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    राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व शिखर सम्मेलन (NSIL–2026) का भव्य शुभारंभ

    2 months ago

    राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व समागम NSIL-2026 का उद्घाटन समारोह सोमवार को प्रातः 10 बजे राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर में सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा रहे । विशिष्ट अतिथियों में माननीय उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री राजस्थान सरकार डॉ. प्रेमचंद बैरवा, प्रो. पंकज अरोरा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, प्रो. गंटी एस. मूर्ती, राष्ट्रीय समन्वयक भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार एवं चमु कृष्ण शास्त्री, अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार शामिल रहे ।

    कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना, दीप प्रज्जवल एवं राष्ट्रगीत से हुआ। प्रो. अल्पना कटेजा, कुलगुरु, राजस्थान विश्वविद्यालय ने स्वागत वक्तव्य दिया । तत्पश्चात् विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष, प्रो. कैलाश चन्द्र शर्मा ने NSIL-2026 की उद्भावना एवं कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की ।

    माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारत के शैक्षिक भविष्य को नई दिशा देने वाला एक राष्ट्रीय अभियान है। आज जब हम विकसित भारत–2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, तब शिक्षा इस संकल्प की आधारशिला है। हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है, जो युवाओं को केवल डिग्री ही न दे, बल्कि उन्हें चरित्रवान, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाए। हमारी सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि विश्वविद्यालय केवल परीक्षा केंद्र न रहें, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता की प्रयोगशाला बनें। हमें ऐसा वातावरण बनाना है, जहाँ विद्यार्थी जिज्ञासा करें, प्रश्न पूछें, नए समाधान खोजें और समाज की समस्याओं का उत्तर दें।

    साथ ही उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है। यह हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि हमने अपने युवाओं को सही दिशा, सही कौशल और सही अवसर दिए, तो वे भारत को विश्व में अग्रणी बनाएँगे। हमारा लक्ष्य है कि युवा केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजक बनें। इसी सोच के साथ राज्य में स्टार्टअप, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, इंटर्नशिप और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। युवाओं के लिए नई रोजगार नीतियाँ, निवेश और तकनीकी विकास के माध्यम से व्यापक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्य और संस्कृति का समन्वय हो। परंपरा और तकनीक का यही संगम भारत को वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाएगा।

    उन्होंने शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ही राष्ट्र के वास्तविक शिल्पकार हैं। विद्यार्थियों के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं को दिशा देना, उनकी ऊर्जा को सकारात्मक शक्ति में बदलना और उन्हें राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर अग्रसर करना आपका दायित्व है। इस सम्मेलन में जो भी विचार और सुझाव सामने आएँ, उन्हें केवल चर्चा तक सीमित न रखें, बल्कि अपने-अपने संस्थानों में लागू करें।

    राजस्थान सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल आधारभूत संरचना को मजबूत करने, कौशल और नवाचार को बढ़ावा देने तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा में समाहित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। हमें विश्वास है कि यह पहल आने वाले समय में देशभर में एक सकारात्मक शैक्षणिक आंदोलन का रूप लेगी।

    कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह मंच किसी प्रकार का राजनीतिक वक्तव्य देने का नहीं, बल्कि संस्थागत सहयोग, सशक्त नेतृत्व और नीति-सम्मत समाधानों के माध्यम से उच्च शिक्षा को “विकसित भारत–2047” के लक्ष्य से जोड़ने का है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा तथा तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था सदैव केवल जीविका नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का माध्यम रही है। आज विकसित भारत की संकल्पना तभी सार्थक होगी, जब आधुनिक विज्ञान और तकनीक का समन्वय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के साथ किया जाए।

    विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष, प्रोफेसर कैलाशचंद्र शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व शिखर सम्मेलन (NSIL) की परिकल्पना एक स्पष्ट और दूरदर्शी उद्देश्य के साथ की गई थी। इसका मूल लक्ष्य एक ऐसे राष्ट्रीय मंच का निर्माण करना है, जहाँ देश के शैक्षणिक एवं संस्थागत नेतृत्वकर्ता केवल नीतियों पर चर्चा करने के लिए ही नहीं, बल्कि सामूहिक बुद्धिमत्ता, सहयोग और क्रियान्वयन योग्य विचारों के माध्यम से उच्च शिक्षा की भावी दिशा को निर्धारित करने के लिए एकत्रित हों।

    राजस्थान विश्वविद्यालय की माननीय कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय केवल एक उच्च शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, मूल्य और राष्ट्रीय चेतना की समृद्ध परंपरा का जीवंत केंद्र है। आज सूचना, विज्ञान और तकनीक के तीव्र परिवर्तनशील युग में विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। यह दो दिवसीय सम्मेलन संवाद, चिंतन और अनुभव-साझाकरण का महत्वपूर्ण मंच है, जो शिक्षा को समाज से जोड़ने, नवीन दृष्टि प्रदान करने और परिवर्तन की दिशा को सुदृढ़ बनाने में सहायक है। वर्तमान युग में युवाओं को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र, नेतृत्व, नैतिकता और मूल्यबोध से भी सशक्त बनाना आवश्यक है।

    इस परिवर्तन यात्रा में शिक्षक और विद्वान समाज के मार्गदर्शक हैं। भगवद्गीता का संदेश है—“यद्यदाचरति श्रेष्ठः तत्तदेवेतरो जनः।” अतः शिक्षकों को अपने विचार, व्यवहार और कर्म से समाज के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत बनना चाहिए। इस अवसर पर सभी अतिथियों, विद्वानों, आयोजकों और सहयोगियों के समर्पित प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करते हुए, मेरी कामना है कि यह कार्यक्रम केवल स्मरणीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायी भी सिद्ध हो और यहाँ से उत्पन्न विचार नीतियों, शोध और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनें। 

    कार्यक्रम का संचालन डॉ. रागिनी राणावत तथा धन्यवाद डॉ. अभिषेक गहलोत ने दिया । इस अवसर पर देश भर के विश्वविद्यालयों, आई.आई. टी., आई.आई.एम. आदि के माननीय कुलपति, निदेशक, शिक्षाविद् तथा शोधार्थी उपस्थित थे ।

     

     

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