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    राजकीय विद्यालयों में नए सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल से

    1 week ago

    विद्यालयों में प्रवेशोत्सव जारी, घर-घर संपर्क अभियान के जरिए शिक्षा से जोड़ने का संकल्प, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट घटाने पर विशेष फोकस

     

    जयपुर। राजस्थान में शैक्षणिक सत्र 2026–27 की शुरुआत इस बार एक नई ऊर्जा और व्यापक जनभागीदारी के साथ होने जा रही है। नवीन सत्र इस वर्ष 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा जिसके लिए राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों में “प्रवेशोत्सव 2026” का आयोजन किया जा रहा है। 'सत्रारंभ के साथ शिक्षारंभ' के संदेश को मूर्त रूप देने के लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा राज्य स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इस वर्ष प्रवेशोत्सव को केवल एक औपचारिक आयोजन न मानते हुए इसे नामांकन बढ़ाने, ड्रॉपआउट दर कम करने और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के सशक्त अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है।

     

    घर-घर पहुंचकर बदल रही तस्वीर:

     

    प्रवेशोत्सव को सफल बनाने के लिए इस बार घर-घर जाकर अभियान चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के ''सघन अभियान'' को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है, जो इस पूरे अभियान की सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। राज्यभर में चरणबद्ध रूप से 27 मार्च, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल और 15 अप्रैल को विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक घर तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यालय स्टाफ एवं स्थानीय कार्मिकों की टीमों द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है, जिसमें 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का चिन्हीकरण कर उनके नामांकन को सुनिश्चित किया जा रहा है। यह व्यापक जनसंपर्क प्रयास यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक परिवार तक शिक्षा का संदेश पहुंचे।

     

    अभिभावक सहभागिता से बना मजबूत विश्वास:

     

    हाल ही में आयोजित मेगा पीटीएम ने इस अभियान को मजबूत आधार प्रदान किया है। इस दौरान राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, एसीएस शिक्षा आईएएस राजेश यादव तथा प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट स्वयं विद्यालयों में पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए यह सुनिश्चित किया कि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित हो। इस पहल ने न केवल शैक्षणिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया, बल्कि अभिभावकों के बीच सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ किया है।

     

    पहले दिन से शिक्षण, पुस्तकों की समयबद्ध उपलब्धता:

     

    इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि 1 अप्रैल से ही विद्यालयों में शिक्षण कार्य पूर्ण रूप से प्रारंभ कर दिया जाएगा। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि अधिकांश पाठ्यपुस्तकें 25 मार्च तक जिलों में पहुंच चुकी हैं, जबकि शेष पुस्तकों की आपूर्ति 1 अप्रैल तक पूर्ण कर दी जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को सत्र के पहले दिन से ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने का विभाग का संकल्प पूर्ण रूप से साकार होगा और “पहले दिन से पढ़ाई” का लक्ष्य जमीन पर दिखाई देगा।

     

    स्वास्थ्य और सीखने पर समान ध्यान:

     

    विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए 16 अप्रैल से डिजिटल स्वास्थ्य जांच अभियान प्रारंभ किया जाएगा, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों की नियमित जांच कर चिन्हित समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, मई माह में आधारभूत दक्षताओं को सुदृढ़ करने के लिए विशेष शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार लाया जा सके।

     

    सुदृढ़ होती व्यवस्थाएं, बढ़ता विश्वास:

     

    राजकीय विद्यालयों में पिछले वर्षों में हुए सुधारों ने शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा दी है। प्रशिक्षित शिक्षक, सुव्यवस्थित भवन, स्मार्ट कक्षाएं, आईसीटी लैब, गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति, खेल सुविधाएं, व्यावसायिक शिक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी और रीडिंग कॉर्नर जैसी व्यवस्थाएं अब इन विद्यालयों की पहचान बन चुकी हैं। इसके साथ ही छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन योजनाएं विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे राजकीय विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मजबूत और विश्वसनीय केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

     

    हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प:

     

    शिक्षा विभाग द्वारा सभी अधिकारियों और कार्मिकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ करें, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों का नामांकन नजदीकी राजकीय विद्यालयों में सुनिश्चित करें। विशेष रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का कक्षा 1 में प्रवेश सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि उन्हें प्रारंभ से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके।

     

    नई सोच के साथ मजबूत शुरुआत:

     

    “सत्रारंभ के साथ शिक्षारंभ” की यह पहल राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। “प्रवेशोत्सव 2026” अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है, जो घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने और राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत करने का कार्य कर रहा है।

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