Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस का बयान: “नई दिल्ली तेल खरीद में पूरी तरह स्वतंत्र

    3 months ago

    भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच रूस ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। रूस का कहना है कि भारत द्वारा कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाना कोई नई बात नहीं है और यह वर्षों से चली आ रही नीति का हिस्सा रहा है।

    रूस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद कम करने या रोकने पर सहमति जताई है। इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलकों में कई सवाल उठने लगे थे।

    रूस का आधिकारिक रुख

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस भारत का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इस प्रक्रिया में कोई असामान्य बदलाव नहीं है। रूस के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति व्यावहारिक और बहुस्तरीय रही है, जिसमें आपूर्ति सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

    पेसकोव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस को भारत की ओर से ऐसा कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है, जिसमें रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने की बात कही गई हो। उनके अनुसार, मीडिया में चल रही कई अटकलें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शातीं।

    भारत–रूस ऊर्जा सहयोग

    रूस के विदेश मंत्रालय ने भी इस विषय पर बयान जारी करते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार दोनों देशों के हित में है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक है।

    रूस का यह भी मानना है कि भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के साथ ऊर्जा सहयोग जारी रहना वैश्विक आपूर्ति संतुलन के लिए आवश्यक है। रूस ने संकेत दिया कि वह भविष्य में भी भारत के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग बनाए रखने के लिए तैयार है।

    रूसी तेल पर भारत की निर्भरता

    आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी बेहद कम थी। हालांकि, 2022 में यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस से दूरी बनाने के चलते भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीद बढ़ाई। इसके परिणामस्वरूप भारत रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया।

    वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इनमें से लगभग एक-तिहाई तेल रूस से आता है। कुछ समय पहले तक भारत प्रतिदिन 20 लाख बैरल से अधिक रूसी कच्चा तेल आयात कर रहा था, हालांकि हाल के महीनों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है।

    अमेरिकी दबाव और व्यापारिक समीकरण

    अमेरिका ने पिछले वर्ष भारत पर ऊंचे शुल्क लगाए थे, जिनमें रूसी ऊर्जा खरीद से जुड़ी पाबंदियां भी शामिल थीं। इसके बाद भारत द्वारा रूस से तेल आयात में कुछ कमी देखी गई। विश्लेषकों का मानना है कि यह कमी पूर्ण रूप से राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि बाजार स्थितियों, कीमतों और लॉजिस्टिक कारणों से भी जुड़ी हुई है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कच्चा तेल और रूसी कच्चा तेल गुणात्मक रूप से अलग हैं। रूसी तेल अपेक्षाकृत भारी होता है, जबकि अमेरिकी तेल हल्का माना जाता है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक स्रोत को पूरी तरह दूसरे से बदलना तकनीकी और आर्थिक रूप से आसान नहीं है।

    विशेषज्ञों की राय

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकता। विविध स्रोतों से तेल खरीदना भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारत निकट भविष्य में रूसी तेल आयात को पूरी तरह बंद नहीं करेगा, बल्कि संतुलन बनाकर आगे बढ़ेगा।

    कुछ विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका द्वारा किए गए दावे घरेलू राजनीति और व्यापारिक सफलता दिखाने की कोशिश का हिस्सा भी हो सकते हैं। वहीं भारत की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि नीति में कोई तात्कालिक और कठोर बदलाव नहीं हुआ है।

    निष्कर्ष

     

    कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के बाद रूस का यह बयान साफ करता है कि भारत की ऊर्जा नीति स्वतंत्र और व्यावहारिक बनी हुई है। भारत वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय ले रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय दबावों और घरेलू जरूरतों के बीच भारत किस तरह संतुलन बनाए रखता है, लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए बहुपक्षीय विकल्पों पर काम करता रहेगा।

    Click here to Read More
    Previous Article
    महिलाओं से छेड़छाड़ का विरोध करना पड़ा भारी, दिल्ली में युवक पर सामूहिक हमला
    Next Article
    क्या अमेरिका–ईरान कूटनीति सफल हो पाएगी? बातचीत की सीमित खिड़की के भीतर तनाव कम करने की कोशिश

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment