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    ग्रेटर नोएडा बस हादसा: जलने की गंध के बावजूद चालक ने बस नहीं रोकी, FIR में बीड़ी पीने का भी आरोप

    52 minutes ago

    Yugcharan News / 24-09-2026

    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस हादसे को लेकर दर्ज एफआईआर में चालक और परिचालक की कथित लापरवाही से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में बुधवार देर रात आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसा जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ। पुलिस के अनुसार, आग लगने के बाद बस पूरी तरह आग की चपेट में आ गई और कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

    एफआईआर एक यात्री की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बस में जलने की गंध आने के बाद यात्रियों ने चालक को वाहन रोकने के लिए कहा था, लेकिन चालक और परिचालक ने कथित तौर पर उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, चालक ने यात्रियों से कथित तौर पर कहा कि अगर उन्हें मरना है तो मर जाएं, लेकिन बस नहीं रोकी जाएगी।

    यह आरोप अभी एफआईआर और शिकायतकर्ता के बयान का हिस्सा हैं। पुलिस की जांच में इन दावों की पुष्टि होना बाकी है।

    दिल्ली से महोबा जा रही थी बस

    पुलिस के अनुसार, बिहार नंबर वाली यह स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी। हादसा बुधवार रात करीब 11 बजे जेवर इलाके में दयानतपुर गांव के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ। बस में करीब 35 यात्री सवार थे।

    एक यात्री सुनील कुमार, जो हमीरपुर जिले के रहने वाले हैं, की शिकायत के आधार पर जेवर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत के अनुसार, वह बुधवार रात करीब 9 बजे कश्मीरी गेट से राज कल्पना ट्रैवल्स की बस में सवार हुए थे।

    यात्रा के दौरान जब बस यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 33 किलोमीटर के निशान के पास पहुंची, तब यात्रियों को चालक के केबिन की ओर से जलने की गंध महसूस हुई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यात्रियों ने चालक को इसकी जानकारी दी और बस रोकने के लिए कहा।

    यात्रियों की चेतावनी को नजरअंदाज करने का आरोप

    एफआईआर में सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि चालक ने जलने की गंध को सामान्य बात बताकर बस रोकने से इनकार कर दिया। शिकायत के अनुसार, चालक और परिचालक वाहन के केबिन में बीड़ी और सिगरेट पी रहे थे।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ ही देर बाद चालक की सीट के पास अचानक आग की लपटें दिखाई देने लगीं। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और उन्होंने चालक से बस रोकने की मांग की।

    एफआईआर के मुताबिक, इसी दौरान चालक और परिचालक ने कथित तौर पर यात्रियों से कहा कि वे बस नहीं रोकेंगे और अगर किसी को मरना है तो मर जाए।

    हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस हादसे के कारणों और बस के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    आग तेजी से पूरी बस में फैली

    पुलिस के अनुसार, जब तक बस को रोका गया, तब तक आग तेजी से फैल चुकी थी। बस के अंदर धुआं भर गया था और यात्रियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

    सुनील कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि वह और कुछ अन्य यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलने में सफल रहे। वहीं, कुछ यात्री बस के अंदर ही फंस गए। आग की चपेट में आने से कई लोग घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए जेवर स्थित कैलाश अस्पताल ले जाया गया।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो चुकी है। मृतकों में एक महिला भी शामिल है।

    हादसे के बाद बस पूरी तरह जल गई। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और दमकल टीमों ने आग पर काबू पाया। चालक और परिचालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गए थे।

    बस के AC में स्पार्क या धमाके का पुलिस का दावा

    ग्रेटर नोएडा पुलिस ने प्रारंभिक जानकारी में बताया कि बस में आग एसी में हुए स्पार्क या धमाके के बाद लगी हो सकती है। पुलिस के मुताबिक, एसी से उत्पन्न आग ने इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल को चपेट में ले लिया और इसके बाद आग तेजी से फैल गई।

    जेवर थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह के हवाले से बताया गया कि कुछ यात्रियों ने बस में जलने की हल्की गंध महसूस होने और चालक को बस रोकने के लिए कहे जाने की जानकारी दी थी।

    पुलिस के अनुसार, चालक ने जब तक बस रोकी, तब तक आग काफी तेजी से फैल चुकी थी। करीब 35 यात्री बस में सवार थे और नौ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके।

    आग लगने के सटीक कारणों की जांच अभी जारी है। पुलिस की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बस की तकनीकी स्थिति कैसी थी, आग किस हिस्से से शुरू हुई और यात्रियों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय या सुविधा क्यों नहीं मिल सकी।

    चालक और परिचालक के खिलाफ कार्रवाई

    हादसे के बाद चालक और परिचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू कर दी थी। हादसे के संबंध में चालक और परिचालक पर यात्रियों की सुरक्षा की कथित अनदेखी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    एफआईआर में शिकायतकर्ता ने चालक और परिचालक के व्यवहार को कथित तौर पर गंभीर लापरवाही, जल्दबाजी और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बताया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले सबूतों और अन्य यात्रियों के बयान भी दर्ज कर सकती है।

    मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान पुलिस को चालक और परिचालक की भूमिका के बारे में क्या साक्ष्य मिलते हैं। एफआईआर में दर्ज आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं हैं।

    हादसे ने स्लीपर बसों की सुरक्षा पर फिर उठाए सवाल

    ग्रेटर नोएडा का यह हादसा लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्री सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करता है। ऐसी बसों में कई यात्री रात के समय सो रहे होते हैं। आग जैसी आपात स्थिति में यात्रियों को तुरंत बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

    इस घटना में भी आग फैलने के बाद बस के भीतर धुआं भरने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में यात्रियों के लिए आपातकालीन निकास तक पहुंचना और बस से बाहर निकलना कठिन हो सकता है।

    हालांकि, इस विशेष मामले में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि बस में आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, आपातकालीन निकास काम कर रहे थे या नहीं और वाहन का फिटनेस तथा रखरखाव रिकॉर्ड क्या था।

    हादसे की जांच जारी

    यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे में नौ लोगों की मौत के बाद पुलिस ने घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में सामने आए आरोपों के अलावा पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य यात्रियों के बयान भी दर्ज कर सकती है।

    जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि बस में आग वास्तव में किस वजह से लगी और आग लगने के बाद चालक ने वाहन को रोकने में कितना समय लिया। इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच करेगी कि चालक और परिचालक ने यात्रियों की चेतावनियों पर क्या प्रतिक्रिया दी थी।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दिल्ली से महोबा जा रही बस में देर रात आग लगने के बाद नौ यात्रियों की जान चली गई। एफआईआर में चालक और परिचालक पर यात्रियों की चेतावनियों को नजरअंदाज करने तथा बस को समय रहते नहीं रोकने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच के परिणाम और घटनास्थल से जुटाए गए तकनीकी साक्ष्य आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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