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    मनरेगा खत्म करने के फैसले के खिलाफ राजस्थान में मजदूरों का संघर्ष शुरू

    1 hour ago

    मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण भारत पर हमला है - निखिल डे

    काम मांगो अभियान" की राज्यव्यापी शुरुआत, गांव-गांव से उठी रोजगार अधिकार बचाने की आवाज

    VB-GRAMG कानून वापस लो, मनरेगा को मजबूत करो, मजदूरों ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन

    जयपुर,

    मनरेगा को समाप्त कर उसके स्थान पर VB-GRAMG लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ राजस्थान के ग्रामीण मजदूरों ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, राजस्थान के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश में "काम मांगो अभियान"** की शुरुआत की गई। राज्य के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों में हजारों मजदूरों, महिलाओं, ग्रामीण परिवारों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे और साफ संदेश दिया कि "रोजगार का अधिकार छीना नहीं जा सकता, मनरेगा को खत्म नहीं होने देंगे।"

    प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों में मजदूरों ने मांग की कि VB-GRAMG कानून को तत्काल वापस लिया जाए और मनरेगा को पहले से अधिक मजबूत बनाया जाए। आज भीलवाड़ा, पाली, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, डूंगरपुर सहित अनेक जिलों में मजदूरों ने प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए।

    देवगढ़ की ग्राम पंचायत लसानी, भीम की बरजाल और कूकरखेड़ा, डूंगरपुर जिले की बीछीवाड़ा, दोगड़ा, पीपल्दा, घुघरा, ओड़ाबड़ा, करोली, बलवाड़ा, मंडवा, मालमाता, मेवाड़ा, पादरड़ी, श्रम, डेडली, समिसा, जलाना दमोथ, ब्यावर जिले के बदनोर ब्लॉक की बदनोर, छतरपुरा, गिरधरपुरा, मोगर, भादसी, रतनपुरा, जवाजा क्षेत्र की बामनहेड़ा, आसान, रावतामाल, कोटड़ा, सातूखेड़ा, सुवा, कालिंजर, सूरजपुरा, काबरा, भीलवाड़ा जिले की करेड़ा पंचायत समिति की थाना, शिवपुर, नारेली, ज्ञानगढ़, धम्मोत्तर ब्लॉक की डीकनिया, बराबर्दा, मदुरातलाई, जैतारण ब्लॉक सहित अनेक पंचायतों में मजदूरों ने ज्ञापन देकर रोजगार के अपने अधिकार की रक्षा की मांग उठाई।

    काम मांगो अभियान" मजदूरों ने कहा, काम हमारा अधिकार है।

    आज से शुरू हुए "काम मांगो अभियान" के तहत ग्रामीण मजदूरों ने ग्राम पंचायतों और प्रशासन के सामने रोजगार की मांग के आवेदन प्रस्तुत किए।

    अभियान से जुड़े कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचे और मजदूरों को बताया कि काम मांगना उनका कानूनी अधिकार है और रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है।

    अभियान का उद्देश्य केवल आवेदन देना नहीं, बल्कि गांव-गांव में मजदूरों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी तैयार करना है।

    मजदूरों ने कहा कि हमने संघर्ष करके मनरेगा का अधिकार हासिल किया है। इसे किसी नए नाम या नई व्यवस्था के जरिए कमजोर नहीं होने देंगे।"

    मनरेगा कानून के लिए हुए ऐतिहासिक आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले और सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक निखिल डे ने कहा मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के संघर्षों से हासिल किया गया अधिकार है। इस कानून ने सूखे, आर्थिक संकट, कोरोना महामारी और बेरोजगारी के कठिन दौर में ग्रामीण परिवारों को सहारा दिया।" उन्होंने कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता दी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी और पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने का अवसर दिया।" उन्होंने आगे कहा कि VB-GRAMG के माध्यम से रोजगार गारंटी की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। पहले मजदूर पूरे साल काम मांग सकते थे, लेकिन नई व्यवस्था रोजगार के अधिकार को सीमित करने वाली है। 125 दिन रोजगार देने का दावा केवल एक नारा बनकर रह जाएगा, क्योंकि मजबूत कानूनी गारंटी कमजोर हो जाएगी।

    राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की संयुक्त सचिव मधुलिका ने कहा मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए केवल मजदूरी का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का आधार है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप और वित्तीय व्यवस्था में किए जा रहे बदलाव मजदूरों के रोजगार अधिकार को कमजोर करने वाले हैं।" उन्होंने कहा राजस्थान जैसे राज्य में लाखों ग्रामीण परिवार आज भी मनरेगा पर निर्भर हैं। सरकार को अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय मनरेगा को मजबूत करना चाहिए। मजदूरों को समय पर काम, पूरी मजदूरी और काम मांगने के अधिकार की गारंटी मिलनी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को अपने गांव में रोजगार और आर्थिक मजबूती दी है। इस कानून को कमजोर करने का सबसे अधिक असर गरीब परिवारों, महिलाओं, दलितों और आदिवासी समुदायों पर पड़ेगा। मजदूर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे।"

    गांवों से उठी आवाज रोजगार का अधिकार वापस नहीं होगा

    अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर तबकों को मजबूरी के पलायन और शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसानों के संघर्ष के सामने सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी प्रकार मजदूर भी अपने रोजगार अधिकार की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगे।

    मजदूरों की प्रमुख मांगें

    1. VB-GRAMG कानून को तत्काल वापस लिया जाए।

    2. मनरेगा को पूर्ण कानूनी गारंटी के साथ बहाल रखा जाए।

    3. हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 200 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाए।

    4. काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।

    5. सभी लंबित मजदूरी भुगतान तुरंत जारी किए जाएं।

    6. पंचायतों को योजना बनाने और काम चुनने के अधिकार वापस दिए जाएं।

    7. मनरेगा मजदूरी दर में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।

    8. महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के रोजगार अधिकार सुरक्षित किए जाएं।

    सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान, राजस्थान ने घोषणा की है कि "काम मांगो अभियान" अब गांव-गांव तक चलाया जाएगा। मजदूर अपने रोजगार के अधिकार, सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेंगे।

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