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    शीर्षक: ईरान हमलों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कड़ा प्रस्ताव पारित, 135 देशों का समर्थ

    1 month ago

    Yugcharan News / 12 March 2026

    पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने ईरान के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में खाड़ी क्षेत्र के देशों और जॉर्डन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की गई है और ईरान से तत्काल शत्रुता समाप्त करने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों द्वारा पेश किया गया था और इसे संयुक्त राष्ट्र के 135 सदस्य देशों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।

    संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई मतदान प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद के 15 में से 13 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि दो देशों — रूस और चीन — ने मतदान से परहेज किया। हालांकि इन दोनों देशों ने अपने वीटो अधिकार का उपयोग नहीं किया, जिसके कारण प्रस्ताव को पारित होने का रास्ता मिल गया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर देशों का समर्थन किसी भी सुरक्षा परिषद प्रस्ताव के लिए असाधारण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और उसके संभावित वैश्विक प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है।

    प्रस्ताव में क्या कहा गया

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र के देशों पर किए गए हमलों की निंदा की गई है। साथ ही ईरान से तत्काल सैन्य गतिविधियों को रोकने और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील की गई है।

    प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र में बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। परिषद ने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आह्वान किया है।

    अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रस्ताव के जरिए वैश्विक समुदाय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सैन्य हमले स्वीकार्य नहीं हैं।

    चीन और रूस का रुख

    हालांकि चीन और रूस ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान नहीं किया, लेकिन उन्होंने इससे दूरी बनाए रखते हुए मतदान से परहेज किया। रूस के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि प्रस्ताव “असंतुलित” है और इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होने की संभावना कम है।

    रूस के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के पीछे कई जटिल कारण हैं और केवल एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसी तरह चीन ने भी कहा कि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई से स्थिति और बिगड़ सकती है और सभी पक्षों को बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए।

    ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

    प्रस्ताव पारित होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता के लिए एक “दुर्भाग्यपूर्ण दिन” है।

    ईरानी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता और इससे संघर्ष की जड़ कारणों को नजरअंदाज किया गया है। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के दबाव में लाया गया है।

    ईरान ने यह भी कहा कि हालिया संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं और कई अस्पतालों, स्कूलों तथा आवासीय इलाकों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

    पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियों में तेज वृद्धि देखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में संघर्ष लगातार जारी है।

    इस संघर्ष का असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर

    पश्चिम एशिया के कई देशों के लिए समुद्री मार्गों के माध्यम से तेल और गैस का निर्यात बेहद महत्वपूर्ण है। यदि संघर्ष के कारण इन मार्गों में बाधा आती है तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।

    हाल के दिनों में कुछ तेल टैंकरों और बंदरगाहों पर हुए हमलों की खबरों ने भी ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने अपने ऊर्जा भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है।

    रूस का अलग प्रस्ताव

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने एक अलग प्रस्ताव भी पेश किया था जिसमें पश्चिम एशिया में सभी पक्षों से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की गई थी। हालांकि यह प्रस्ताव आवश्यक समर्थन प्राप्त नहीं कर सका और पारित नहीं हो पाया।

    विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा परिषद के भीतर अलग-अलग देशों के हितों और दृष्टिकोणों के कारण इस मुद्दे पर पूर्ण सहमति बनना कठिन हो रहा है।

    आगे की स्थिति

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि ईरान और अन्य पक्ष इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी पक्ष कूटनीतिक बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि सैन्य गतिविधियां जारी रहती हैं तो इससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

    फिलहाल वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ही यह तय करेगी कि क्षेत्र में शांति स्थापित हो पाती है या नहीं।

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