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    मेटेरियल साइन्स वर्तमान की आवष्यकताः प्रो.पी.प्रदीप

    1 month ago

    एस. एस. जैन सुबोध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जयपुर एवं विज्ञान और तकनीकी विभाग, राजस्थान सरकार (डीएसटी) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन मेटेरियल साइंस विषय पर किया गया।

     

    इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. पी.प्रदीप, प्रोफेसर ऑफ ऐमिनेंस, स्कूल ऑफ नेनोसाइंस एण्ड नेनोटेक्नोलोजी, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोटटायम् द्वारा मेटेरियल साइंस, पदार्थ विज्ञान को समझने के लिये आवश्यक तत्व, उनके विश्लेषण तथा अनुप्रयोगो के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। उन्होने सोलर सेल द्वारा चलित उपकरणों तथा उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला और नेनोटेक्नोलॉजी और सेमीकन्डक्टर चिप जैसे आविष्कार की महत्ता प्रतिपादित की।

    इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि तरूण भटनागर, ने कहा कि पदार्थ विज्ञान सम्बन्धित ज्ञान विद्यार्थियों के लिये हितकारी एवं उपयोगी है। आज जितने भी भौतिक संसाधन है वे मेटेरियल साइंस के कारण है। उसका भाग है। हमें प्रकृति का संरक्षण करते हुये अनुसंधान कार्य करने चाहिये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.कमलेन्द्र अवस्थी अध्यक्ष, भौतिकी शास्त्र विभाग, एमएनआईटी जयपुर ने पोलिमर झिल्ली की संरचना तथा आज के युग में उसकी उपयोगिता, नवीनीकरण एवं उद्यमिता कौशल पर विस्तार से प्रकाश डाला।

    इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में सुबोध महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रेणु जोशी ने अपने स्वागत उद्बोधन में इस कार्यशाला की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से सभी को अवगत कराया। उन्होने कहा कि इस अन्तरराष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न विषयों पर चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं विदवान विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। उन्होने कहा कि मेटेरियल सांइस दैनिक जीवन को लिये महत्वपूर्ण है। चिकित्सा क्षेत्र, स्पेस साइंस, शोध कार्यां के लिये इसका ज्ञान आवश्यक है। यह प्रत्येक देश के लिये उपयोगी है। महाविद्यालय के भौतिकी शास्त्र विभाग के सह-आचार्य, डॉ. बलराम त्रिपाठी ने उद्घाटन सत्र में पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

    तकनीकी सत्रों में डॉ.निशेल सैनी, हिरोशिमा विश्वविद्यालय,जापान ने गैस सेन्सर की आवश्यकता एवं इसका उद्योगों में उपयोग पर प्रकाश डाला एवं प्रो.डेविड ई. मोन्टोंग, साउथ अफ्रीका ने पदार्थ के कम्पोजिशन तथा विभिन्न तत्व जो सल्फर आधारित है, पर ऑनलाईन प्रकाश डाला।

    कार्यशाला के समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. आर.के. सिंघल, पूर्व अध्यक्ष, भौतिकीशास्त्र विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर रहे। अंत में कार्यशाला के समन्वयक डॉ. शिवचरण शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया।

     

     

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