाले एक बच्चे का भी आना जाना होता है। ये दोनों पात्र प्रेमी युगल के पुनर्मिलन के साक्षी बनते हैं।

    पात्र -परिचय
    महिला -रेखा शर्मा
    चाय बेचने वाला -जयनित
    पुरुष - राम सहाय पारीक
    फूल वाला - वरेन पारीक
    गीत व गायन - राजीव "अंकित"
    ध्वनि प्रभाव -धनेश वर्मा
    मंच व्यवस्था -कुशलेश वर्मा
    संयोजक -राजीव जैन
    लेखक/निर्देशक - राम सहाय पारीक

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