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    झारखंड के सारंडा जंगल में बड़ा ऑपरेशन: 1 करोड़ के इनामी अनल दा समेत 15 माओवादी ढेर

    3 months ago

    झारखंड के उग्रवाद प्रभावित इलाक़ों में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सारंडा वन में गुरुवार को हुए भीषण मुठभेड़ में कुख्यात माओवादी नेता अनल दा समेत कम से कम 15 माओवादी मारे गए। अनल दा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और वह माओवादी संगठन का बेहद अहम रणनीतिक चेहरा माना जाता था।

    यह मुठभेड़ झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के छोटानागरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुंभडीह गांव के पास हुई, जहाँ लंबे समय से माओवादी गतिविधियों की सूचना मिल रही थी।

     

    कैसे शुरू हुई मुठभेड़

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने गुरुवार तड़के संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। जंगल के भीतर घात लगाए बैठे माओवादियों ने अचानक सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

    इसके जवाब में जवानों ने मोर्चा संभाला और इलाके को चारों तरफ़ से घेर लिया। कई घंटों तक चली भारी गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को बढ़त मिली और माओवादी पीछे हटने लगे। इसी दौरान अनल दा समेत कई शीर्ष माओवादी ढेर कर दिए गए।

    झारखंड पुलिस के अभियान महानिरीक्षक माइकलराज एस. ने पुष्टि की कि मारे गए माओवादियों में अनल दा शामिल है और क्षेत्र में अब भी सघन तलाशी अभियान जारी है।

     

    कौन था अनल दा, जिससे कांपते थे माओवादी इलाक़े

    अनल दा, जिसका असली नाम पतिराम मांझी बताया जाता है, झारखंड के गिरिडीह ज़िले का रहने वाला था। वह पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ था और संगठन के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिना जाता था।

    उसका प्रभाव गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, खूंटी, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम जैसे कई ज़िलों तक फैला हुआ था। ख़ासकर सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को मज़बूत करने में उसकी भूमिका अहम मानी जाती थी।

     

    दर्जनों संगीन मामलों में था वांछित

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनल दा पर सुरक्षा बलों पर हमले, विस्फोटक उपकरणों के धमाके, ठेकेदारों से रंगदारी वसूली और जान से मारने की धमकियों समेत दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे।

    इन्हीं गतिविधियों के चलते उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था, जो उसे झारखंड के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल करता था।

     

    सारंडा ऑपरेशन क्यों है इतना अहम

    सारंडा वन क्षेत्र लंबे समय से माओवादियों का मज़बूत गढ़ माना जाता रहा है। घने जंगल, दुर्गम इलाक़ा और सीमित पहुंच के कारण यह इलाक़ा माओवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ था।

    अनल दा के मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी ढांचे के लिए बड़ा झटका मान रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे इलाके में संगठन की रणनीतिक क्षमता और नेतृत्व दोनों को गंभीर नुकसान पहुँचेगा।

     

    आगे क्या?

    हालांकि सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन ऑपरेशन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जंगल में छिपे अन्य माओवादियों की तलाश जारी है और पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।

    यह मुठभेड़ साफ संकेत देती है कि झारखंड में माओवादी गतिविधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। आने वाले दिनों में इसका असर सिर्फ़ सुरक्षा हालात पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर भी देखने को मिल सकता है।

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