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    जयपुर के विद्वान् प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय का शतक-काव्य ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ अमृतग्रन्थ माला में प्रकाशित 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन के समापन समारोह में हुआ पुस्तक का लोकार्पण

    6 minutes ago

    हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन (AIOC) में जयपुर निवासी मूर्धन्य विद्वान् प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय द्वारा विरचित शतक-काव्य ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ का लोकार्पण किया गया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा इस काव्यग्रन्थ को अमृतग्रन्थ माला 2026 के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है। सम्मेलन के समापन समारोह में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों की उपस्थिति में पुस्तक का लोकार्पण हुआ।

    लोकार्पण समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, पतंजलि विश्वविद्यालय की प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामकान्त पाण्डेय, उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, वीरनारायण पांडुरंगी, AIOC की सचिव प्रो. कविता होल्ले तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रकाशन निदेशक प्रो. काशीनाथ न्योपाने सहित अनेक विद्वान् उपस्थित रहे।

    छह खण्डों में 109 श्लोकों की काव्यरचना

    ‘केलिशून्यशार्दूलम्’ शार्दूलविक्रीडित छन्द में विरचित विशिष्ट शतक-काव्य है। इसमें अध्यात्म, भक्ति, शृंगार, राष्ट्र, केलि एवं कारुण्य—इन छह खण्डों में कुल 109 श्लोक शार्दुल छंद में विरचित हैं। काव्य की विशेषता यह है कि इसके 106 श्लोक ‘शून्य’ शब्द से प्रारम्भ होते हैं। छन्द, शब्द-प्रयोग और विषय-विविधता के माध्यम से रचनाकार ने संस्कृत काव्य परम्परा में अपनी विशिष्ट साहित्यिक दृष्टि प्रस्तुत की है।

    प्रो. ताराशंकर शर्मा पाण्डेय की यह कृति संस्कृत साहित्य की समृद्ध काव्यपरम्परा को आगे बढ़ाने वाली उल्लेखनीय रचना है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की अमृतग्रन्थ माला में इसका प्रकाशन संस्कृत वाङ्मय के संरक्षण, संवर्धन एवं विद्वानों की मौलिक रचनाओं को प्रकाश में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रो पाण्डेय साहित्य अकादमी  दिल्ली से संस्कृत अनुवाद से पुरस्कृत हैं।

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