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    कुंभ 2025 के दौरान राम मंदिर दान राशि में सबसे बड़ी गड़बड़ी का आरोप, जांच में दो रिश्तेदारों की भूमिका पर सबसे अधिक सवाल

    4 hours ago

    युगचरण न्यूज़ / 01 जुलाई 2026

    अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की अब तक की पड़ताल में यह संकेत मिले हैं कि वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान का कथित रूप से सबसे अधिक दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी अवधि में दान राशि में भारी वृद्धि का फायदा उठाकर एक संगठित तरीके से कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

    पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही हैं। साथ ही अन्य सरकारी एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है ताकि कथित धन के प्रवाह का पूरा विवरण सामने लाया जा सके।

    कुंभ के दौरान बढ़े दान का कथित रूप से उठाया गया लाभ

    एसआईटी की जांच के अनुसार, महाकुंभ के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई थी। इसके चलते मंदिर में दान की मात्रा भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक थी।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि इसी भीड़ और दान की अधिकता का कथित रूप से फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से दान राशि में अनियमितता की। पुलिस का दावा है कि इस कथित षड्यंत्र में शामिल सभी आरोपियों की भूमिकाओं की अलग-अलग जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ा जा रहा है।

    दो रिश्तेदारों की भूमिका पर सबसे अधिक फोकस

    जांच के दौरान पुलिस का ध्यान विशेष रूप से दो रिश्तेदारों पर केंद्रित है, जिन पर कथित रूप से सबसे अधिक धन निकालने का आरोप है।

    अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कथित तौर पर प्राप्त धन का उपयोग अचल संपत्तियां खरीदने में भी किया गया। पुलिस ने ऐसी कई संपत्तियों का पता लगाया है जिनकी खरीद-फरोख्त की जांच की जा रही है।

    इन संपत्तियों के वित्तीय स्रोत, भुगतान के तरीके और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका संबंध कथित अनियमितताओं से है या नहीं।

    आयकर विभाग और प्रवर्तन एजेंसियों की भी ली जाएगी मदद

    मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या पुलिस वित्तीय जांच को और व्यापक बनाने की तैयारी में है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों, आय के स्रोत, निवेश और संपत्तियों का विश्लेषण करने के लिए आयकर विभाग की सहायता ली जा रही है। इसके अलावा धन के संभावित प्रवाह की विस्तृत जांच के लिए प्रवर्तन एजेंसियों से भी सहयोग मांगा जा सकता है।

    जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित धन किन-किन खातों और माध्यमों से स्थानांतरित हुआ तथा उसका अंतिम उपयोग कहां किया गया।

    बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

    जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका भी पुलिस के संज्ञान में आई है।

    मंदिर में दान पेटियों से प्राप्त नकदी की गणना अधिकृत बैंक की देखरेख में होती है। इसके लिए बैंक द्वारा नियुक्त कर्मचारियों और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम नकदी की गिनती करती है।

    पुलिस अब इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है कि कहीं गिनती, रिकॉर्डिंग या नकदी के सुरक्षित रखरखाव के दौरान किसी स्तर पर अनियमितता तो नहीं हुई।

    यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    छापेमारी में नकदी और दस्तावेज बरामद

    जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

    अधिकारियों के अनुसार, एक स्थान से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई, जिसे कथित रूप से अलग-अलग बक्सों में छिपाकर रखा गया था। तलाशी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजात भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

    इन सभी दस्तावेजों का मिलान बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से किया जा रहा है।

    आय से अधिक लेन-देन की जांच

    पुलिस द्वारा आरोपियों के बैंक खातों की विस्तृत जांच में कई ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं जो उनकी घोषित आय की तुलना में काफी अधिक बताए जा रहे हैं।

    अधिकारियों ने पिछले एक वर्ष के बैंक रिकॉर्ड, नकद जमा, निकासी और अन्य आर्थिक गतिविधियों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन खातों में जमा हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ नकदी पहले ही बरामद कर संबंधित संस्थान को वापस सौंप दी गई थी। हालांकि पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।

    मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

    राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दान राशि से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का मामला केवल आर्थिक नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता और मजबूत निगरानी व्यवस्था जनविश्वास बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस मामले की निष्पक्ष जांच भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    निष्कर्ष

    राम मंदिर दान राशि से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। एसआईटी, स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, संपत्तियों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही हैं।

     

    अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि विभिन्न पहलुओं की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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