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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से रुपये में तेज मजबूती, डॉलर के मुकाबले 90.30 तक पहुंचा

    11 hours ago

    भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते का असर मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाजार में साफ तौर पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 119 पैसे की मजबूती के साथ 90.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह हालिया महीनों में रुपये की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त मानी जा रही है, जिसने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है।

    विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए शुल्क में बड़ी कटौती ने भारत की स्थिति को वैश्विक व्यापार में मजबूत किया है। इससे न केवल निर्यातकों को राहत मिली है, बल्कि विदेशी निवेशकों की वापसी की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

    शुरुआती कारोबार में तेज उछाल

    इंटरबैंक फॉरेक्स बाजार में रुपया 90.30 प्रति डॉलर पर खुला, जो इसके पिछले बंद स्तर 91.49 से काफी बेहतर रहा। बाजार खुलते ही डॉलर के मुकाबले रुपये में खरीदारी बढ़ी, जिससे इसकी कीमत में तेज सुधार दर्ज किया गया।

    मुद्रा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक बड़ा संकेत है। इससे भारतीय निर्यातकों को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिलती है और वैश्विक निवेशकों के नजरिये से भारत अधिक आकर्षक बाजार बनकर उभरता है।

    निवेशकों की धारणा में सुधार

    ट्रेजरी और फॉरेक्स बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह व्यापार समझौता लगभग नौ महीनों की देरी के बाद सामने आया है, लेकिन इसके प्रभाव तत्काल दिखने लगे हैं। कम शुल्क का मतलब यह है कि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अपेक्षाकृत कम लागत पर पहुंच सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारत को अपने पड़ोसी देशों की तुलना में कुछ हद तक बढ़त देता है, जहां समान श्रेणी के उत्पादों पर शुल्क अपेक्षाकृत अधिक है। यही कारण है कि विदेशी संस्थागत निवेशक, जो लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे थे, अब दोबारा निवेश पर विचार कर सकते हैं।

    RBI की भूमिका पर नजर

    हालांकि रुपये की इस मजबूती के बीच बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली रणनीति पर भी टिकी हुई है। जानकारों का कहना है कि यदि रुपये में तेजी बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक को डॉलर खरीदकर बाजार में संतुलन बनाए रखना पड़ सकता है, ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।

    आने वाले दिनों में RBI के कदम यह तय करेंगे कि रुपये की मजबूती कितनी टिकाऊ साबित होती है। फिलहाल, बाजार सहभागियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।

    डॉलर कमजोर, कच्चा तेल भी नीचे

    वैश्विक स्तर पर डॉलर की स्थिति भी रुपये के पक्ष में रही। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, शुरुआती कारोबार में लगभग 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 97.43 के स्तर पर देखा गया। कमजोर डॉलर ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को सहारा दिया।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की नरमी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में करीब 0.4 प्रतिशत गिरकर 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में नरमी भी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है।

    शेयर बाजार में भी सकारात्मक असर

    रुपये की मजबूती और व्यापार समझौते के सकारात्मक संकेतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स दो हजार अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 83,800 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 600 अंकों से ज्यादा चढ़कर 25,695 के आसपास कारोबार करता नजर आया।

    हालांकि, बाजार के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि एक दिन पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 1,800 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके बावजूद, निवेशकों को उम्मीद है कि नए व्यापार समझौते के बाद विदेशी पूंजी का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

    आगे की दिशा

    विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की मौजूदा मजबूती मुख्य रूप से भावनात्मक और नीतिगत संकेतों से जुड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह रुझान जारी रहता है या नहीं। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों की नई दिशा, वैश्विक ब्याज दरों का रुख और कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    फिलहाल, बाजारों ने इस समझौते को सकारात्मक रूप में लिया है और इसका सीधा लाभ भारतीय मुद्रा और शेयर बाजार दोनों को मिलता दिख रहा है। यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो रुपये को आगे भी मजबूती का सहारा मिल सकता है।

     
     
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