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    ईयू ने टिकटॉक पर ‘आदत डालने वाले डिज़ाइन’ का आरोप लगाया, उपयोगकर्ता सुरक्षा के लिए बदलाव की मांग

    1 month ago

    यूरोपीय संघ (ईयू) ने लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर अपने डिजिटल नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐप का मौजूदा डिज़ाइन उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों और संवेदनशील वर्गों, में अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। यूरोपीय आयोग ने अपनी प्रारंभिक जांच में दावा किया है कि टिकटॉक के कुछ फीचर ऐसे बनाए गए हैं जो लोगों को लगातार स्क्रीन पर बनाए रखते हैं और इससे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    ईयू के कार्यकारी निकाय और डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट (DSA) को लागू करने वाले यूरोपीय आयोग के अनुसार, टिकटॉक में ऑटोप्ले, अनंत स्क्रॉल और अत्यधिक वैयक्तिकृत कंटेंट सिफारिश प्रणाली जैसे फीचर “आदत डालने वाला व्यवहार” पैदा करते हैं। आयोग का कहना है कि प्लेटफॉर्म ने यह आकलन करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए कि ये फीचर उपयोगकर्ताओं, खासकर नाबालिगों, को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।

    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि टिकटॉक को अपनी सेवा के “मूलभूत डिज़ाइन” में बदलाव करने की आवश्यकता है। डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों पर यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाएं और उपयोगकर्ताओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए ठोस उपाय करें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कंपनियों पर उनके वैश्विक वार्षिक कारोबार का छह प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

    यूरोपीय आयोग की टेक संप्रभुता, सुरक्षा और लोकतंत्र से जुड़ी कार्यकारी उपाध्यक्ष हेना विरकुनेन ने कहा कि सोशल मीडिया की लत बच्चों और किशोरों के विकासशील मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उनके अनुसार, यूरोप में कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि ऑनलाइन वातावरण में नागरिकों, विशेषकर बच्चों, की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    जांच में यह भी कहा गया है कि टिकटॉक का डिज़ाइन उपयोगकर्ताओं को लगातार नए वीडियो दिखाकर उन्हें स्क्रॉल करते रहने के लिए प्रेरित करता है, जिससे आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ता है। आयोग का आरोप है कि ऐप इस बात के संकेतों को भी नजरअंदाज करता है कि कोई उपयोगकर्ता अत्यधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, जैसे कि नाबालिगों का देर रात तक ऐप का उपयोग करना या बार-बार ऐप खोलना।

    आयोग के अनुसार, टिकटॉक द्वारा लागू किए गए समय प्रबंधन और स्क्रीन कंट्रोल से जुड़े मौजूदा फीचर आसानी से नजरअंदाज किए जा सकते हैं और उनमें प्रभावी रुकावट (फ्रिक्शन) की कमी है। वहीं, पैरेंटल कंट्रोल टूल्स को उपयोग में लाने के लिए माता-पिता को अतिरिक्त समय और तकनीकी समझ की जरूरत पड़ती है, जिससे उनकी प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।

    इन निष्कर्षों के आधार पर यूरोपीय आयोग ने टिकटॉक से कई बदलावों पर विचार करने को कहा है। इनमें अनंत स्क्रॉल जैसे फीचर को बंद करना, रात के समय और लंबे उपयोग के दौरान अधिक प्रभावी ब्रेक और चेतावनियां लागू करना, तथा कंटेंट सिफारिश प्रणाली में बदलाव करना शामिल है ताकि उपयोगकर्ताओं को बिना रुके वीडियो देखने के चक्र से बाहर निकलने का अवसर मिल सके।

    हालांकि, टिकटॉक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि आयोग के प्रारंभिक निष्कर्ष प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली की “गलत और निराधार” तस्वीर पेश करते हैं। टिकटॉक का कहना है कि वह इन निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी और संस्थागत विकल्पों का उपयोग करेगा।

    कंपनी के अनुसार, टिकटॉक पहले से ही कई ऐसे टूल उपलब्ध कराता है जो उपयोगकर्ताओं को अपने समय के उपयोग को लेकर सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करते हैं। इनमें कस्टम स्क्रीन टाइम लिमिट, स्लीप रिमाइंडर और अन्य नियंत्रण शामिल हैं। टिकटॉक का दावा है कि ये फीचर उपयोगकर्ताओं और अभिभावकों को प्लेटफॉर्म के उपयोग पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करते हैं।

    अब टिकटॉक को आयोग के निष्कर्षों पर औपचारिक रूप से जवाब देने का अवसर मिलेगा। इसके बाद यदि ईयू को संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो गैर-अनुपालन का निर्णय लिया जा सकता है, जिससे भारी आर्थिक दंड का रास्ता खुल सकता है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं में बढ़ती लत को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा चुका है, जबकि स्पेन, फ्रांस और डेनमार्क जैसे देश भी इसी तरह के कदमों पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका में भी हाल ही में सोशल मीडिया की लत से जुड़े एक बड़े मुकदमे में टिकटॉक ने समझौता किया है, जबकि अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ की यह कार्रवाई वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक अहम संकेत है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि टिकटॉक इन मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डिज़ाइन और उपयोगकर्ता सुरक्षा को लेकर नए मानक तय करता है।

     
     
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