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    शीर्षक: हॉरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों पर रिपोर्ट से हलचल, ईरान ने दावे को किया खारिज

    1 month ago

    Yugcharan News / 12 March 2026

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच ऐसी रिपोर्ट सामने आई कि भारत के झंडे वाले कुछ तेल टैंकर हॉरमुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं, जबकि कई अन्य देशों के जहाजों पर प्रतिबंध लगे हुए हैं। हालांकि ईरान ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी खबरें सही नहीं हैं।

    सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में यह दावा किया गया था कि भारत-चिह्नित कम से कम दो टैंकर — “पुष्पक” और “परिमल” — हॉरमुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इन जहाजों को उस समय अनुमति मिली जब अमेरिका, यूरोप और इज़राइल से जुड़े कई जहाजों के आवागमन पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए थे।

    हालांकि तेहरान से जुड़े एक स्रोत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत को विशेष रूप से कोई अलग अनुमति दी गई हो, यह बात सही नहीं है। इस बयान के बाद इस मुद्दे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी संवेदनशीलता

    पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री मार्गों पर बढ़ती असुरक्षा के कारण कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिसका असर कई देशों की ऊर्जा नीतियों और कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    भारतीय टैंकरों को लेकर क्या कहा गया

    कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि भारतीय झंडे वाले दो टैंकर — “पुष्पक” और “परिमल” — बिना किसी बाधा के हॉरमुज जलडमरूमध्य से गुजर गए। यह भी कहा गया कि इस मार्ग से गुजरने वाले अन्य कई जहाजों को रोक दिया गया था, लेकिन भारतीय जहाजों को अनुमति मिल गई।

    रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि एक लाइबेरिया-ध्वज वाले तेल टैंकर, जिसकी कमान एक भारतीय कप्तान के हाथ में थी, वह सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरते हुए मुंबई बंदरगाह पहुंचा। बताया गया कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद इस मार्ग से गुजरने वाला यह पहला जहाज था जो भारत की ओर आया।

    हालांकि इन दावों पर ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और वहां के सूत्रों ने इसे गलत बताया है।

    ईरान की समुद्री चेतावनी

    इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा था कि हॉरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो उन्हें संभावित हमलों का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। इसके चलते कई शिपिंग कंपनियां और तेल परिवहन से जुड़ी एजेंसियां सावधानी बरत रही हैं।

    हॉरमुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण

    हॉरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

    करीब 55 किलोमीटर चौड़ा यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। अनुमान के अनुसार हर दिन लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत से अधिक है।

    इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तेल उत्पादक देशों के लिए यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। यदि इस जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

    वैश्विक बाजार पर असर

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।

    जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो ऊर्जा बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है।

    विश्लेषकों के अनुसार यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो ऊर्जा कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा

    भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है और उसकी बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में हॉरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    यदि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ सकता है।

    सैन्य क्षमताओं को लेकर चिंता

    अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों के अनुसार ईरान के पास ऐसी सैन्य क्षमताएं मौजूद हैं जिनसे वह हॉरमुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

    रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के पास एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें, लंबी दूरी की मिसाइलें, ड्रोन, तेज गति वाली नौकाएं और समुद्री बारूदी सुरंगें जैसी तकनीकें मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हथियारों की मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव समुद्री व्यापार के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।

    स्थिति पर दुनिया की नजर

    वर्तमान में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है।

    कई देश स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हॉरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही कब तक सामान्य रहेगी या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

    ऐसे में भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

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