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    सुरक्षित परिसर की ओर एक कदम: राजस्थान विश्वविद्यालय में 'पॉश' कानून और लैंगिक संवेदनशीलता पर मंथन

    1 month ago

    विशेषज्ञों ने समझाए कानूनी प्रावधान; छात्राओं ने पूछे सवाल, जाना कैसे बनाएं भयमुक्त वातावरण
    जयपुर (राजस्थान विश्वविद्यालय)।
    शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित, समावेशी और गरिमामय वातावरण तैयार करने की दिशा में मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि महाविद्यालय ने एक अहम पहल की। महाविद्यालय के मूट कोर्ट हॉल में 'जेंडर सेंसिटिविटी और पॉश (PoSH - Prevention of Sexual Harassment)' विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने लैंगिक समानता और सुरक्षा मानकों पर विस्तार से चर्चा की।
    जागरूकता ही सुरक्षा का आधार
    सत्र का संचालन श्रुति झंवर ने किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को लैंगिक संवेदनशीलता के मायने समझाए। श्रुति ने समाज में व्याप्त लैंगिक पूर्वाग्रहों (Gender Bias) पर चोट करते हुए पॉश (PoSH) से जुड़े कानूनी ढांचे को सरल भाषा में स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल या शिक्षण संस्थान में किसी भी प्रकार के उत्पीडन के खिलाफ कानून में क्या प्रावधान हैं और पीड़ित अपना पक्ष मजबूती से कैसे रख सकते हैं।
    यूजीसी निर्देशों का पालन अनिवार्य
    कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजू गहलोत ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक स्वस्थ शैक्षणिक माहौल के लिए ऐसे संवाद निरंतर होने आवश्यक हैं। वहीं, आयोजन के सह-आयोजक डॉ. मनोज मीणा ने यूजीसी और एआईसीटीई के दिशा-निर्देशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में इन नियमों का पालन करना न केवल वैधानिक बाध्यता है, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
    संवाद सत्र: छात्राओं ने की सीधी बात
    यह कार्यशाला केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक सक्रिय संवाद में बदल गई। छात्राओं ने 'रिपोर्टिंग प्रक्रिया' को लेकर कई तीखे और महत्वपूर्ण सवाल पूछे। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि यदि किसी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो संस्थागत स्तर पर शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया क्या है और संस्था के दायित्व क्या हैं। विशेषज्ञों ने इन सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
    ये रहे उपस्थित
    इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य संकाय सदस्य डॉ. राजेश गौड़, डॉ. मयंक बरनवाल और डॉ. आरती राठी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि एक सुरक्षित और सम्मानजनक परिसर का निर्माण किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि सभी की जागरूक और जिम्मेदार भागीदारी पर निर्भर करता है।

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