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    राम मंदिर दान घोटाला: शौचालय में छिपाई जाती थी नकदी, फिर छोटे-छोटे हिस्सों में बाहर निकाली जाती थी; जांच में नए खुलासे

    1 hour ago

    युगचरण न्यूज़ / 02 जुलाई 2026

    अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले की जांच कर रही पुलिस और विशेष जांच टीम (एसआईटी) को पूछताछ के दौरान ऐसे कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि कथित तौर पर दान की राशि को बेहद सुनियोजित तरीके से परिसर से बाहर निकाला जाता था। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कथित अनियमितता का दायरा कितना बड़ा था तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन दावों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक विश्लेषण, दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की जा रही है। अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।

    दान गिनती केंद्र की गतिविधियों पर विशेष नजर

    जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर दान गिनने वाले केंद्र की कार्यप्रणाली का पहले से गहराई से अध्ययन किया गया था। आरोप है कि संबंधित लोगों ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की आवाजाही, प्रवेश और निकास मार्ग तथा सुरक्षा व्यवस्था को समझने के बाद कथित योजना तैयार की।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, दान गिनती के दौरान निकाली गई नकदी को तुरंत बाहर ले जाने के बजाय पहले परिसर के भीतर सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से रखा जाता था। इसके बाद उसे अलग-अलग समय पर छोटी-छोटी मात्रा में बाहर ले जाया जाता था ताकि किसी को संदेह न हो।

    पुलिस अब इस पूरे कथित तंत्र को समझने के लिए मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों की गतिविधियों का पुनर्निर्माण कर रही है। साथ ही उन कर्मचारियों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है जो नियमित रूप से इन स्थानों पर कार्य करते थे।

    सीसीटीवी व्यवस्था की भी हो रही जांच

    जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं सुरक्षा कैमरों की निगरानी से बचने के लिए किसी प्रकार की रणनीति तो नहीं अपनाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध फुटेज का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित तौर पर किसी समय कैमरों की दृश्य सीमा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था या नहीं।

    फॉरेंसिक विशेषज्ञ डिजिटल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण कर रहे हैं। यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि होती है तो उसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की पड़ताल

    मामले में दान गिनती कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कक्ष तक पहुंच किस प्रकार नियंत्रित की जाती थी और वहां मौजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा था या नहीं।

    सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन सभी लोगों से पूछताछ कर रही हैं जिनकी जिम्मेदारी दान गिनती प्रक्रिया या उससे संबंधित व्यवस्थाओं से जुड़ी थी। यदि सुरक्षा प्रणाली में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की गहन जांच

    पुलिस अब मामले के वित्तीय पहलू पर भी विशेष ध्यान दे रही है। आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, अचल एवं चल संपत्तियों और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं कथित रूप से प्राप्त धनराशि का उपयोग जमीन, मकान, हॉस्टल या अन्य संपत्तियों में निवेश के लिए तो नहीं किया गया।

    विशेषज्ञ आय के ज्ञात स्रोतों और वर्तमान संपत्तियों का मिलान कर रहे हैं। यदि किसी प्रकार की असामान्य वित्तीय गतिविधि सामने आती है तो उसे जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा।

    कई स्थानों पर तलाशी अभियान

    जांच के क्रम में पुलिस ने कई आरोपियों के घरों और अन्य संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान नकदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा तथा अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी वैधानिक जांच की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री की वास्तविक प्रकृति और उसका इस मामले से संबंध वैज्ञानिक एवं कानूनी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    आठ आरोपी अब तक गिरफ्तार

    इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी आरोपियों से अलग-अलग चरणों में पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जा रहा है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा।

    एसआईटी को मिला अतिरिक्त समय

    मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अब एसआईटी को विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित नई समयसीमा के भीतर सरकार को सौंपनी होगी।

    जांच दल पिछले कई दिनों से दस्तावेजों की जांच, वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर रहा है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

    अयोध्या का श्रीराम मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दान प्रबंधन व्यवस्था से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का मामला केवल वित्तीय जांच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच भविष्य में धार्मिक संस्थानों की वित्तीय व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक हो सकती है।

    आगे क्या?

    फिलहाल पुलिस, एसआईटी और अन्य संबंधित एजेंसियां फॉरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और पूछताछ से प्राप्त जानकारियों को एक साथ जोड़कर पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हैं। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

     
     
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