Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    रवीन्द्र मंच के मिनी थियेटर में हुआ नाटक “बलि और शंभू“ का मंचन

    3 weeks ago


    जयपुर। यूनिवर्सल थियेटर एकेडमी, जयपुर द्वारा आज बुधवार को नाटक बली और शंभू का मंचन रवीन्द्र मंच, जयपुर के मिनी थियेटर हॉल में किया गया। नाटक का लेखन मानव कौल ने एवं निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी केशव गुप्ता ने किया। नाटक में नये एवं पुराने कलाकारों ने अभिनय किया
    संस्था अध्यक्ष एवं नाट्य निर्देशक केशव गुप्ता ने बताया कि मानव कौल द्वारा लिखित नाटक “बलि और शंभू“ दो ऐसे व्यक्तियों की कहानी है जिन्हें विभिन्न परिस्थितियों के चलते अपना जीवन वृद्धा आश्रम में व्यतीत करना पड़ता है। घर के बुजुर्गो को किन परिस्थितियों के चलते वृद्धाश्रम का सहारा लेना पड़ता है या फिर ऐसी कौनसी मनोवैज्ञानिक, सामाजिक स्थितियां पैदा होती है जिनके कारण वृद्ध लोग वृद्धाश्रम में जाने को मजबूर हो जाते हैं इन्ही सब पहलुओं को लेकर कहानी आगे बढ़ती है। हमने नाटक के जरिये यह दिखाने की कोशिश की है कि आखिर इन परिस्थितियों के पीछे कौनसे ऐसे कारण है जो लोगों को इतना एकाकी बना देते हैं कि वो वृद्धाश्रम का रूख कर लेते हैं।
    नाटक में शम्भू अपनी बेटी तितली से बेहद प्यार करता है लेकिन तितली शम्भू के विपरीत जाकर शादी कर लेती है और कार एक्सीडेंट में तितली की मृत्यु हो जाती है जिसके गहरे सदमे के कारण शम्भू ओल्ड ऐज होम में रहने लगता है और सारे घटना क्रम के लिए शुभांकर को दोषी मानता है वहीं दूसरी तरफ़ बलि के ज़्यादा बोलने की वजह से उसके घर वाले बलि को भी ओल्ड ऐज होम में जाने के लिए मजबूर कर देते है। ओल्ड ऐज होम में दोनों एक ही रूम में रहते है और उनके बीच एक गहरा रिश्ता बन जाता है। इन दोनों के बीच के संवादों से समाज में फैली रिश्तों की कड़वाहट को बलि और शम्भू ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों को भाव विभोर होने पर मज़बूर कर दिया। साथ ही इस कहानी के माध्यम से समाज में व्याप्त विभिन्न लोगों की मानसिकता एवं चारत्रिक स्वभाव को रेखांकित करने की कोशिश की गई। नाटक में शम्भू के ज़रिए अहं और भावनात्मक जुड़ाव के बीच द्वंद, बलि के द्वारा हर परिस्थिति में खुश रहने की स्पर्धा, तितली और शुभांकर के द्वारा प्रेम के बीच सामाजिक बंधनों की अड़चन और इसे सोचने के तरीके पर कटाक्ष करने की कोशिश की गई वहीं झिलमिल और गौतम के माध्यम समाज सेवा एवं समर्पण को दिखाया गया।
    नाटक में बलि-अर्जुन देव, शंभू-माधव, तितली-रिया सैनी, झिलमिल-यशस्विनी जांगिड, शुभांकर-यश कुमार एवं गौतम-राम गुर्जर ने अभिनय किया।नाट्य पार्श्व में प्रकाश व्यवस्था-केशव गुप्ता, रूपसज्जा एवं मंच प्रबन्धन-सीमा गुप्ता, वस्त्र सज्जा-गीतिका गुप्ता, मंच सज्जा-गौरव कुमावत एवं पिंकी चौधरी पार्श्व संगीत- नितिन, बैक स्टेज- विजय सिंह प्रचार-प्रसार विपुल शर्मा, उद्घोषण-अर्जुन देव का रही । नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन केशव गुप्ता द्वारा की गई।

    Click here to Read More
    Previous Article
    डॉ. मेघेंद्र शर्मा MNIT जयपुर के 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' में राज्य सरकार के प्रतिनिधि मनोनीत
    Next Article
    शहरी कृषि और नवाचार पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

    Related धर्म और अध्यात्म Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment