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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से शेयर बाजार में जोरदार तेजी, रिलायंस और निर्यात क्षेत्र चमके

    10 hours ago

    भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते के बाद मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निवेशकों के भरोसे में सुधार और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होने के संकेतों के बीच प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब पहुंच गए। शुरुआती कारोबार में बाजार में आई इस तेजी को बीते पांच वर्षों की सबसे बड़ी इंट्रा-डे छलांग के रूप में देखा जा रहा है।

    सुबह के सत्र में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 करीब तीन प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,800 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि बीएसई सेंसेक्स भी लगभग इतने ही प्रतिशत उछलकर 84,000 के करीब पहुंच गया। बाजार खुलते ही खरीदारी का जोर देखने को मिला, जिससे सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में चले गए।

    रिलायंस और निर्यात आधारित शेयरों में मजबूत उछाल

    इस तेजी का नेतृत्व रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किया, जो दोनों प्रमुख सूचकांकों में सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा। कंपनी के शेयरों में करीब चार प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, परिधान, सीफूड, इंजीनियरिंग गुड्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने लंबे समय से बने एक बड़े अनिश्चितता के बादल को हटा दिया है, जिसका असर सीधे तौर पर निर्यात-उन्मुख कंपनियों की आय संभावनाओं पर पड़ता है।

    सभी सेक्टरों में बढ़त, मिडकैप और स्मॉलकैप भी मजबूत

    कारोबार के शुरुआती घंटों में बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में बढ़त दर्ज की गई। न केवल बड़े शेयरों में, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी लगभग तीन प्रतिशत तक की तेजी देखी गई। निफ्टी 50 के 50 में से 46 शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जो बाजार की व्यापक सकारात्मक धारणा को दर्शाता है।

    विश्लेषकों के अनुसार, यह तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार में व्यापक आधार पर खरीदारी देखने को मिली।

    रुपये में मजबूती, विदेशी निवेश की उम्मीद

    शेयर बाजार की तेजी के साथ-साथ भारतीय रुपये में भी मजबूती आई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक प्रतिशत से अधिक मजबूत होकर 90.34 के स्तर तक पहुंच गया। माना जा रहा है कि व्यापार समझौते के बाद विदेशी निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और भारत में पूंजी प्रवाह बढ़ने की संभावना है।

    पिछले एक साल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 23 अरब डॉलर के शेयरों की बिक्री की थी, जिससे भारतीय बाजार एशियाई और अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा था।

    व्यापार समझौते के प्रमुख संकेत

    इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में बड़ी कटौती की गई है। बदले में भारत ने कुछ रणनीतिक और व्यापारिक कदम उठाने पर सहमति जताई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस समझौते के सभी ब्योरे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

    बाजार जानकारों का कहना है कि शुल्क में कटौती से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी, जिससे आने वाले समय में उनकी आय और मुनाफे की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

    निवेशकों का भरोसा और वैल्यूएशन में सुधार की उम्मीद

    एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म के रिसर्च प्रमुख के अनुसार, यह व्यापार समझौता शेयर बाजार के लिए कई मायनों में सकारात्मक है। इससे न केवल कंपनियों की कमाई को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी, बल्कि खासतौर पर निर्यात और पूंजीगत खर्च से जुड़े क्षेत्रों में वैल्यूएशन में सुधार की संभावना बनेगी। साथ ही, उभरते बाजारों के बीच भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे व्यापार समझौते में देरी, नई तकनीकी थीम्स में सीमित हिस्सेदारी और कमजोर तिमाही नतीजे जैसे कारण रहे हैं। मौजूदा समझौता इन चिंताओं को काफी हद तक कम कर सकता है।

    आगे की राह

    हालांकि बाजार की मौजूदा तेजी ने निवेशकों को राहत दी है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल तय करेंगे। इसके बावजूद, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी सकारात्मक धारणा ने फिलहाल बाजार का रुख मजबूती की ओर मोड़ दिया है।

    निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि क्या यह तेजी टिकाऊ साबित होती है और क्या विदेशी निवेश वाकई भारतीय बाजार में वापस लौटता है। फिलहाल, बाजार ने साफ संकेत दिया है कि किसी बड़े वैश्विक समझौते का भरोसे पर कितना गहरा असर पड़ सकता है।

     
     
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