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    ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर में निकली लोकमंथन यात्रा, लोक संस्कृति के विविध रंगों से सजा महारानी कॉलेज

    1 hour ago

    5000 से अधिक लोगों की उपस्थिति व 3500 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थियों ने लिया भाग

    जयपुर । लोकमंथन–2026 के अंतर्गत ‘लोकमंथन यात्रा—जयपुर महानगर’ का शुभारंभ आज श्री गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन के पश्चात जलेबी चौक से हुआ। लोकमंथन–2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष एवं राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने यात्रा रथ को रवाना किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नागरिकों, प्रबुद्धजनों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

    यात्रा में शाही लवाजमे, लोक वाद्य, पारंपरिक परिधान, अखाड़ों के खिलाड़ी, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तथा विभिन्न लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा मार्ग में रंगोलियां सजाई गईं तथा अनेक स्थानों पर व्यापार मंडलों और समाजजनों द्वारा पुष्पवर्षा की गई। क्रीड़ा भारती के खिलाड़ियों ने चलते मार्ग में साइकिलिंग, स्केटिंग, फुटबॉल, कबड्डी, सतोलिया आदि खेल गतिविधियों के माध्यम से लोकमंथन के संदेश को जीवंत बनाया। पूरे यात्रा में 1500 खिलाड़ी व नागरिक सहभागी हुए।

    यात्रा हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज पहुँची। महारानी कॉलेज में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में लगभग 5000 से अधिक लोगों की सहभागिता रही। इनमें 3500 से अधिक महाविद्यालयीन विद्यार्थी शामिल रहे। विशेष रूप से बड़ी संख्या में छात्राओं और युवा पीढ़ी की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।

    महारानी कॉलेज परिसर में लोकमंथन के विभिन्न आयामों को अलग-अलग मंचों और प्रदर्शनी स्थलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। मुख्य सभागार में ‘धरती धोरा री’ नृत्य, चरी नृत्य, मांड गायन, भवई, कच्छी घोड़ी, कठपुतली नृत्य, कालबेलिया नृत्य, मलखम्ब प्रदर्शन, संस्कृत लोकगीत एवं लोकनृत्य सहित अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। ‘लोक में भारत’ तथा ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ जैसे विषयों पर व्याख्यान हुए। साथ ही ‘स्वतंत्रता समर में राजस्थान के लोक नायक’ विषय पर नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की गई।

    लोक आस्था और लोक चेतना को दर्शाने के लिए बाबा रामदेव जी एवं वीर तेजाजी से संबंधित झांकियां और मंदिर परंपरा की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इनके माध्यम से राजस्थान की लोक आस्था, लोक नायकों और समाज जीवन में उनकी भूमिका को सामने रखा गया।

    लोक से लेकर संविधान तक—विचार और संवाद

    कार्यक्रम में लोक जीवन के विविध पक्षों पर संवाद की श्रृंखला भी आयोजित की गई। सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, ‘लोक परम्पराएँ’ विषय पर लोक संवाद तथा ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी आयोजित हुई।

    खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू कला, लोक रंग—लोक कथा, लोक कविता, लोक कहानी और लोक स्मृतियां, तथा ‘हम भारत के लोग : संविधान और लोक संस्कृति का समन्वय’ विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई। इसके साथ ही इतिहास लेखन की लोक परंपरा और वंशावली वाचन ने राजस्थान की मौखिक एवं लोक इतिहास परंपरा को सामने रखा।

    प्रदर्शनियों में दिखी भारत की ज्ञान और लोक परंपरा

    महारानी कॉलेज के प्रदर्शनी क्षेत्र में संत रविदास जी, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं, भारतीय संविधान, गुरुकुल परंपरा, लोक विज्ञान तथा औषधीय पौधों के वैज्ञानिक महत्व से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई गईं। साहित्य केंद्र और स्व-चित्र केंद्र भी बनाए गए।

    परंपरागत खेलों के क्षेत्र में कबड्डी, रस्साकशी, महिलाओं के पारंपरिक खेल, तीरंदाजी, थड़ा और साफा प्रतियोगिता आयोजित की गईं। वहीं लोक व्यंजन क्षेत्र में राजस्थान की पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जुड़े विभिन्न व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया।

    लोकमंथन यात्रा और महारानी कॉलेज के कार्यक्रमों ने लोक कला, लोक साहित्य, लोक भाषा, लोक आस्था, लोक इतिहास, पारंपरिक खेल, पर्यावरणीय दृष्टि, संविधान और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को एक ही मंच पर जोड़ते हुए ‘हम भारत के लोग’ की भावना को अभिव्यक्त किया।

     

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