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    राजस्थान विश्वविद्यालय में MSME के 30 दिवसीय उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) का शुभारम्भ

    1 hour ago

    जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर स्थित ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर, जो कि भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) का होस्ट इंस्टीट्यूट है, द्वारा एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (MSME-DFO), जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (Entrepreneurship Skill Development Programme – ESDP) का आज ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर परिसर में भव्य शुभारम्भ हुआ।

    "मशरूम उत्पादन के माध्यम से उद्यमिता : फार्म टू मार्केट" विषय पर आधारित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 जुलाई 2026 से 07 सितम्बर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के लिए प्राप्त आवेदनों में से 25 प्रतिभागियों का चयन किया गया है, जिन्हें आगामी 30 दिनों तक मशरूम उत्पादन, स्पॉन एवं कम्पोस्ट निर्माण, उत्पादन तकनीक, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय सहायता तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित निःशुल्क व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात सुश्री अनिला चौरारिया, सहायक निदेशक, MSME-DFO, जयपुर ने कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्यों एवं MSME मंत्रालय द्वारा संचालित उद्यमिता संवर्धन कार्यक्रमों एवं योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी। उन्होंने बताया कि MSME मंत्रालय स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वित्तीय सहायता एवं क्षमता निर्माण योजनाओं का संचालन कर रहा है।

    इसके उपरांत प्रो. सुमिता कच्छवाहा, समन्वयक, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर, राजस्थान विश्वविद्यालय ने ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केंद्र भारत सरकार के MSME मंत्रालय का मान्यता प्राप्त होस्ट इंस्टीट्यूट होने के साथ-साथ विश्वविद्यालय में नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने केंद्र की स्थापना, उपलब्धियों एवं विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रोटोटाइप विकास, आईपीआर एवं पेटेंट सहायता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योग–शैक्षणिक सहयोग, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, कौशल विकास प्रशिक्षण, व्यवसाय परामर्श, मेंटरशिप, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने सहित विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र अब तक अनेक स्टार्टअप्स को सफलतापूर्वक इन्क्यूबेट कर चुका है तथा युवा उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

    इस अवसर पर डॉ. रवि के. गोयल, निदेशक, IEF, CCS National Institute of Agricultural Marketing (CCS NIAM), जयपुर ने कृषि आधारित उद्यमिता, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग एवं एग्री-बिजनेस के क्षेत्र में अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।

    प्रो. अरुण कुमार, संयुक्त निदेशक, PM-USHA, राजस्थान सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार, कौशल विकास एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यार्थियों एवं युवाओं से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

    श्री प्रदीप ओझा, निदेशक, MSME-DFO, जयपुर ने कहा कि भारत सरकार का MSME मंत्रालय युवाओं, महिलाओं एवं नवोदित उद्यमियों को स्वरोजगार एवं रोजगार सृजन के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग कर सफल उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यक्रम के समापन पर डॉ. सुनील छीम्पा, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके उपरांत उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों को ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन अवसंरचना, उपकरणों एवं विभिन्न नवाचार गतिविधियों का भ्रमण कराया तथा केंद्र की उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया।

    कार्यक्रम के सफल संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थाओं में श्री दीपक कुमार शर्मा का विशेष योगदान रहा। उन्होंने सम्पूर्ण कार्यक्रम के संचालन एवं व्यवस्थाओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी, उद्यमी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा चयनित प्रतिभागी उपस्थित रहे। यह 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में कृषि आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, युवाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने तथा "आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

     

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