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    राजस्थान विश्वविद्यालय के 'लाइफलाँग लर्निंग विभाग' में आपदा प्रबंधन एवं जीवन रक्षा कौशल पर कार्यशाला आयोजित; विद्यार्थियों ने सीखे सीपीआर के गुर

    2 hours ago

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के लाइफलाँग लर्निंग विभाग द्वारा "बेसिक लाइफ सेविंग ट्रेनिंग" विषय पर दिनांक 27 अप्रैल 2026 को एक विशेष ट्रेनिंग सत्र का सफल आयोजन किया गया। इस ट्रेनिंग सत्र का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं के समय त्वरित निर्णय लेने और जीवन रक्षा तकनीकों के प्रति शिक्षित करना था।

     

    डॉ. अमित शर्मा ने युवाओं को दी सामाजिक जिम्मेदारी की सीख

    लाइफलाँग लर्निंग विभाग के निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवन कौशल है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत युवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वे आपात स्थिति में घबराने के बजाय एक 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभा सकें।

     

    मनीष संचेती ने साझा किए आपदा प्रबंधन के सूत्र

    मुख्य वक्ता श्री मनीष संचेती ने अपने व्याख्यान में लाइफ सेविंग की दिशा में आपदा प्रबंधन के विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्राकृतिक आपदा के समय 'ड्रॉप, कवर और होल्ड' की तकनीक और आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों के बारे में बताया । उन्होंने रोड एक्सीडेंट मैनेजमेंट में दुर्घटना के बाद के 'गोल्डन ऑवर' का महत्व समझाया और घायल की सुरक्षित सहायता हेतु विभिन्न तरीकों को समझाया । उन्होंने आग लगने की स्थिति में आपातकालीन निकास और प्राथमिक उपचार के तरीकों पर भी प्रकाश डाला । इसके अतिरिक्त हार्ट अटैक मैनेजमेंट में दिल का दौरा पड़ने के लक्षणों को पहचानना और अस्पताल पहुँचने से पूर्व किए जाने वाले जरूरी उपायों के बारे में समझाया ।

     

    कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन का लाइव प्रदर्शन

    कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में मेडिकल एक्सपर्ट कनक वर्मा द्वारा कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन का लाइव प्रदर्शन दिया गया। उन्होंने डमी के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया कि यदि किसी व्यक्ति की सांसें रुक जाएं या दिल धड़कना बंद कर दे, तो सही तरीके से चेस्ट कंप्रेशन देकर उसकी जान कैसे बचाई जा सकती है। विद्यार्थियों ने इस तकनीक को न केवल देखा बल्कि इसकी बारीकियों को भी समझा।

     

    कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। विभाग के निदेशक डॉ. अमित शर्मा द्वारा सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को आपदा के समय धैर्य बनाए रखने और समाज में इन जीवन रक्षक तकनीकों का प्रसार करने का संकल्प दिलाया गया।

    इस विशेष सत्र में डॉ. जयसिंह, डॉ. ज्योति जैन, डॉ. प्रियंका मीणा एवं डॉ. सुचित्रा यादव भी उपस्थित रहे ।

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