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    सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी, लंबी अवधि में मजबूत बना रह सकता है रुझान

    3 months ago

    वैश्विक और घरेलू बाजारों में सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। बीते कुछ हफ्तों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट देखी गई थी, लेकिन हाल के दिनों में इनमें आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह सुधार स्थायी नहीं है और निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के लिए परिदृश्य अब भी सकारात्मक माना जा रहा है।

    हालिया तेजी और गिरावट का क्रम

    जनवरी के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग के चलते कीमती धातुएं रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई थीं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। फरवरी की शुरुआत में बाजार में अचानक मुनाफावसूली शुरू हुई, जिससे कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    स्पॉट गोल्ड कुछ ही सत्रों में दो अंकों के प्रतिशत तक फिसल गया, जबकि चांदी में इससे भी ज्यादा तेज गिरावट देखी गई। इसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे दोनों धातुओं में आंशिक रिकवरी हुई। बाजार जानकारों के अनुसार यह रिकवरी तकनीकी कारणों से ज्यादा है और इसमें स्थायित्व की कमी है।

    अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर

    सोने और चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कारक एक साथ असर डाल रहे हैं। अमेरिकी डॉलर में मजबूती, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय कर रही हैं। हाल के दिनों में डॉलर में आई मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया, क्योंकि डॉलर महंगा होने पर सोना और चांदी अन्य मुद्राओं में महंगे हो जाते हैं।

    इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर मार्जिन आवश्यकताओं में बदलाव और सट्टा गतिविधियों में कमी ने भी कीमतों को प्रभावित किया। जिन निवेशकों ने उधार लेकर बड़े सौदे किए थे, उन्हें अपनी पोजीशन घटानी पड़ी, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा।

    भू-राजनीतिक स्थिति और निवेश धारणा

    भू-राजनीतिक घटनाक्रम लंबे समय से सोने की कीमतों का प्रमुख चालक रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर बढ़े तनावों ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाया था। हालांकि, जैसे ही इन घटनाओं को लेकर बाजार की आशंकाएं कुछ हद तक कम हुईं, निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों की ओर रुख करना शुरू कर दिया। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा।

    फिर भी, विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में किसी भी नए घटनाक्रम से बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है और कीमती धातुओं में फिर से मांग बढ़ सकती है।

    साप्ताहिक और अल्पकालिक परिदृश्य

    अल्पकालिक रूप से बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना जताई जा रही है। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और पोजीशन एडजस्टमेंट के चलते कीमतों में दबाव आ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोना और चांदी सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो सकते हैं।

    तकनीकी संकेतकों के आधार पर, सोने में कुछ ऊपरी स्तरों की जांच हो सकती है, लेकिन वहां टिके रहना चुनौतीपूर्ण होगा। चांदी में भी तेजी के प्रयास दिख सकते हैं, हालांकि इसकी कीमतें सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर रहने की संभावना है।

    चीन और एशियाई बाजारों की भूमिका

    एशियाई बाजारों, विशेष रूप से चीन, कीमती धातुओं की मांग में अहम भूमिका निभाते हैं। हाल के समय में चीन में सोने और चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है। स्थानीय बाजारों में प्रीमियम पर ट्रेडिंग यह संकेत देती है कि भौतिक मांग अभी कमजोर नहीं हुई है।

    त्योहारी सीजन और ज्वेलरी उद्योग से जुड़ी खरीदारी ने भी मांग को सहारा दिया है। हालांकि, आने वाले दिनों में छुट्टियों और कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण बाजार की गतिविधि थोड़ी सुस्त पड़ सकती है, जिसका असर कीमतों पर भी दिख सकता है।

    भारतीय बाजार पर प्रभाव

    भारत में सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ-साथ रुपये की चाल से भी प्रभावित होती हैं। हाल के दिनों में रुपये में आई मजबूती ने घरेलू बाजार में सोने की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया है। मजबूत रुपया आयात लागत को कम करता है, जिससे कीमतों पर दबाव आता है।

    इसके अलावा, शादी-विवाह और त्योहारों की मांग भी भारतीय बाजार में अहम भूमिका निभाती है। फिलहाल मांग सामान्य बनी हुई है, लेकिन कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर उपभोक्ता सतर्क रुख अपना सकते हैं।

    दीर्घकालिक दृष्टिकोण

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी अब भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद और पोर्टफोलियो विविधीकरण की जरूरत जैसे कारक कीमती धातुओं के पक्ष में जाते हैं।

    यदि कीमतों में और गिरावट आती है, तो इसे दीर्घकालिक निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि मध्यम से लंबी अवधि में सोने की कीमतें फिर से ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकती हैं, जबकि चांदी औद्योगिक मांग के चलते अतिरिक्त समर्थन पा सकती है।

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, सोने और चांदी की कीमतों में मौजूदा सुधार राहत जरूर देता है, लेकिन बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। निकट अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, जबकि लंबी अवधि में कीमती धातुओं का रुझान सकारात्मक बना रहने की संभावना है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचते हुए संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

     
     
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