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    मिनेसोटा में आव्रजन कार्रवाई पर ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न, भारी विरोध के बाद अभियान समाप्त

    1 month ago

    मिनेसोटा में आव्रजन कार्रवाई पर ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न, भारी विरोध के बाद अभियान समाप्त

    YUGCHARAN NEWS | 13 फ़रवरी 2026

    अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मिनेसोटा राज्य में चलाए जा रहे आक्रामक आव्रजन अभियान को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब इस अभियान के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, दो अमेरिकी नागरिकों की मौत हुई और राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में तेज़ गिरावट दर्ज की गई।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे ‘बॉर्डर ज़ार’ टॉम होमन ने मिनियापोलिस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि मिनेसोटा में चल रही यह विशेष कार्रवाई अब समाप्त की जा रही है और बड़ी संख्या में तैनात संघीय एजेंटों को वापस उनके मूल स्थानों पर भेजा जाएगा।


    क्या था मिनेसोटा का आव्रजन अभियान

    पिछले कई हफ्तों से मिनेसोटा में अमेरिकी संघीय एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर छापेमारी और गिरफ्तारियां की जा रही थीं। इस अभियान में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के अधिकारियों सहित हज़ारों संघीय एजेंट शामिल थे। ट्रंप प्रशासन का दावा था कि यह कार्रवाई केवल अपराधियों और अवैध प्रवास से जुड़े लोगों के खिलाफ लक्षित अभियान है।

    हालांकि, ज़मीनी हकीकत इससे अलग नजर आई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नकाबपोश और हथियारबंद एजेंटों द्वारा की जा रही कार्रवाइयों ने देशभर में आक्रोश पैदा किया। कई रिपोर्टों में यह आरोप लगा कि लोगों को बेहद कमज़ोर और संदिग्ध सबूतों के आधार पर हिरासत में लिया गया।


    ट्रंप प्रशासन की आधिकारिक घोषणा

    प्रेस ब्रीफिंग के दौरान टॉम होमन ने कहा,
    “मैंने प्रस्ताव रखा था और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर सहमति जताई है कि मिनेसोटा में चल रही यह विशेष कार्रवाई अब समाप्त कर दी जाए। इस सप्ताह से ही एजेंटों की संख्या कम की जा रही है और अगले सप्ताह तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।”

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तैनात एजेंटों को या तो उनके गृह स्टेशनों पर वापस भेजा जाएगा या फिर देश के अन्य हिस्सों में तैनात किया जाएगा, जहां उनकी आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगला संभावित लक्ष्य कौन-सा शहर या राज्य हो सकता है।


    विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाएं

    इस अभियान के दौरान मिनियापोलिस और उसके आसपास के इलाकों में लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे। स्थानीय नागरिकों, मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “डर और दमन का अभियान” बताया।

    पिछले महीने दो अमेरिकी नागरिकों — रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी — की अलग-अलग घटनाओं में गोली लगने से मौत हो गई। इन घटनाओं ने इस पूरे अभियान को लेकर आक्रोश को और भड़का दिया। आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल और आक्रामक कार्रवाई ने हिंसा की आशंका को बढ़ाया।


    ट्रंप की लोकप्रियता पर असर

    गौरतलब है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में अवैध आव्रजन के खिलाफ सख्त रुख ट्रंप की जीत का एक बड़ा कारण माना गया था। लेकिन मिनेसोटा से सामने आ रहे रोज़ाना वीडियो और रिपोर्ट्स ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हिंसक छापेमारियों और मासूम लोगों को निशाना बनाए जाने की खबरों के चलते राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में तेज गिरावट आई। यही वजह मानी जा रही है कि प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।


    स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

    मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने ICE अभियान को अपने शहर के लिए “विनाशकारी” बताया। उन्होंने कहा,
    “इस अभियान ने हमारे पड़ोस और व्यवसायों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अब समय है कि हम फिर से अपने शहर को संभालें और एक नई शुरुआत करें।”

    मेयर फ्रे ने यह भी दोहराया कि उनका प्रशासन प्रवासी समुदाय के साथ पहले की तरह प्रतिबद्धता बनाए रखेगा।


    ‘अभूतपूर्व संघीय दखल’

    मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने इस कार्रवाई को राज्य के इतिहास में “जीवन के हर पहलू में अभूतपूर्व संघीय दखल” करार दिया।
    उन्होंने कहा,
    “मुझे नहीं लगता कि किसी भी राज्य ने पहले ऐसा कुछ देखा हो। हम सतर्क आशावाद के साथ इस वापसी को देख रहे हैं।”

    मिनियापोलिस एक “सैंक्चुअरी सिटी” है, जहां स्थानीय पुलिस संघीय आव्रजन अधिकारियों के साथ नियमित सहयोग नहीं करती। यही कारण है कि यह शहर ट्रंप प्रशासन के निशाने पर रहा।


    ICE में सुधार की मांग

    डेमोक्रेटिक पार्टी और नागरिक अधिकार समूहों ने ICE में बड़े सुधारों की मांग तेज कर दी है। इनमें मोबाइल पेट्रोलिंग को समाप्त करना, एजेंटों द्वारा चेहरे ढकने पर प्रतिबंध लगाना और किसी भी गिरफ्तारी के लिए वारंट अनिवार्य करने जैसी मांगें शामिल हैं।

    यदि वॉशिंगटन में ICE को लेकर राजनीतिक सहमति नहीं बनती, तो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) को फंडिंग संकट का सामना करना पड़ सकता है। 14 फ़रवरी से DHS के पास धन की कमी शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।

    हाल ही में अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स ने DHS को फंड देने के प्रस्ताव को रोक दिया, जिसके पीछे आव्रजन अभियान को लेकर तीखी चार घंटे लंबी सुनवाई रही।


    आगे क्या?

    टॉम होमन ने कहा कि कुछ संघीय अधिकारी मिनेसोटा में ही रहेंगे, लेकिन उनकी संख्या काफी कम होगी। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के चलते “ट्विन सिटीज़ और पूरे मिनेसोटा को अधिक सुरक्षित बनाया गया है।”

    उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान संघीय अधिकारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, हालांकि अवैध आव्रजन से जुड़ी कुल गिरफ्तारियों और निर्वासन की संख्या उन्होंने नहीं बताई।

    सामुदायिक संगठक लिज़ डिजिटेल एंडरसन के अनुसार,
    “इस अभियान से पैदा हुआ मानसिक और सामाजिक आघात आने वाले वर्षों तक महसूस किया जाएगा, लेकिन हमारे समुदायों ने यह दिखा दिया है कि वे कितने जुड़े और मजबूत हैं।”


    निष्कर्ष

    मिनेसोटा में आव्रजन कार्रवाई को समाप्त करने का फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। यह न सिर्फ बढ़ते जनविरोध और हिंसा का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सख्त आव्रजन नीति अब खुद राष्ट्रपति ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम बनती जा रही है।

    आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह की कार्रवाइयों को देश के अन्य हिस्सों में दोहराया जाता है या प्रशासन अपनी आव्रजन रणनीति में व्यापक बदलाव करता है। फिलहाल, मिनेसोटा में राहत की सांस ली जा रही है, लेकिन अमेरिका में आव्रजन पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।

     
     
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