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    ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

    2 hours ago

     

    Yugcharan News / 01-09-2026

    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलने वाली एक बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली है और कक्षा 11 में पढ़ती है। आरोप है कि बस चालक और परिचालक ने उसे बस के गंतव्य को लेकर गलत जानकारी दी और इसके बाद चलती बस में उसके साथ कथित तौर पर अपराध किया। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना 4 अगस्त की बताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि किशोरी 3 अगस्त को अपने घर से बिना माता-पिता को बताए निकली थी। बताया गया कि पढ़ाई को लेकर मां की डांट के बाद वह घर से निकलकर नोएडा के सेक्टर-63 स्थित अपने रिश्तेदार के घर जाने के लिए निकली थी। रास्ते में वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई। इसी दौरान शाम होने और बारिश शुरू होने के कारण वह कथित तौर पर रास्ता भटक गई।

    बारिश के बीच बस का इंतजार कर रही थी किशोरी

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परी चौक के पास किशोरी ने एक बस को आते देखा और उसे रुकने का संकेत दिया। यह बस कथित तौर पर किसी नियमित यात्री सेवा के रूप में उस समय संचालित नहीं हो रही थी। पुलिस की जांच के मुताबिक, बस पहले मरम्मत के लिए सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप में गई थी और मरम्मत के बाद वापस लौट रही थी।

    आरोप है कि बस के परिचालक ने किशोरी को बताया कि बस नोएडा के सेक्टर-63 की ओर जा रही है। इसी भरोसे पर वह बस में सवार हो गई। पुलिस के अनुसार, बस में उस समय कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था। जांच में यह भी सामने आया है कि बस के अंदर के पर्दे खींचे हुए थे, जिससे बाहर से वाहन के भीतर की गतिविधियां आसानी से दिखाई नहीं दे रही थीं।

    पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि बस के चलने के कुछ समय बाद परिचालक ने उसके साथ अनुचित व्यवहार शुरू किया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने उसके साथ कथित तौर पर यौन हिंसा की। शिकायत के मुताबिक, जब किशोरी ने विरोध करने की कोशिश की तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच पीड़िता की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान से जुड़ी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    करीब 47 किलोमीटर तक चली बस

    जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, बस परी चौक से चलकर ग्रेटर नोएडा-नोएडा एक्सप्रेसवे की ओर गई और बाद में चिल्ला बॉर्डर के रास्ते दिल्ली में दाखिल हुई। इसके बाद बस मयूर विहार क्षेत्र से होकर रिंग रोड की तरफ बढ़ी और अंत में कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे के नजदीक रिंग रोड क्षेत्र में पहुंची।

    पुलिस के मुताबिक, बस ने परी चौक से कश्मीरी गेट के पास तक लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की। आरोप है कि इसी दौरान किशोरी बस के भीतर मौजूद थी। बाद में आरोपियों ने उसे रिंग रोड के पास उतार दिया और वहां से फरार हो गए।

    पीड़िता इसके बाद कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस को घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है। शिकायत में कथित सामूहिक दुष्कर्म के साथ अपहरण और मारपीट से जुड़े आरोप भी शामिल किए गए हैं।

    सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों तक पहुंची पुलिस

    मामले की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने बस की पहचान करने और उसके रूट का पता लगाने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच टीम ने बस की आवाजाही से जुड़े सुरागों को जोड़ते हुए उसे दिल्ली के तिमारपुर इलाके में स्थित एक पार्किंग क्षेत्र तक ट्रैक किया।

    पुलिस के अनुसार, कश्मीरी गेट थाने में शिकायत दर्ज होने के करीब चार घंटे के भीतर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपी कथित तौर पर 20 वर्ष की उम्र के शुरुआती दशक में हैं और कानपुर के रहने वाले बताए गए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों से बस के संबंध में भी जानकारी मिली। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि बस में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे सूरजपुर की एक वर्कशॉप में मरम्मत के लिए भेजा गया था। पुलिस का दावा है कि मरम्मत पूरी होने के बाद जब दोनों आरोपी बस लेकर लौट रहे थे, तब उनकी नजर परी चौक के पास किशोरी पर पड़ी।

    पुलिस के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया है कि दोनों ने किशोरी को बस के गंतव्य के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी दी और उसे वाहन में बैठने के लिए राजी किया। हालांकि, इस मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    नाबालिग पीड़िता होने के कारण पॉक्सो के तहत कार्रवाई

    किशोरी की उम्र 16 वर्ष होने के कारण मामले में बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो कानून के प्रावधान लागू किए गए हैं। इस कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में विशेष कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि जांच के दौरान पीड़ित बच्चे की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए।

    इस मामले में भी पुलिस ने पीड़िता की पहचान से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। नाबालिग के बयान और अन्य साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज, बस से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    घटना ने दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन और विशेष रूप से अकेले सफर करने वाले नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि जांच एजेंसियां अभी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, लेकिन इस मामले में यह तथ्य महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि कथित घटना एक ऐसी बस में हुई जिसमें उस समय कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था।

    पुलिस जांच में कई पहलुओं पर फोकस

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस किस समय परी चौक से चली, उसका निर्धारित या वास्तविक मार्ग क्या था और रास्ते में वह किन-किन स्थानों से गुजरी। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बस में मौजूद दोनों आरोपियों की भूमिका क्या थी और घटना से पहले तथा बाद में उनकी गतिविधियां क्या रहीं।

    सीसीटीवी फुटेज को जांच में इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे बस की आवाजाही और आरोपियों की गतिविधियों की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है। पुलिस ने बस को बरामद कर उससे जुड़े संभावित साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है।

    अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा, विशेषकर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा, को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है। किसी भी यात्री को वाहन में बैठने से पहले उसके वास्तविक गंतव्य और सेवा की जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। वहीं, परिवहन व्यवस्था से जुड़े संचालकों और संबंधित एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निगरानी और सुरक्षा उपाय प्रभावी रूप से लागू किए जाएं।

    फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। पुलिस द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों और आगे की कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम में आरोपों की पूरी तस्वीर क्या है। पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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