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    छात्र शक्ति के संघर्ष की बड़ी जीत: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, लेकिन बाकी 2 प्रमुख मांगों को लेकर आरयू में छात्र नेता शुभम रेवाड़ की भूख हड़ताल रहेगी जारी

    1 hour ago

    जयपुर | राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रों के हक और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे चर्चित छात्र नेता शुभम रेवाड़ की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल रंग ला रही है। छात्रों के बुलंद हौसलों और ऐतिहासिक आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह देश भर के विद्यार्थियों और युवा शक्ति की एक बहुत बड़ी जीत है।

    हालांकि, छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है। जब तक प्रदेश के छात्रों से जुड़ी बाकी दोनों जायज मांगों को पूरा नहीं कर दिया जाता, तब तक उनका अन्न का त्याग (भूख हड़ताल) राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में अनवरत जारी रहेगा।

    इस्तीफे की खबर आते ही विश्वविद्यालय परिसर में जश्न के साथ-साथ हुंकार भी गूंजी। अनशन स्थल पर डटे शुभम रेवाड़ ने मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा:

    "शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्र शक्ति के एकजुट संघर्ष का परिणाम है। यह हमारी पहली जीत है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक राजस्थान के छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार (छात्रसंघ चुनाव) और मातृभाषा का मान-सम्मान (राजस्थानी विभाग) नहीं मिल जाता, तब तक मेरी भूख हड़ताल खत्म नहीं होगी। यह लड़ाई पूरी जीत के बाद ही रुकेगी।"

    शेष 2 प्रमुख मांगे (जिन्हें पूरा होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी):

    प्रदेश भर में छात्रसंघ चुनावों की तत्काल बहाली:

    राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोक दिए गए छात्रसंघ चुनावों को तुरंत बहाल (पुनः शुरू) किया जाए, ताकि युवाओं को उनका लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार वापस मिल सके।

    राजस्थान विश्वविद्यालय में 'राजस्थानी भाषा विभाग' की स्थापना:

    राजस्थान विश्वविद्यालय में अविलंब पृथक राजस्थानी भाषा विभाग (Department of Rajasthani Language) खोला जाए। इसके साथ ही न्यूनतम (कम से कम) फीस में राजस्थानी भाषा में डिप्लोमा, डिग्री और पीजी (स्नातकोत्तर) कोर्स शुरू किए जाएं ताकि मातृभाषा को उसका वास्तविक दर्जा और मान-सम्मान मिल सके।

    छात्र समर्थकों और युवाओं ने साफ चेतावनी दी है कि एक मांग मान लिए जाने से आंदोलन का उत्साह और बढ़ा है, और अब जब तक राजस्थान सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन बाकी दोनों मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं करते, तब तक शुभम रेवाड़ का यह अनशन जारी रहेगा।

     

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