Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    संस्कृत है विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा: डॉ. प्रेमचंद बैरवा

    2 months ago

    पश्चिम मध्यक्षेत्रीय युवा महोत्सव 2025 का भव्य शुभारम्भ
    जयपुर परिसर के विस्तार हेतु भूमि आवंटन के लिए मुख्यमंत्री से शीघ्र होगी मुलाक़ात
    जयपुर।
    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के तत्वावधान में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय पश्चिम मध्यक्षेत्रीय युवा महोत्सव 2025 का भव्य शुभारम्भ हुआ। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. वाई.एस. रमेश, पूर्व निदेशक, जयपुर परिसर तथा डॉ. लता श्रीमाली, निदेशक, राजस्थान संस्कृत अकादमी उपस्थित रही।  युव महोत्सव कार्यक्रम के संयोजक प्रो.लोकमान्य मिश्र ने बताया कि इस महोत्सव में पश्चिम और मध्य भारत की 14 टीमे भाग ले रही हैं। उन्होंने इसे संस्कृत, परंपरा और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम बताया। सह-संयोजक डॉ. राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि महोत्सव का शुभारम्भ भव्य शोभायात्रा से हुआ, त्रिवेणी नगर परिसर से सभी प्रतिभागियों ने पारम्परिक परिधान में शोभायात्रा निकाली। अतिथियों ने माँ सरस्वती एवं बजरंग बली के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया एवं मशाल जलाकर उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि ने परेड की सलामी ली और प्रतिभागियो को संस्कृत में शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति की आत्मा है। नासा के वैज्ञानिकों ने भी इसे विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा माना है। यह केवल परंपरा की भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान, तर्क और तकनीक की भाषा भी है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने जयपुर परिसर के लिए अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने के लिए दिये गये प्रार्थना पत्र के संदर्भ में आश्वस्त करते हुए कहा कि मैं इस विषय में निश्चित हीमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाक़ात कर संस्कृत भाषा के संवर्धन हेतु हर संभव प्रयास करूंगा। युवा महोत्सव में शैक्षिक सांस्कृतिक एवं अनेक क्रीडा स्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है। क्रीडा छात्रों के जीवन में सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती है। पांच राज्यों से आई विभिन्न परिसरों की तथा आदर्श महाविद्यालय की अनेक टीमें 3 दिन में क्रीड़ा में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी। क्रीड़ाओं के माध्यम से छात्रों में सामूहिक रूप से कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। छात्रों में समायोजन की भावना में वृद्धि होती है।
    विशिष्ट अतिथि प्रो. वाई.एस. रमेश ने जयपुर परिसर के विस्तार हेतु भूमि आवंटन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान में लगभग 2000 छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत है, किंतु छात्रावास की सीमित सुविधा के कारण कठिनाइयाँ आ रही है। विश्वविद्यालय के समुचित विकास के लिए भूमि आवंटन अति आवश्यक है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि जयपुर परिसर संस्कृत शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। निदेशक महोदय ने अपने उद्बोधन में यह भी बताया कि जयपुर अपरा काशी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात है। जयपुर में अनेक बड़े-बड़े विद्वान हुए हैं जिन्होंने विभिन्न प्रस्थानो का विकास भी किया है। ऐसी विद्वानों की नगरी में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का जयपुर परिसर परंपराओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    डॉ. लता श्रीमाली ने कहा कि संस्कृत से ही संस्कृति और संस्कार जीवित रहते हैं, और युवाओं के माध्यम से यह परंपरा आगे बढ़ रही है। पहले दिन ‘सङ्गणकीय संस्कृतम्’ प्रतियोगिता सहित विभिन्न सांस्कृतिक एवं खेल स्पर्धाओं का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य संस्कृत के माध्यम से संगणक विज्ञान के नवाचारों को प्रोत्साहन देना था। इसमें Web Page Designing (HTML, CSS, JavaScript), PHP-MySQL Integration तथा Python Programming जैसे तकनीकी विषयों पर आधारित कोडिंग और वाक्परीक्षा संपन्न हुई। प्रतियोगिता की संयोजक समिति में प्रो. विजेन्द्र कुमार शर्मा, डॉ. नमिता मित्तल और डॉ. शैली प्रकाश शामिल रहीं। निर्णायक मंडल में प्रो. कुलदीप शर्मा, प्रो. प्रवीण गुप्ता तथा डॉ. योगेश गुप्ता ने अपनी विशेषज्ञता से मूल्यांकन किया। इस आयोजन ने प्रमाणित किया कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि आधुनिक डिजिटल युग की प्रेरक भाषा भी है।

    सांस्कृतिक स्पर्धाओं में एकक संस्कृत गीतम्, समूहगान और संघनृत्य का आयोजन हुआ, जिनके निर्णायक प्रो. भगवती सुदेश, डॉ. शुक्ला मुखर्जी, डॉ. रेखा पाण्डेय, प्रो. कृष्णा शर्मा, डॉ. किरण खींची, डॉ. आरती मीना, डॉ. लक्ष्मी शर्मा एवं डॉ. दीक्षिता अजवानी रही। खेल प्रतियोगिताओ में वॉलीबॉल, खो-खो, शतरंज, ऊँची कूद, गोला फेंक, कुश्ती और बेडमिंटन जैसी स्पर्धाएँ संपन्न हुई। छात्र-छात्राओ ने संस्कृत में कॉमेंट्री कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
    धन्यवाद ज्ञापन  सह निदेशक प्रो.बोध कुमार झा ने प्रस्तुत किया।
    कार्यक्रम का संचालन डॉ.रानी दाधीच ने किया। इस अवसर पर जम्मू परिसर निदेशक  प्रो. सतीश कपूर,प्रो. ईश्वर भट्ट, प्रो.श्रीधर मिश्र, प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय, प्रो. लीना सक्करवाल, प्रो. शिवकान्त झा, प्रो. शीशराम, डॉ. कैलाश सैनी, डॉ. डम्बरुधरपति, डॉ.प्रमोद बुटोलिया, डॉ.योगेन्द्र दीक्षित सहित अनेक संस्कृत अनुरागी विद्वान्, प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

    Click here to Read More
    Previous Article
    बजटीय घोषणा के अनुरूप चार आदर्श वेद विद्यालय शुरू,1 अप्रैल से सभी विद्यालय हो जाएंगे शुर
    Next Article
    Navigating the Digital Era : Part – 2 विषय पर सत्र का आयोजन

    Related धर्म और अध्यात्म Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment